बुंदेलखंड में समय से पहले 'तपन': मार्च में ही 38 डिग्री पहुंचा पारा, झांसी-बांदा रहे सबसे गर्म
खबर सार :-
बुंदेलखंड की गर्मी केवल कृषि पर ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन पर भी असर डाल रही है। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग लंबे समय तक बाहर रहने में असुविधा महसूस कर रहे हैं।
खबर विस्तार : -
झांसीः बुंदेलखंड क्षेत्र इस साल मार्च की शुरुआत में ही असामान्य गर्मी के आगमन से जूझ रहा है। क्षेत्र की जलवायु पहले से ही गर्मी और गर्म लू के लिए कुख्यात रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मौसम के पैटर्न में बदलाव के कारण सर्दी और गर्मी का क्रम भी असामान्य रूप से बदल गया है। इस बार भी गर्मी अपने समय से पहले दस्तक दे रही है और तापमान पिछले वर्षों की तुलना में जल्दी उच्चतम स्तर तक पहुंचने लगा है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
सोमवार को प्रदेश में लगातार चौथे दिन झांसी का अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया। बुंदेलखंड के अन्य हिस्सों में भी गर्मी के रिकार्ड बन रहे हैं। खासकर बांदा का अधिकतम तापमान भी 38 डिग्री दर्ज किया गया, जिससे यह दोनों जिले प्रदेश में सबसे अधिक गर्म स्थान बन गए हैं। इसके बाद आगरा 37 डिग्री और हमीरपुर 36 डिग्री के साथ तीसरे स्थान पर रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च का आधा महीना भी पूरा नहीं हुआ है, फिर भी पारा इन ऊंचाइयों को छू गया है, जो मौसम के असामान्य व्यवहार का संकेत है।
क्षेत्रीय मौसम इकाई के वैज्ञानिक डॉक्टर आदित्य कुमार सिंह के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 11 मार्च को बुंदेलखंड में बूंदाबांदी की संभावना है। यह पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का कारण बन सकता है, जिसका प्रभाव यहां बूंदाबांदी के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि मार्च के अंतिम सप्ताह से फिर से गर्म हवा चलने और तापमान 40 डिग्री से अधिक जाने की संभावना है। यह स्थिति पूरे क्षेत्र में गर्मी की तीव्रता को और बढ़ा सकती है।
किसानों को दी गई सलाह
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इतनी जल्दी बढ़ रही गर्मी से कृषि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गेहूं की फसल पर सबसे अधिक खतरा है, क्योंकि अधिक तापमान के कारण गेहूं के दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाएंगे। इसके साथ ही सरसों, चना और मटर जैसी फसलों को भी नुकसान होने की आशंका है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों में समय पर सिंचाई करें और फसलों को अधिक तापमान से बचाने के उपाय अपनाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मार्च की गर्मी पिछले वर्षों की तुलना में अधिक तीव्र और जल्दी होगी, जिससे स्वास्थ्य और फसलों दोनों पर असर पड़ सकता है।
सामान्यतः इस क्षेत्र में गर्मी अप्रैल-मई में बढ़ती है, लेकिन इस बार मौसम विशेषज्ञों की चेतावनी के अनुसार बुंदेलखंड में समय से पहले ‘तपन’ ने क्षेत्रवासियों को हैरान कर दिया है। लोगों को इस दौरान गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने और पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
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