Women Reservation Bill Controversy : लखनऊ की सड़कों पर उमड़ा 'नारी शक्ति' का सैलाब, राहुल-अखिलेश के खिलाफ भाजपा का हल्ला बोल!
खबर सार :-
Women Reservation Bill Controversy : लखनऊ में सीएम योगी के नेतृत्व में निकली 'जन आक्रोश महिला पदयात्रा' ने मचाया सियासी घमासान। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर लगाया महिला आरक्षण रोकने का बड़ा आरोप। जानिए क्यों भड़की हैं यूपी की महिलाएं और क्या होगा 2027 के चुनाव पर इसका असर।
खबर विस्तार : -
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज एक अभूतपूर्व सियासी संग्राम की गवाह बनी। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी भी उन हजारों महिलाओं के कदमों को नहीं रोक सकी, जो अपने हक और सम्मान की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आई थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निकली 'जन आक्रोश महिला पदयात्रा' ने न केवल लखनऊ की सड़कों को केसरिया रंग में रंग दिया, बल्कि विपक्षी खेमे में भी खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री आवास से शुरू होकर विधानसभा तक जाने वाली इस पदयात्रा का स्वर एक ही था— "राहुल और अखिलेश ने छीना महिलाओं का हक।"
हक की लड़ाई: मुख्यमंत्री आवास से विधानसभा तक गूंजी हुंकार
सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास के बाहर हजारों महिलाओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य के साथ इस पदयात्रा की शुरुआत हुई, पूरा माहौल 'वंदे मातरम' और 'नारी शक्ति' के नारों से गूंज उठा। भाजपा के तमाम दिग्गज नेताओं का एक ही सुर था कि विपक्षी गठबंधन ने महिलाओं के राजनीतिक उत्कर्ष के रास्ते में कांटे बिछाए हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री आशिष सिंह पटेल ने विपक्ष के दोहरे चरित्र पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि जब 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023' संसद में पेश किया गया था, तब सभी दलों ने दिखावे के लिए सहयोग किया था। पटेल ने गरजते हुए सवाल किया, "जब इस ऐतिहासिक कानून को अमलीजामा पहनाने और लागू करने की घड़ी आई, तो विपक्षी दलों के पेट में दर्द क्यों होने लगा? यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि आधी आबादी को सत्ता से दूर रखने की एक सुनियोजित और गहरी साजिश है।"
राहुल-अखिलेश पर सीधा प्रहार: 2027 में मिलेगा करारा जवाब
पदयात्रा के दौरान सबसे आक्रामक तेवर मंत्री बेबीरानी मौर्य के देखने को मिले। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। मौर्य ने भावुक होते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, लेकिन वहां महिलाओं की उम्मीदों का गला घोंटा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश की करोड़ों महिलाएं 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने की उम्मीद लगाए बैठी थीं, तब राहुल और अखिलेश ने मिलकर इस बिल की राह में रोड़े अटकाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "उत्तर प्रदेश की महिलाएं इस अपमान को भूली नहीं हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव में यही नारी शक्ति अपने वोट की चोट से इन नेताओं को सत्ता से बेदखल कर देगी।"
इसी सुर में सुर मिलाते हुए मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प महिलाओं को उनका वाजिब हक दिलाना है। लेकिन विपक्ष की नकारात्मक राजनीति ने इस सपने में बाधा डाली है। आज जो आक्रोश सड़कों पर दिख रहा है, वह उसी धोखे का परिणाम है जो विपक्ष ने देश की माताओं-बहनों के साथ किया है।
भीषण गर्मी में भी नहीं डिगा हौसला: अपर्णा यादव और मेयर सुषमा खरकवाल का मोर्चा
इस पदयात्रा में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की उपस्थिति ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक अनिवार्यता है। अपर्णा ने इस बात पर जोर दिया कि इतनी तपती धूप में हजारों महिलाओं का घर से बाहर निकलना इस बात का प्रमाण है कि उनके भीतर कितना गहरा घाव है। वहीं, लखनऊ की मेयर सुषमा खरकवाल ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदियों के संघर्ष के बाद जब महिलाओं को उनका हिस्सा मिलने वाला था, तब तथाकथित 'प्रगतिशील' नेताओं ने ही पीछे से खंजर घोंप दिया।
मंत्री रजनी तिवारी और ओमप्रकाश राजभर ने भी दो टूक शब्दों में कहा कि यह जन आक्रोश आने वाले समय में विपक्ष के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित होगा। महिला आयोग की सदस्य पुष्पा पांडे ने भी स्पष्ट किया कि सम्मान के मुद्दे पर राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
2027 की चुनावी बिसात और महिला वोटबैंक
विधानसभा के सामने समाप्त हुई इस पदयात्रा ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा ने महिला आरक्षण के मुद्दे को आगामी चुनावों के लिए अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। 33 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लखनऊ की गलियों से होता हुआ गांव-गांव तक पहुंच चुका है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव के लिए यह जन आक्रोश एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब 'नारी शक्ति' एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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