Jhansi : राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में दवाओं का टोटा, मिल रहा सिर्फ परामर्श
खबर सार :-
झांसी महानगर स्थित बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय एक बार फिर अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। अस्पताल में लंबे समय से बजट की कमी के चलते मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
खबर विस्तार : -
झांसीः झांसी महानगर में मौजूद बुंदेलखंड गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज और हॉस्पिटल में हमेशा बजट की कमी रहती है। कभी मरीज़ों को खाना नहीं मिल पाता, तो कभी उन्हें दवाएँ भी नहीं मिलतीं। सूत्रों से पता चला है कि हॉस्पिटल में तीन महीने से दवाएँ नहीं हैं। हॉस्पिटल की डिस्पेंसरी में 40 दवाओं की लिस्ट में से सिर्फ़ तीन या चार ही मिलती हैं।
बाहर से दवा लेने को मजबूर मरीज
यह सोचना मुश्किल है कि मरीज़ों का इलाज कैसे हो रहा होगा। मरीज़ों को हर बीमारी का इलाज डिस्पेंसरी में मौजूद सिर्फ़ तीन या चार दवाओं से ही मिल जाता है, जबकि बाकी दवाएँ बाहर से लिखी जाती हैं, जिससे मरीज़ों की जेब पर बेवजह बोझ पड़ता है।
OPD में आने वाले मरीज़ों को डॉक्टरों से मुफ़्त सलाह तो मिलती है, लेकिन उन्हें दवाएँ बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। भर्ती मरीज़ों को भी बाहर से खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बताया जा रहा है कि तीन महीने पहले सरकार ने हॉस्पिटल को दवाओं के लिए ₹15 लाख का बजट दिया था, लेकिन इस बजट की दवाएँ अभी तक नहीं आई हैं।
कॉलेज प्रिंसिपल रामकिशन राठौर ने दी जानकारी
कॉलेज प्रिंसिपल रामकिशन राठौर ने बताया कि कंपनी के साथ दवाओं का टेंडर प्रोसेस लगभग पूरा हो गया है, और उम्मीद है कि 10 से 15 दिनों में दवाएं मिल जाएंगी। इस हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों को फ्री खाना और नाश्ता दिया जाता है।
लेकिन, सरकार ने एक साल से ज़्यादा समय से इसके लिए कोई बजट नहीं दिया है। इसलिए, यहां भर्ती मरीजों को अपने खाने-पीने का इंतज़ाम बाहर से करना पड़ता है। प्रिंसिपल रामकिशन राठौर ने बताया कि हॉस्पिटल को दवाओं के लिए हर साल लगभग 40 से 45 लाख रुपये मिलते हैं, लेकिन यह बजट तीन से चार बार मंज़ूर होता है, जिसमें बार-बार टेंडरिंग और काफी समय लगता है।
मरीज स्वयं कर रहे नाश्ते की व्यवस्था
इसीलिए कभी-कभी दवाओं की कमी हो जाती है। उन्होंने बताया कि जब दवाएं नहीं मिलती हैं, तो दवाओं की लिस्ट नेशनल आयुष मिशन को भेजी जाती है, जहां से उन्हें सप्लाई किया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि दवाएं उपलब्ध न होने की स्थिति में सूची राष्ट्रीय आयुष मिशन को भेजी जाती है, जहां से आपूर्ति की जाती है। वहीं, भर्ती मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था भी प्रभावित है, क्योंकि पिछले एक वर्ष से इस मद में बजट जारी नहीं हुआ है। परिणामस्वरूप मरीजों को भोजन और नाश्ते की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ रही है, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
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