कूनो में फिर गूंजी किलकारी: चीता ‘ज्वाला’ ने दिए 5 शावकों को जन्म, भारत में संख्या पहुंची 53
खबर सार :-
कूनो नेशनल पार्क में चीता ज्वाला द्वारा पांच शावकों का जन्म ‘प्रोजेक्ट चीता’ की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। लगातार बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि भारत में चीता पुनर्स्थापन की योजना सही दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि संरक्षण प्रयास इसी तरह जारी रहे तो आने वाले वर्षों में भारत में चीतों की स्थायी और समृद्ध आबादी स्थापित हो सकती है।
खबर विस्तार : -
Project Cheetah Jwala Five Cubs: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित Kuno National Park से एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। यहां मादा चीता ‘ज्वाला’ ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इस नए जन्म के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है, जो देश में चीता पुनर्स्थापन अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने सोशल मीडिया पर मादा चीता और उसके शावकों की तस्वीर साझा करते हुए इस खुशखबरी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान से आई यह खबर वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की बड़ी सफलता है और ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ज्वाला द्वारा पांच शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि भारत में चीता पुनर्वास के प्रयास सफल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी प्रजाति के पुनर्स्थापन कार्यक्रम में प्राकृतिक प्रजनन सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। कूनो में लगातार हो रहे शावकों के जन्म से यह संकेत मिलता है कि यहां का वातावरण चीतों के अनुकूल बनता जा रहा है।

एशिया से खत्म हो चुके थे चीते
एक समय ऐसा था जब एशिया से चीते पूरी तरह विलुप्त हो चुके थे। भारत में अंतिम चीता 1950 के दशक में देखा गया था, जिसके बाद यह प्रजाति देश से समाप्त हो गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ शुरू किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने जन्मदिन पर सितंबर 2022 में अफ्रीका से लाए गए चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। ये चीते मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए थे। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में चीतों की आबादी को फिर से स्थापित करना और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करना है।
दक्षिण अफ्रीकी चीतों ने बनाई नई पीढ़ी
वन विभाग के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से फिलहाल 8 पूरी तरह स्वस्थ और कूनो में स्थापित हो चुके हैं। इनमें से तीन चीतों को सफलतापूर्वक Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary में स्थानांतरित किया गया है, जहां उनके लिए नया आवास विकसित किया जा रहा है। इन अफ्रीकी चीतों से अब तक जन्मे 10 शावक जीवित और स्वस्थ हैं। इससे यह साबित होता है कि भारतीय परिस्थितियों में भी चीते सफलतापूर्वक प्रजनन कर सकते हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि यह प्रजनन भविष्य में चीतों की स्थायी आबादी स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अन्य मादा चीतों की भी बढ़ रही संतति
कूनो में मौजूद अन्य मादा चीतों ने भी हाल के समय में शावकों को जन्म दिया है। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता ‘मुखी’ ने पांच शावकों को जन्म दिया, जिसे इस परियोजना की ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया। इसके अलावा मादा चीता ‘गामिनी’ दूसरी बार मां बनी है। उसकी पहली गर्भावस्था से जन्मे तीन सब-एडल्ट शावक स्वस्थ हैं और हाल ही में उसने तीन नए शावकों को जन्म दिया है। वहीं मादा चीता ‘वीरा’ अपने 13 महीने के शावक के साथ खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रही है, जबकि ‘निर्वा’ अपने 10 महीने के तीन शावकों के साथ सुरक्षित बाड़े में रह रही है।
बोत्स्वाना से आए नए चीते
चीतों की संख्या और आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने के लिए हाल ही में अफ्रीकी देश Botswana से नौ नए चीतों को एयरलिफ्ट कर भारत लाया गया है। इन चीतों को कूनो में अनुकूलन प्रक्रिया से गुजरने के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग देशों से चीतों को लाने से उनकी आनुवंशिक विविधता बनी रहेगी, जिससे भविष्य में उनकी आबादी स्वस्थ और स्थिर बनी रहेगी।
कूनो बन रहा चीता संरक्षण का केंद्र
विशेषज्ञों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क का विशाल घास का मैदान, पर्याप्त शिकार और सुरक्षित वातावरण चीतों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी कारण इसे ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए चुना गया था। लगातार हो रहे प्रजनन और नए चीतों के आगमन से कूनो अब धीरे-धीरे भारत में चीता संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
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