कूटरचित कागजात से कब्रिस्तान की जमीन बेचने का आरोप, एसएसपी से शिकायत
खबर सार :-
अयोध्या के बारादरी बहार शाह कब्रिस्तान की जमीन को लेकर फर्जी दस्तावेज़ों से कब्जे का विवाद बढ़ा। स्थानीय लोगों ने एसएसपी से शिकायत की, न्याय और धार्मिक परंपराओं की सुरक्षा की मांग की।
खबर विस्तार : -
अयोध्याः अयोध्या के कैंट थाना क्षेत्र में स्थित जमथरा रोड, बारादरी बहार शाह कब्रिस्तान की जमीन को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कब्रिस्तान की जमीन का कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैनामा कर कब्जा किया गया। इस मामले ने धार्मिक भावनाओं को भड़का दिया है, क्योंकि यह कब्रिस्तान करीब ढाई सौ वर्षों से क्षेत्रीय लोगों की अंतिम संस्कार परंपराओं का केंद्र रहा है। इस विवाद के चलते मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के कार्यालय तक पहुंच गया है।
फर्जी कागजों से किया कब्जा
स्थानीय लोगों ने बताया कि कब्रिस्तान के तकिएदार द्वारा कूट रचित दस्तावेज तैयार कर जमीन का बैनामा किया गया। कथित खरीदार जब जमीन पर कब्जा करने पहुंचे, तो क्षेत्रीय लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। स्थिति इतनी संवेदनशील हो गई कि पुलिस को मौके पर जाकर शांति बनाए रखने के लिए तैनात होना पड़ा। इस कार्रवाई ने स्थानीय लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों ही बढ़ा दी है।
इस विवाद को लेकर बहार शाह कमेटी के सदस्य एसएसपी कार्यालय पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई। कमेटी के सदस्य मोहम्मद सुहैल ने बताया कि यह कब्रिस्तान सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि क्षेत्र के लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। यदि जमीन का बैनामा अवैध रूप से कर दिया गया, तो यह परंपरा और धार्मिक व्यवस्था दोनों पर गंभीर असर डाल सकता है।
एसएसपी ने दिए जांच के आदेश
सदस्य ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सुनियोजित तरीके से कब्रिस्तान पर कब्जा करना चाहते हैं और इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना से संबंधित सभी तथ्यों को एसएसपी के समक्ष रखा गया और दोषियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए और कहा कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल में समाजसेवी जाहिद खां वारसी, अरमान खान मन्नू और अन्य स्थानीय लोग भी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल जमीन का विवाद नहीं है, बल्कि धार्मिक भावनाओं और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इस विवाद का निष्पक्ष और त्वरित समाधान किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और धार्मिक स्थिरता बनी रहे।
इस तरह, अयोध्या का यह विवाद धार्मिक, सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील है, और स्थानीय लोग न्याय और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
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