नगर निगम के खुले बोरवेल में गिरी बच्ची की मौत, रेस्क्यू टीम के पास नहीं थे पर्याप्त उपकरण

खबर सार :-

नगर निगम के खुले बोरवेल में एक बच्ची की मौत हो गई। इसे बचाने के लिए कई घंटे प्रयास किए गए। ऑपरेशन के दौरान कूछ रुकावट हुई, तो पता चला कि टीम के पास उसे निकालने के लिए पूरे उपकरण नहीं हैं।
Faridabad: बोरवेल में गिरी तीन साल की नेहा, 10 घंटे के rescue के बाद भी नहीं बचाया जा सका

खबर विस्तार : -

फरीदाबाद: फरीदाबाद के सीही गांव में एक बच्ची खेलते समय 300 फिट की गहराई वाले बोरवेल में जा गिरी। यह जानकारी परिजनों को हुई तो अन्य लोगों की मदद से पुलिस और प्रशासन को घटना की जानकारी दी गई। उसे बचाने के लिए कई घंटे आपरेशन चला, लेकिन जब निकाला गया, तो उसकी मौत हो चुकी थी।

बोरवेल में गिरी बच्ची को निकालने के प्रयास रात भर किए गए। करीब दस घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। सुबह चार बजे मृत हालत में बच्ची को बाहर निकाला गया। उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। परिजन, प्रशासन के साथ उसे अस्पताल लेकर गए, जहां डाक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। किन वजहों से उसकी मौत हुई, सही कारण जानने के लिए शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इससे उसकी मौत के सही कारणों का पता चलेगा। 

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टीम के पास नहीं थे पूरे उपकरण

बोरवेल से उसको निकालने में प्रशासन का पसीना छूट गया। ऑपरेशन टीम में हरियाणा पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर जुटी रहीं। रविवार रात करीब 8 बजे एनडीआरएफ को बच्ची के बोरवेल में गिरने की सूचना दी गई थी। इसके तुरंत बाद टीम बनाकर वह लोग करीब 9 बजे गाजियाबाद से मौके पर पहुंच गए। उस समय अन्य विभागों की टीमें भी बचाव कार्य में जुटी थीं। एनडीआरएफ के अधिकारी ने बताया कि बोरवेल से निकालने मे कसर नहीं छोड़ी गई।

इसकी गहराई के बारे में नगर निगम की ओर से करीब 300 फीट बताई गई गई है। लोगों का कहना है कि शुरु में जब बचाव दल काम कर रहा था, उसको बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी। कुछ देर बाद ही आवाज आनी बंद हो गई। 300 फिट की गहराई में काम करने वाले उपकरण भी कारगर नहीं थे। यह टीम के साथ लाए गए थे। बचाव दल के प्रयासों और स्थानीय कार पेंटर की मदद से मौके पर ही एक नया उपकरण तैयार किया गया। इस नए उपकरण की सहायता से फिर उसे निकालने की कोशिश तेज की गई।

125 फिट पर भरा था पानी

एसडीआरएफ अधिकारियों ने बताया कि बोरवेल कई सालों से बंद था। 125 फीट की गहराई पर बोरवेल में पानी भरा हुआ था। इन विषम परिस्थितियों में रेस्क्यू आपरेशन के दौरान काफी परेशानी आई। बच्ची का सिर नीचे की तरफ था। उसे बोरवेल से निकालने के लिए की गई मशक्कत के बाद टीम ने उसके पैर की मदद से बाहर निकाला। 300 फिट के बोरवेल मे यह करीब 200 फीट से ज्यादा गहराई पर फंसी थी।

बताया  जा रहा है कि रविवार शाम तीन साल की नेहा पड़ोसी बच्चों के साथ खेल रही थी। यहीं पास में बोरवेल था। इसी दौरान वह खुले हुए बोरवेल में गिर गई। उसके गिरते ही साथ में खेल रहे बच्चों ने शोर मचाया, उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके की ओर दौड़े। बच्ची के पिता रामदीन को इसकी सूचना दी गई। नेहा के पिता रामदीन मजदूरी करते हैं। हादसे के समय वह काम से वापस लौट रहे थे। बोरवेल के खुला रहने पर निगम के कार्यकारी अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि करीब 15 साल पहले बोरवेल को ढक्कन लगाकर बंद किया गया था। यह ढक्कन कब हटा? इसकी जानकारी निगम को नहीं मिली थी। 

मोहल्ले में निगम के खिलाफ आक्रोश

बच्ची के पिता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले रामदीन ने नगर निगम पर बोरवेल का ढक्कन खुला छोड़ने का आरोप लगाया तो निगम ने इसकी जांच कराने की बात कही है। अभियंता ने कहा कि जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रामदीन कई साल से सीही गांव में परिवार के साथ रहकर मजदूरी करते हैं। बच्ची की मौत के बाद सेक्टर-8 के लोगों में निगम के प्रति नाराजगी देखी गई। आरोप है कि बोरवेल खुला न होता तो यह हादसा न होता। 

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