झांसी में रेलवे और वन विभाग की पहल: 1.15 लाख पौधों से तैयार हो रहे सघन वन
खबर सार :-
झांसी में रेलवे और वन विभाग ने मियावाकी तकनीक से 3.39 हेक्टेयर में 1.15 लाख पौधे लगाकर सघन वन विकसित करने की पहल शुरू की है। पढ़ें पूरी खबर।
खबर विस्तार : -
झांसी : तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए झांसी में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तर मध्य रेलवे और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने मिलकर मियावाकी तकनीक के जरिए सघन वन विकसित करने की पहल तेज कर दी है। इस योजना के अंतर्गत झांसी मंडल में कुल 3.39 हेक्टेयर क्षेत्र में 1.15 लाख पौधे रोपे गए हैं, जिससे शहर में हरित क्षेत्र का विस्तार हो सके।
दो प्रमुख स्थानों पर हुआ पौधरोपण
रेलवे भूमि का पर्यावरणीय दृष्टि से बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से यह पौधरोपण दो अलग-अलग स्थलों पर किया गया है। आरपीएफ टीए कैंप, झांसी में लगभग 1.30 हेक्टेयर भूमि पर 32 हजार पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक लोको शेड के पास करीब 2.09 हेक्टेयर भूमि पर 83 हजार पौधे रोपे गए हैं। इन दोनों स्थानों को मिलाकर कुल 3.39 हेक्टेयर क्षेत्र में व्यापक स्तर पर हरियाली विकसित की जा रही है।
35 से अधिक देशी और औषधीय प्रजातियां शामिल
इस परियोजना में पर्यावरण और जैव-विविधता का विशेष ध्यान रखा गया है। विकसित किए जा रहे वनों में पीपल, जामुन, अर्जुन, नीम, महुआ, कचनार, शीशम, अशोक, बरगद, आम, अमरूद, बेलपत्र, तुलसी, अश्वगंधا और लेमन ग्रास समेत लगभग 35 देशी, औषधीय और पर्यावरणीय महत्व की प्रजातियों को शामिल किया गया है। चार साल तक वन विभाग इन क्षेत्रों की नियमित देखरेख करेगा ताकि पौधों का संरक्षण और उचित विकास सुनिश्चित हो सके।
मियावाकी तकनीक और भविष्य की योजनाएं
जापानी वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित इस विशेष तकनीक में एक वर्ग मीटर क्षेत्र में तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं। रोपण से पहले मिट्टी को पौधों के अनुकूल तैयार किया जाता है, जिससे कम क्षेत्रफल में भी तेजी से घना जंगल तैयार होता है। इस सफल पहल के बाद, रेलवे और वन विभाग झांसी मंडल के अन्य उपयुक्त स्थलों पर भी ऐसे सघन वन विकसित करने की योजना बना रहे हैं।
कम जगह में ज्यादा हरियाली का मॉडल
शहरी क्षेत्रों में तेजी से कम होती हरियाली और कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के बीच मियावाकी पद्धति एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरी है। पारंपरिक पौधरोपण की तुलना में इस जापानी तकनीक से पौधे दस गुना तेजी से बढ़ते हैं और तीस गुना अधिक सघन होते हैं। झांसी मंडल के स्टेशनों, कार्यालय परिसरों और रेलवे कॉलोनियों में इस तरह के प्रयास भविष्य में शहर के तापमान को नियंत्रित करने और जैव-विविधता को मजबूत करने में सहायक साबित होंगे।
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