झांसी रेलवे मंडल के 8 स्टेशन अब 'सुरक्षा कवच' से होंगे लैस, ट्रेन हादसों पर लगेगा लगाम और बढ़ेगी रफ्तार
खबर सार :-
झांसी रेलवे मंडल के 8 स्टेशनों पर स्वदेशी 'कवच' तकनीक लागू होने जा रही है। जानें कैसे यह ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम हादसों को रोकेगा और ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाएगा।
खबर विस्तार : -
Jhansi Railway Division Kavach System : भारतीय रेलवे अपनी सुरक्षा प्रणाली को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में झांसी रेलवे मंडल के आठ प्रमुख स्टेशनों को अब स्वदेशी तकनीक 'कवच' (Kavach) से लैस करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद, अब धरातल पर काम शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस तकनीक के लागू होने से न केवल रेल हादसों में कमी आएगी, बल्कि खराब मौसम और कोहरे के दौरान भी ट्रेनों का संचालन सुरक्षित और तेज गति से सुनिश्चित हो सकेगा। कवच एक 'ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन' (ATP) सिस्टम है, जिसे पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है। यह प्रणाली जीपीएस (GPS) और रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाले हादसों को रोकना है। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह के अनुसार, "कवच एक ऐसी ढाल है जो ट्रेन की गति को नियंत्रित करने और सिग्नल जंपिंग जैसी स्थितियों में ट्रेन को खुद-ब-खुद संभालने की क्षमता रखती है।"
इन रूटों पर बिछेगा सुरक्षा का जाल
रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के उद्देश्य से झांसी मंडल के अंतर्गत आने वाले उन विशिष्ट रेल खंडों की पहचान कर ली है, जहाँ प्राथमिकता के आधार पर 'कवच' सिस्टम को इंस्टॉल किया जाएगा। योजना के मुताबिक, मुख्य रूप से ललितपुर से खजुराहो, बिरला नगर से उदी मोड़, खजुराहो से महोबा और ऐट से कोंच के बीच के ट्रैक को पूरी तरह इस सुरक्षा घेरे से कवर किया जाएगा। इन महत्वपूर्ण मार्गों पर कवच प्रणाली के सफलतापूर्वक सक्रिय होने के बाद, ट्रेनें अपनी अधिकतम अनुमेय गति (Full Speed) के साथ सुरक्षित रूप से पटरियों पर दौड़ सकेंगी, जिससे यात्रियों के समय की बचत होगी और रेल परिचालन में भी सटीकता आएगी।
हादसों पर लगाम कसेगी कवच की यह आधुनिक कार्यप्रणाली
झांसी मंडल में लागू होने वाली यह कवच प्रणाली लोको पायलट के लिए एक दक्ष सहायक के रूप में कार्य करेगी, जो मानवीय भूलों की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर देगी। इस सिस्टम की कार्यप्रणाली इतनी सटीक है कि यदि लोको पायलट अनजाने में सिग्नल की अनदेखी करता है या ट्रेन को निर्धारित गति सीमा से ऊपर ले जाता है, तो यह तकनीक तत्काल सक्रिय होकर उसे ऑडियो-विजुअल अलर्ट देगी; और यदि समय रहते कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई, तो ट्रेन में स्वचालित रूप से ब्रेक लग जाएंगे। सुरक्षा का यह घेरा आमने-सामने की टक्कर रोकने में भी सक्षम है, जहाँ एक ही ट्रैक पर कवच से लैस दो इंजनों के आने की स्थिति में यह तकनीक उन्हें एक सुरक्षित दूरी पर ही रोक देती है। इतना ही नहीं, यह प्रणाली खराब दृश्यता और घने कोहरे के दौरान भी उतनी ही प्रभावी साबित होती है, क्योंकि इसमें सिग्नल की हर बारीक जानकारी सीधे इंजन के डैशबोर्ड पर प्रदर्शित होती है, जिससे पायलट को धुंध के बीच ट्रैक देखने की मशक्कत नहीं करनी पड़ती। साथ ही, इसके जरिए कंट्रोल रूम से ट्रेनों की लाइव मॉनिटरिंग की जा सकती है और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत SOS संदेश भेजकर सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।
सुरक्षित सफर और समय की बचत
वर्तमान में कोहरे या खराब मौसम के कारण ट्रेनों की रफ्तार काफी धीमी हो जाती है, जिससे यात्रियों को घंटों देरी का सामना करना पड़ता है। कवच तकनीक के आने से झांसी मंडल में ट्रेनों का पंक्चुअलिटी रेट बेहतर होगा। स्वदेशी तकनीक होने के कारण इसका रखरखाव भी आसान और किफायती है। रेलवे का दावा है कि इस प्रणाली के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद, मानवीय चूक से होने वाली रेल दुर्घटनाएं शून्य के स्तर पर आ जाएंगी। झांसी मंडल के इन आठ स्टेशनों का कायाकल्प सुरक्षा के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित होगा।
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