झांसी मंडल के स्टेशनों पर दिव्यांगजन बनेंगे ATVM फैसिलिटेटर, टिकट बिक्री में निभाएंगे भूमिका
खबर सार :-
उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल ने समावेशी विकास और दिव्यांग व्यक्तियों की सामाजिक-आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की है। विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर दिव्यांग व्यक्तियों को ATVM फैसिलिटेटर के रूप में नियुक्त किया जा रहा है।
खबर विस्तार : -
झांसी: उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल ने समावेशी विकास और दिव्यांगजनों की सामाजिक-आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। इस योजना के तहत मंडल के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर दिव्यांगजनों को ATVM (Automatic Ticket Vending Machine) फैसिलिटेटर के रूप में नियुक्त किया जा रहा है।
16 दिव्यांगजनों की हुई नियुक्ति
इस पहल के अंतर्गत कुल 16 दिव्यांगजनों की नियुक्ति की गई है, जो प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को टिकट मशीन के उपयोग में सहायता प्रदान करेंगे। इनमें ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर 4, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन पर 3, ललितपुर रेलवे स्टेशन पर 3, डबरा रेलवे स्टेशन पर 2, उरई रेलवे स्टेशन पर 2, चित्रकूट धाम कर्वी रेलवे स्टेशन पर 1 तथा खजुराहो रेलवे स्टेशन पर 1 दिव्यांग ATVM फैसिलिटेटर शामिल हैं।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (कोचिंग) अमन वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि रेलवे प्रशासन का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें सम्मानजनक आजीविका प्रदान करना भी है।
उन्होंने बताया कि ATVM फैसिलिटेटर स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को टिकट वेंडिंग मशीन के उपयोग में सहायता प्रदान करेंगे, जिससे यात्रियों को टिकट लेने में आसानी होगी और समय की बचत होगी। इसके साथ ही इस व्यवस्था से टिकट काउंटरों पर भीड़ भी कम होगी और संचालन व्यवस्था अधिक सुचारू हो सकेगी।
आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस कार्य के लिए चयनित दिव्यांगजनों को उनके कार्य के अनुसार कमीशन आधारित आय भी प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह मॉडल न केवल रोजगार सृजन करेगा बल्कि दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को भी बढ़ाएगा।
रेलवे प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं समाज में समावेशिता को बढ़ावा देती हैं और यह संदेश देती हैं कि दिव्यांगजन किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, बल्कि सही अवसर मिलने पर वे भी समान रूप से योगदान दे सकते हैं।
इस पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है। यात्रियों का कहना है कि इससे न केवल टिकट प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि रेलवे स्टेशनों पर सहयोग की भावना भी बढ़ेगी। झांसी मंडल की यह पहल दिव्यांग सशक्तिकरण और डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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