मध्य प्रदेश में आग का कहर! भोपाल और छिंदवाड़ा के 2 अस्पतालों में भड़की आग, 3 नवजात बुरी तरह झुलसे

खबर सार :-

मध्य प्रदेश के भोपाल और छिंदवाड़ा जिलों के दो अस्पतालों में आग लग गई। छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में 3 नवजात झुलस गए। दोनों मामलों में तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है।
मध्य प्रदेशः भोपाल और छिंदवाड़ा के 2 अस्पतालों में लगी आग, 3 शिशु झुलसे

खबर विस्तार : -

भोपाल: मध्य प्रदेश के दो जिलों भोपाल और छिंदवाड़ा के दो अस्पतालों में शुक्रवार की देर रात भीषण आग लग गई। छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एनआईसीयू में आग लगने से 3 नवजात शिशु झुलस गए, जबकि भोपाल के दीपशिखा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। दोनों घटनाओं में शाॅर्ट सर्किट आग लगने की वजह बताई जा रही है।

शुक्रवार रात भोपाल के बागसेवनिया पुलिस स्टेशन इलाके के विद्यानगर में स्थित दीपशिखा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। आग ग्राउंड फ्लोर पर लगी थी, लेकिन धुआं अस्पताल की ऊपरी मंजिलों तक फैल गया। सूचना मिलने पर बागसेवनिया पुलिस मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड को जानकारी दी। मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर पास के सहारा अस्पताल में शिफ्ट किया गया। किसी भी मरीज, स्टाफ या अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं है। 

21 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला

पुलिस के मुताबिक, अस्पताल के बाहर ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने परिसर से धुआं निकलते देखा और तुरंत अस्पताल के स्टाफ को सतर्क किया। इसके बाद, बागसेवनिया पुलिस स्टेशन के ASI वीर मणि पांडे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उस समय भर्ती 21 मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस और अस्पताल स्टाफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी; इन मरीजों में ICU में भर्ती 5-6 लोग और सिजेरियन डिलीवरी के बाद भर्ती महिलाएं शामिल थीं। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, पुलिस ने मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान को प्राथमिकता दी।

लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों से निकाले गए मरीज

आग ग्राउंड फ्लोर के इमरजेंसी रूम में लगी थी और धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया था। बिजली सप्लाई बंद होने के कारण लिफ्ट का इस्तेमाल करना संभव नहीं था। इसलिए, पुलिस और अस्पताल के स्टाफ ने सीढ़ियों का इस्तेमाल करके मरीजों को बाहर निकाला। लगभग 15 पुलिसकर्मियों ने सभी मरीजों को एक-एक करके बाहर निकालने के लिए लगातार काम किया। सीढ़ियों वाले हिस्से में पर्याप्त जगह और खिड़कियां होने से धुआं ऊपर की ओर निकल सका, जिससे बचाव दल को निकासी के दौरान कुछ राहत मिली। ICU के मरीजों और सर्जरी के बाद ठीक हो रही महिलाओं को विशेष सावधानी के साथ बाहर निकाला गया।

इलेक्ट्रिकल बोर्ड में शॉर्ट सर्किट की आशंका

पुलिस की शुरुआती जांच से पता चलता है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। आग ग्राउंड फ्लोर के इमरजेंसी रूम में डॉक्टरों के बैठने की जगह के पास लगे एक इलेक्ट्रिकल बोर्ड में लगी थी। बोर्ड में कई स्विच थे। आशंका है कि अंदर के किसी तार में शॉर्ट सर्किट होने से आग लगी। बोर्ड के पास रखे प्लाईवुड के अलमारियों और अन्य सामानों में भी आग लग गई। आग लगने और धुएं के ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने की इस घटना ने अस्पतालों में आग से सुरक्षा के उपायों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और संबंधित विभाग अब आग लगने के वास्तविक कारण और अस्पताल में आग से सुरक्षा के इंतजामों की जांच कर रहे हैं।

रात करीब 11:00 बजे आग पर काबू पाया गया

फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 10:35 बजे आग लगने की सूचना मिली। फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। रात करीब 11:00 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। हालांकि आग इमरजेंसी वार्ड तक ही सीमित रही, लेकिन धुआं अस्पताल के अन्य हिस्सों में फैल गया। इसके चलते अस्पताल को पूरी तरह खाली करा लिया गया और बिजली की सप्लाई काट दी गई।

शिफ्ट बदलने के कारण पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था

ASI वीर मणि पांडे के अनुसार, यह घटना रात करीब 10:00 बजे हुई। चूंकि यह समय पुलिस की शिफ्ट बदलने का था, इसलिए मौके पर पर्याप्त पुलिसकर्मी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि बचाव कार्य में लगभग 15 पुलिसकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन के अन्य कर्मचारियों का सहयोग मिला। सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और समय रहते दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।

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छिंदवाड़ा: जिला अस्पताल में आग लगने से तीन बच्चे झुलसे

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में शुक्रवार रात एक बड़ी घटना हुई। रेडियंट वार्मर मशीन में आग लगने से तीन नवजात बच्चे बुरी तरह झुलस गए। अस्पताल के पीडियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) डॉ. अंशुल लांबा ने पुष्टि की कि आग वार्मर के हीटिंग फिलामेंट में स्पार्किंग के कारण लगी थी। उन्होंने कहा, "जन्म के बाद शरीर का तापमान स्थिर करने के लिए नवजातों को वार्मर में रखा जाता है। शुक्रवार रात करीब  1:50 AM पर फिलामेंट में अचानक स्पार्क होने से आग लग गई। तीनों बच्चे बुरी तरह झुलस गए।"

तीनों नवजातों की हालत गंभीर, जबलपुर रेफर 

आग लगने से अस्पताल में अफरातफरी मच गई। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई की; उन्होंने जलते हुए वार्मर से नवजातों को बाहर निकाला, अग्निशामक यंत्रों (fire extinguishers) का इस्तेमाल करके आग पर काबू पाया और तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया। तुरंत चिकित्सा सहायता मिलने के बावजूद, जलने की गंभीरता के कारण तीनों नवजातों की हालत गंभीर बनी हुई है। चोटों की गंभीरता और छिंदवाड़ा अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जन (बच्चों के सर्जन) की कमी को देखते हुए, तीनों बच्चों को बेहतर इलाज के लिए जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

NICU में उपकरणों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच शुरू

अस्पताल प्रशासन ने घटना की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि वार्मर मशीन में तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट इसका संभावित कारण हो सकता है। अधिकारी NICU में उपकरणों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच कर रहे हैं ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो। इस दुखद घटना ने सरकारी अस्पतालों में जरूरी चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और इंटेंसिव केयर यूनिट में नवजातों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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