16 साल का इंतजार खत्म: 1 अप्रैल से शुरू होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना, झांसी में तैनात हुई अधिकारियों की भारी-भरकम टीम
खबर सार :-
भारत में 16 साल के लंबे अंतराल के बाद डिजिटल जनगणना का आगाज 1 अप्रैल से होने जा रहा है। झांसी सहित पूरे देश में प्रशासन ने कमर कस ली है। जानें कैसे आप घर बैठे ऐप के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
खबर विस्तार : -
झांसीः भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से लंबित पड़ी देश की जनगणना अब 1 अप्रैल से आधिकारिक रूप से शुरू होने वाली है। गौरतलब है कि आखिरी बार जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। नियमतः इसे 2021 में होना था, लेकिन वैश्विक आपदा के चलते इसे टालना पड़ा। अब पूरे 16 साल के अंतराल के बाद, भारत सरकार ने इसे पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है।
झांसी समेत पूरे देश में प्रशासनिक तैयारियां तेज
इस महाभियान को सफल बनाने के लिए झांसी जिले में प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। जिलाधिकारी (DM) को प्रमुख जनगणना अधिकारी नियुक्त करते हुए, विभिन्न विभागों के 22 वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की गई है। इस टीम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), जिला विकास अधिकारी, सांख्यिकी अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां खंड विकास अधिकारी और तहसीलदार कमान संभालेंगे, वहीं झांसी महानगर के भीतर नगर आयुक्त और उनकी टीम को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। रेलवे सेटलमेंट और छावनी परिषद (Cantonment) क्षेत्रों के लिए भी अलग से गणना अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
डिजिटल जनगणना: अब मोबाइल ऐप से खुद भरें अपनी जानकारी
इस बार की जनगणना की सबसे क्रांतिकारी विशेषता इसका पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस होना है, जो तकनीक के दौर में प्रशासन की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इतिहास में पहली बार आम नागरिकों को 'सेल्फ एन्यूमरेशन' यानी स्व-गणना की विशेष सुविधा दी जा रही है। इसके अंतर्गत आम जनता को 15 दिनों का एक निश्चित समय दिया जाएगा, जिसमें वे ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। डिजिटल एंट्री की इस प्रक्रिया के बाद, सरकारी गणना कर्मी घर-घर जाकर फीड किए गए डेटा का मौके पर भौतिक सत्यापन करेंगे ताकि आंकड़ों की सत्यता सुनिश्चित की जा सके। इस पूरे अभियान के दौरान कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़ी निगरानी की व्यवस्था की है, जिसके तहत प्रत्येक छह गणना कर्मियों पर एक सुपरवाइजर तैनात रहेगा जो डेटा की निरंतर मॉनिटरिंग करेगा।
इन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित होगा सर्वे
इस बार की जनगणना प्रक्रिया के दौरान प्रशासन द्वारा एक अत्यंत विस्तृत प्रश्नावली तैयार की गई है, जिसके माध्यम से न केवल जनसंख्या बल्कि आम नागरिकों की जीवनशैली और बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत का भी आकलन किया जाएगा। सर्वे के दौरान गणना कर्मी घर-घर जाकर भवन की संख्या और उसके वर्तमान उपयोग की स्थिति की जानकारी जुटाएंगे। साथ ही, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और जातिगत श्रेणी जैसे व्यक्तिगत विवरणों के साथ-साथ मकान की संरचना, जैसे कि घर में कुल कमरों की संख्या का ब्योरा भी दर्ज किया जाएगा। इतना ही नहीं, आधुनिक जीवन की अनिवार्य जरूरतों जैसे कि पेयजल के मुख्य स्रोत, बिजली की उपलब्धता और गंदे पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि भविष्य की योजनाओं के लिए एक सटीक डेटाबेस तैयार हो सके।
दिसंबर 2027 तक आएंगे अंतिम नतीजे
प्रशासन द्वारा जारी समय-सीमा के अनुसार, डेटा एकत्र करने का यह विशाल कार्य मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद, अगले कुछ महीनों तक प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण, डेटा प्रोसेसिंग और पुष्टि की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर 2027 तक देश की नई आबादी और संसाधनों के आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव (जिला पंचायत राज अधिकारी, झांसी) ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशों पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 1 अप्रैल से सभी नामित अधिकारी धरातल पर उतरकर इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य का संपादन और पर्यवेक्षण शुरू कर देंगे। यह डिजिटल जनगणना न केवल देश की सही जनसंख्या बताएगी, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं के निर्माण में भी एक मील का पत्थर साबित होगी। झांसी प्रशासन ने अपील की है कि नागरिक इस प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ सहयोग करें और डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग करें।
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