चाकसू मण्डालिया मैदा ग्राम सेवा सहकारी समिति में रामकिशन गुर्जर की विदाई बनी मिसाल, अनोखे अंदाज में हुआ सम्मान

खबर सार :-

चाकसू मण्डालिया मैदा ग्राम सेवा सहकारी समिति से सेवानिवृत्त हुए रामकिशन गुर्जर। ग्रामीणों ने साफा और माला पहनाकर दी भव्य विदाई। पढ़ें पूरी खबर।
चाकसू मण्डालिया मैदा ग्राम सेवा सहकारी समिति में रामकिशन गुर्जर की विदाई बनी मिसाल, अनोखे अंदाज में हुआ सम्मान

खबर विस्तार : -

Chaksu Gram Sewa Samiti : सरकारी महकमों और दफ्तरों से आने वाली विदाई की खबरें अमूमन एक जैसी होती हैं—कुछ औपचारिकताएं, एक छोटा सा भाषण और चाय-बिस्कुट के साथ कार्यक्रम का समापन। मगर जयपुर के ग्रामीण आंचल में जब एक ऐसा विदाई समारोह हुआ, जिसने इन सभी लीक से हटकर एक नई इबारत लिख दी। मौका था चाकसू मण्डालिया मैदा ग्राम सेवा सहकारी समिति में लंबे समय तक अपनी निष्ठावान सेवाएं देने वाले रामकिशन गुर्जर की सेवानिवृत्ति का, जहां कागजी फेहरिस्त से दूर अपनापन और आत्मीयता का अनूठा संगम देखने को मिला।

सादगी भरे जीवन और कर्मठता का सम्मान

किसी भी संस्था की रीढ़ वहां काम करने वाले वे लोग होते हैं जो बिना किसी शोरगुल के रोजाना तय वक्त पर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। रामकिशन गुर्जर ने भी चाकसू मण्डालिया मैदा ग्राम सेवा सहकारी समिति के साथ अपने लंबे सफर में कुछ ऐसी ही खामोश और असरदार सेवाएं दीं। जब उनके विदा होने का वक्त आया, तो गांव के लोगों और किसानों से रहा नहीं गया। समिति के अध्यक्ष शिवराज गुर्जर सहित तमाम ग्रामीण और सदस्य इस आयोजन में किसी सरकारी तड़के के बिना शामिल हुए। हर चेहरे पर इस बात का संतोष था कि एक ऐसा शख्स जिसने अपनी जवानी और कार्यकुशलता इस संस्था को सौंपी, वह सम्मानजनक तरीके से इस पड़ाव पर पहुंचा है।

ये भी पढ़ेंः-रेलवे का बड़ा फैसला: झांसी मंडल के 500 टीटीई को मिलेंगे बॉडी कैमरे, टिकट जांच होगी पूरी तरह रिकॉर्ड

जब कागजों से बाहर निकल आया आत्मीय रिश्ता

आज के दौर में जब रिश्ते और नाते अक्सर औपचारिक बनकर रह गए हैं, तब इस तरह के आयोजन दिल को सुकून देते हैं। चाकसू मण्डालिया मैदा ग्राम सेवा सहकारी समिति के प्रांगण में जब रामकिशन जी को साफा बांधा गया और मालाएं पहनाई गईं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें उनके पुराने दिनों के किस्से याद कर चमक उठीं। किसानों ने बताया कि कैसे खाद-बीज के वितरण या अन्य जरूरी कामों के दौरान रामकिशन जी ने कभी किसी को परेशानी नहीं होने दी। उनका व्यवहार सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि परिवार के एक बड़े बुजुर्ग जैसा रहा, जो हर किसी के सुख-दुख में खड़े रहते थे।

सेवा का अंत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत

नौकरी की एक सीमा होती है और रिटायरमेंट उसका तयशुदा नियम, लेकिन इंसानी रिश्तों की कोई समयसीमा नहीं होती। वक्ताओं ने मंच से यही बात दोहराई कि दफ्तर की चारदीवारी से मुक्ति का मतलब यह नहीं कि समाज से नाता टूट गया है। अब चाकसू मण्डालिया मैदा ग्राम सेवा सहकारी समिति के इस कर्मठ सिपाही को अपने परिवार, नाती-पोतों और सामाजिक जीवन को करीब से जीने का भरपूर मौका मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में रामकिशन गुर्जर ने भी अपने सहयोगियों और ग्रामीणों का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें इस संस्था से जो प्यार और मान-सम्मान मिला है, वह उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यह विदाई समारोह साबित कर गया कि इंसान अगर ईमानदारी से अपना फर्ज निभाए, तो विदाई आंसुओं से नहीं बल्कि गर्व और मुस्कान के साथ होती है।

ये भी पढ़ें: उरई में 4 करोड़ की जमीन के लिए अधेड़ की हत्या, 20 घंटे तक शव को लेकर जंगल में घूमते रहे दंपत्ति

अन्य प्रमुख खबरें