झांसी मंडल में 426 ट्रैक किमी क्षेत्र का होगा कायाकल्प, बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार
खबर सार :-
झाँसी रेलवे मंडल में, भविष्य को ध्यान में रखते हुए और ट्रेनों की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र, OHE क्षमता को उन्नत करने तथा OHE तारों को बदलने का कार्य शुरू किया जा रहा है। यह कार्य रेल मंत्री से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद प्रारंभ हो रहा है।
खबर विस्तार : -
झांसीः भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय रेल के झांसी रेल मंडल में व्यापक सुधार कार्य शुरू होने जा रहा है। बढ़ती ट्रेन संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) प्रणाली की क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस परियोजना पर लगभग 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे रेल संचालन अधिक सुगम और विश्वसनीय हो सकेगा।
बिजली घरों की बढ़ेगी क्षमता
इस परियोजना के तहत झांसी से गोविंदपुरी रेलखंड पर OHE लाइन की क्षमता बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में इस रूट पर 25 केवी विद्युतकर्षण प्रणाली के माध्यम से ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। लेकिन भविष्य में ट्रेनों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए इस प्रणाली को दोगुना करने की योजना बनाई गई है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस कार्य के पूरा होने के बाद वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और बिजली आपूर्ति से जुड़ी अन्य समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलेगी। इसके साथ ही ट्रैक किनारे स्थित उप-विद्युत केंद्रों और बिजली घरों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे ताकि ट्रेनों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा झांसी-मानिकपुर रेलखंड पर पुराने OHE तारों को बदलना भी है। लगभग 40 साल पुराने तारों को हटाकर उनकी जगह आधुनिक जॉइंटलेस कॉन्टैक्ट वायर लगाए जाएंगे। पहले की तकनीक में 1500 मीटर की लंबाई में कई ब्रेजिंग जॉइंट लगाए जाते थे, जिससे अक्सर तार टूटने की शिकायतें आती थीं और रेल यातायात बाधित होता था। नई तकनीक से इस समस्या का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है।
रेल परिचालन क्षमता में होगी वृद्धि
रेलवे ने कुछ स्थानों पर इस कार्य की प्रारंभिक तैयारी भी शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इस अपग्रेड से न केवल तकनीकी खामियां दूर होंगी, बल्कि ट्रेन संचालन की गति और दक्षता भी बढ़ेगी।
इस परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि इससे रेल परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि उच्च गति वाली यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन में भी काफी सुधार आएगा। साथ ही विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बेहतर होगी, जिससे ट्रेनों की समयबद्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
यह परियोजना अप और डाउन दोनों ट्रैक मिलाकर कुल 426 ट्रैक किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगी। इसके अलावा वर्ष 2026-27 तक इस पूरे रेलखंड को ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली से भी लैस करने की योजना है। इससे ट्रेनों के संचालन में और अधिक वृद्धि संभव हो सकेगी और सुरक्षा मानकों में भी सुधार होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के तकनीकी उन्नयन से रेलवे नेटवर्क पर दबाव कम होगा और माल परिवहन की गति बढ़ेगी, जिससे औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। कुल मिलाकर, यह परियोजना क्षेत्रीय विकास और आधुनिक रेल प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
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