छत्तीसगढ़ में महंगी हुई बिजली, आयोग ने दी नई टैरिफ दरों को मंजूरी, जानें नए रेट
खबर सार :-
छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी हो गई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की नई टैरिफ दरों को स्वीकृति दे दी है। हालांकि किसानों के लिए राहत की खबर है कि वे खेती से जुड़े कामों के लिए पहले की तरह ही 100 वाॅट तक की लाइट और पंखे का इस्तेमाल कर सकेंगे।
खबर विस्तार : -
रायपुर: छत्तीसगढ़ में आम लोगों की जेब पर एक बार फिर महंगाई का बोझ बढ़ने वाला है। राज्य में बिजली की नई टैरिफ दरों से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ना तय है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (Chhattisgarh State Electricity Regulatory Commission) ने नई बिजली टैरिफ दरों (Chhattisgarh Electricity Tariff Hike 2026) को स्वीकृति दे दी है।
30 से 50 पैसे प्रति यूनिट बढ़ी दर
बिजली की नई टैरिफ दरों (Chhattisgarh Electricity Tariff Hike 2026) के तहत, गैर-घरेलू ग्राहकों के लिए दरें 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट बढ़ी हैं और घरेलू ग्राहकों के लिए बिजली की कीमतें 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाई गई हैं।
किसानों को आंशिक राहत
खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले पंपों की बिजली दरें भी 40 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाई गई हैं। हालांकि, बिना सब्सिडी वाले कृषि कनेक्शन पर किसानों को मिलने वाली छूट को 30 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया है।
कार्यालयों, ग्रामीण इलाकों के हॉस्टल घरेलू श्रेणी में शामिल
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए औसत बिलिंग दर ₹6.71 प्रति यूनिट तय की गई है, जो ₹7.13 प्रति यूनिट की औसत लागत दर से 42 पैसे कम है। नई दरों के साथ कई अन्य बदलाव भी किए गए हैं। स्थानीय निकायों के कार्यालयों, ग्रामीण इलाकों के हॉस्टलों और कुछ सार्वजनिक उपयोग वाली संस्थाओं को घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे इन संस्थाओं को राहत मिलेगी।
'माइनस मीटरिंग' पर EV चार्जिंग टैरिफ की सुविधा
आयोग के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि किसान पहले की तरह ही अपने कृषि पंपों के पास खेती से जुड़े कामों के लिए 100 वॉट तक की लाइट और पंखे का इस्तेमाल कर सकेंगे। अन्य बदलावों में, देर से भुगतान पर लगने वाले सरचार्ज को 1.5 प्रतिशत प्रति माह से बदलकर 0.04 प्रतिशत प्रति दिन कर दिया गया है। इसके अलावा, प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए छूट में बदलाव किया गया है और 'माइनस मीटरिंग' चुनने वालों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग टैरिफ की सुविधा भी दी गई है।
1,662 करोड़ रुपये का घाटा
सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला ने बताया कि बिजली वितरण कंपनी ने 38,729 मिलियन यूनिट बिजली बिक्री और ₹32,520 करोड़ की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) का अनुमान लगाया था। आयोग ने 39,760 मिलियन यूनिट बिजली बिक्री और ₹28,348 करोड़ की कुल राजस्व आवश्यकता (ARR) को मंजूरी दी है। बिजली वितरण कंपनी ने ₹6,304 करोड़ के रेवेन्यू घाटे का दावा किया था, लेकिन आयोग की समीक्षा में इस आंकड़े को घटाकर ₹1,662 करोड़ कर दिया गया। आयोग का कहना है कि उसने उपभोक्ताओं के हितों और बिजली कंपनियों की वित्तीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। हालांकि, नई दरों के लागू होने से राज्य में बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की उम्मीद है, जिससे निकट भविष्य में बिजली की लागत बढ़ जाएगी।
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