ना डिग्री का भरोसा ना सुरक्षा की गारंटी, बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे निजी अस्पताल
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। झांसी में 20 निजी अस्पताल बिना पंजीकरण संचालित हो रहे हैं, जबकि उनके आवेदन लंबित हैं। फायर एनओसी, बायोमेडिकल वेस्ट और चिकित्सकों की कमी के कारण अनुमति नहीं मिली। फिर भी कार्रवाई न होना मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
खबर विस्तार : -
झांसीः स्वास्थ्य विभाग अपने काम और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार सवालों के घेरे में रहता है। इस बार लापरवाही की हद यह है कि डिपार्टमेंट की जानकारी के बावजूद 20 निजी अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं।
यह बहुत चिंता की बात है। सूत्र बताते हैं कि ये निजी अस्पताल ज़रूरी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अगर कोई हादसा होता है, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार होगा, यह एक बड़ा सवाल है। नियम है कि किसी भी अस्पताल या क्लिनिक को चलने से पहले स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड होना ज़रूरी है।
स्वास्थ्य विभाग नहीं कर रहा कोई कार्रवाई
रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा होने के बाद ही कोई निजी अस्पताल या क्लिनिक मरीज़ों को भर्ती या इलाज कर सकता है। पता चला है कि झांसी ज़िले में लगभग 20 निजी अस्पताल के रजिस्ट्रेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग में अप्लाई किया गया है, लेकिन ये अप्लाई अभी भी पेंडिंग हैं। हालांकि, ये सभी अस्पताल फिर से खुल गए हैं और हेल्थ सर्विसेज़ शुरू हो गई हैं। चिंता की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग को इन मामलों की जानकारी होने के बावजूद न तो इनका ऑपरेशन रोका गया है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
ऐसा लगता है कि स्वास्थ्य विभाग को मरीज़ों की जान की कोई परवाह नहीं है, या यूं कहें कि ये निजी अस्पताल मरीज़ों की जान से खेल रहे हैं। अगर इलाज के दौरान किसी मरीज के साथ कुछ अनहोनी हो जाती है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा, यह एक बड़ा सवाल है। निजी अस्पताल चलाने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं, जिसमें अस्पताल का नक्शा, डॉक्टर-स्टाफ सर्टिफिकेट, जमीन के कागज़ात और एप्लीकेशन फीस के साथ संबंधित स्टेट हेल्थ अथॉरिटी या CMO ऑफिस में एप्लीकेशन फॉर्म जमा करना शामिल है।
ACMO ने दी जानकारी
कम से कम 10 इनपेशेंट बेड, 24 घंटे अटेंडेंस वाले क्वालिफाइड डॉक्टर और नर्स, फायर सेफ्टी लाइसेंस, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से NOC और बिल्डिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी ज़रूरी है। एप्लीकेशन के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल का फिजिकल इंस्पेक्शन करेगी, जिसमें मशीनरी सेफ्टी और स्टाफ का परफॉर्मेंस शामिल है। यह इंस्पेक्शन ठीक से पूरा होने पर स्वास्थ्य विभाग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करता है।
इसके बाद ही अस्पताल को कानूनी तौर पर चलाया जा सकेगा। इस बारे में ACMO डॉ. उत्सव सिंह का कहना है कि 20 निजी अस्पताल के एप्लीकेशन पेंडिंग हैं, जिनमें फायर NOC, बायोमेडिकल वेस्ट डॉक्टर न होने की वजह से उन्हें अभी तक NOC नहीं दिया गया है।
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