प्रोजेक्ट चीता के लिए बड़ी उपलब्धि, केजीपी12 ने चार शावकों को दिया जन्म; देश में चीतों की संख्या बढ़कर हुई 56

खबर सार :-

प्रोजेक्ट चीता के 4 साल पूरे होने के एक दिन बाद मादा चीता केजीपी12 ने कूनो नेशनल पार्क में चार शावकों को जन्म दिया है। अब देश में चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है।
कूनो में बढ़ा चीतों का कुनबा, केजीपी 12 ने चार शावकों को दिया जन्म

खबर विस्तार : -

श्योपुर: श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क से 'प्रोजेक्ट चीता' के चार साल पूरे होने के मौके पर एक बहुत अच्छी खबर आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार नए शावकों (बच्चों) को जन्म दिया है। इन नए शावकों के आने से देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है। इनके आने से कूनो में चीतों की आबादी बढ़ने की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म 'X' पर यह जानकारी साझा की और 'प्रोजेक्ट चीता' और कूनो नेशनल पार्क की पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नए शावकों के जन्म को 'प्रोजेक्ट चीता' के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म 'X' पर लिखा, "सचमुच 'प्रोजेक्ट चीता' के लिए यह एक ऐतिहासिक और खुशी का पल है! भारत के चीता प्रोजेक्ट के चार साल पूरे होने के ठीक एक दिन बाद, भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने कूनो में चार शावकों को जन्म दिया है। चार साल, चार नई जिंदगी; यह उम्मीद, हिम्मत और भारत में चीता संरक्षण की बढ़ती सफलता का एक शानदार प्रतीक है। कूनो और 'प्रोजेक्ट चीता' से जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई।"

कूनो नेशनल पार्क में कुल 49 चीते

मिली जानकारी के अनुसार, अभी कूनो नेशनल पार्क में कुल 49 चीते हैं। इनमें से 17 चीते खुले जंगल वाले इलाके में घूम रहे हैं; इस समूह में 10 नर और 7 मादा चीते शामिल हैं। वहीं, 32 चीते 'सॉफ्ट-रिलीज बाड़ों' (soft-release enclosures) में रखे गए हैं, जिनमें 5 नर और 8 मादा चीते हैं। इसके अलावा, इन बाड़ों में एक साल से कम उम्र के शावक भी मौजूद हैं।

चीता संरक्षण को दिया जा रहा बढ़ावा 

चीता संरक्षण कार्यक्रम कूनो से आगे भी बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में भी तीन चीते मौजूद हैं। इस तरह, मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण और उन्हें दोबारा बसाने का कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है। चार नए शावकों का जन्म कूनो और 'प्रोजेक्ट चीता' के लिए एक अहम घटना मानी जा रही है। भारत में जन्मे चीतों की संख्या में बढ़ोतरी को प्रोजेक्ट के अगले चरण की ओर एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

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सबसे पहले नामीबिया से लाए गए थे 8 चीते

प्रधानमंत्री ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा। इसके बाद, दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए और उन्हें भी वहां छोड़ा गया। शुरुआत में, नई जगह और मौसम में अंतर के कारण इन चीतों को भारत के माहौल में ढलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 18 फरवरी, 2024 तक दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों को वहां रहते हुए दो साल पूरे हो चुके थे; इस दौरान मृत्यु दर का कम रहना इस प्रोजेक्ट की मुख्य सफलता का एक अहम पड़ाव साबित हुआ।

कूनो बना चीतों का ‘अपना घर’

कूनो नेशनल पार्क के अंदर लगभग 750 वर्ग किलोमीटर के इलाके को चीतों के आवास के लिए उपयुक्त माना गया है। इसके अलावा, श्योपुर और शिवपुरी जिलों में फैले लगभग 3,000 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र को चीतों के स्वतंत्र रूप से घूमने के लिए उपयुक्त माना गया है। कूनो नेशनल पार्क के पास के गांवों के निवासियों को 'चीता मित्र' के तौर पर नामित किया गया है। चीतों के लिए अनुकूल आवास विकसित करने के साथ-साथ, पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जरूरी निर्माण कार्य पूरे करने के उपाय भी किए गए हैं। कूनो में शिकार बनने वाले जानवरों की संख्या भी चीता आबादी को सहारा देने के लिए काफी है।

चीतों के पुनर्वास के लिए 10 जगहों का हुआ अध्ययन

1952 में भारत में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद उन्हें देश में फिर से लाने की कोशिशें जारी रहीं। सितंबर 2009 में, राजस्थान के गजनेर में चीता विशेषज्ञों की एक बैठक हुई, जिसमें चीता कंजर्वेशन फंड की डॉ. लॉरी मार्कर, स्टीफन जे. ओ'ब्रायन और अन्य विशेषज्ञों ने दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की। पर्यावरण और वन मंत्रालय के निर्देशों पर अमल करते हुए, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने 2010 में चीतों को फिर से बसाने के लिए संभावित जगहों का सर्वे किया। जिन दस जगहों का अध्ययन किया गया, उनमें मध्य प्रदेश में नौरादेही अभयारण्य और कूनो-पालपुर अभयारण्य, और राजस्थान में शाहगढ़ को उपयुक्त पाया गया। इनमें से कूनो को सबसे उपयुक्त जगह के तौर पर चुना गया। आज, कूनो देश के चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट का मुख्य केंद्र है।

FAQ

1- भारत में चीतों के विलुप्त होने की घोषणा कब की गई?

भारत से एशियाई चीतों के विलुप्त होने की आधिकारिक घोषणा वर्ष 1952 में की गई। इसके 70 साल बाद साल 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाकर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में इनके पुनर्वास की कोशिशें शुरू की गईं।

2- चीता प्रोजेक्ट कब शुरू किया गया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। इस परियोजना के लिए सबसे पहले नामीबिया से 8 चीते लाए गए थे।

3- देश में इस समय चीतों की कितनी संख्या है?

18 सितंबर 2026 को कूनो नेशनल पार्क में चार नए शावकों के जन्म के बाद अब भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है।

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