Chhattisgarh High Court Bomb Threaten: Bilaspur से Dhanbad तक अलर्ट, कोर्ट परिसरों में सघन जांच
खबर सार :-
झारखंड में कोर्ट परिसरों को मिल रही बम धमकियां भले ही अब तक फर्जी साबित हुई हों, लेकिन इन घटनाओं ने सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर ला दिया है। धनबाद और रांची की घटनाएं दर्शाती हैं कि साइबर माध्यम से फैलाए जा रहे डर से निपटने के लिए तकनीकी जांच और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।
खबर विस्तार : -
Chhattisgarh High Court Bomb Threaten: छत्तीसगढ़ में न्यायालय और प्रशासनिक परिसरों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। बुधवार को बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को एक धमकी भरा ई-मेल मिला, जिसमें परिसर को बम से उड़ाने का दावा किया गया था। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं और पूरे कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया।
Chhattisgarh हाईकोर्ट परिसर को कराया खाली, जांच शुरू
एहतियात के तौर पर हाईकोर्ट परिसर को तुरंत खाली कराया गया। वकीलों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सुरक्षा एजेंसियों ने सभी एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बंद कर दिए। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाया गया। आधुनिक उपकरणों के जरिए कोर्ट रूम, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग और अन्य संवेदनशील स्थानों की बारीकी से जांच की गई। कई घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी
सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने बताया कि परिसर में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। बिना पहचान और सुरक्षा जांच के किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही। हाईकोर्ट की सुरक्षा अस्थायी रूप से और कड़ी कर दी गई है। पुलिस की साइबर सेल ई-मेल के स्रोत की जांच में जुटी है। सर्वर, आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल की तकनीकी पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी कहां से भेजी गई। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस तरह की धमकियों के पीछे शरारती तत्व या संगठित गिरोह भी हो सकता है।

पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
यह पहली बार नहीं है जब किसी अदालत को इस तरह की धमकी मिली हो। पिछले कुछ महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकियां मिलती रही हैं। अधिकांश मामलों में जांच के बाद धमकियां फर्जी साबित हुई हैं, लेकिन हर बार सुरक्षा एजेंसियों को व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाना पड़ता है। इसी कड़ी में झारखंड के धनबाद में भी हाल ही में सिविल कोर्ट को धमकी भरा ई-मेल मिला था। सूचना मिलते ही वहां भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड ने पूरे परिसर की तलाशी ली, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।
समाहरणालय और अन्य प्रशासनिक परिसरों को उड़ाने की धमकियां
रांची में भी पूर्व में समाहरणालय और अन्य प्रशासनिक परिसरों को इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं। वहां भी घंटों चले तलाशी अभियान के बाद कोई विस्फोटक बरामद नहीं हुआ था। इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने साइबर अपराध और फर्जी सूचनाओं की चुनौती को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-मेल के जरिए भेजी जा रही ऐसी धमकियां आमतौर पर डर और भ्रम फैलाने के उद्देश्य से की जाती हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां किसी भी खतरे को हल्के में नहीं ले सकतीं। न्यायालय जैसे संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।

झूठी सूचना देने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाईः छत्तीसगढ़ पुलिस
छत्तीसगढ़ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि झूठी सूचना देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों की पहचान के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत किया जा रहा है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। आम लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। लगातार मिल रही ऐसी धमकियों ने न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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