शाहपुरा जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के अभाव से वरिष्ठ नागरिक परेशान
खबर सार :-
शाहपुरा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं है, इलाज बंद है, RGHS की दवाएं बंद हैं, इन सबके चलते बुजुर्गों का सब्र जवाब दे गया है। इस बदहाली के खिलाफ सोमवार को वरिष्ठ नागरिक संस्थान के पदाधिकारियों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर ऑफिस पहुंचकर ज्ञापन दिया और तुरंत डॉक्टर की नियुक्ति की मांग की।
खबर विस्तार : -
भीलवाड़ाः शाहपुरा जिला चिकित्सालय में लंबे समय से फिजिशियन की नियुक्ति नहीं होने के कारण वरिष्ठ नागरिकों की सेहत पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) के तहत दवा और उपचार के लिए रोज अस्पताल पहुंचने वाले बुजुर्गों को निराशा हाथ लग रही है। आरोप है कि अन्य चिकित्सक आरजीएचएस की दवाइयां लिखने से बच रहे हैं, जिससे पेंशनर वर्ग को दवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।
वरिष्ठ नागरिक संस्थान के पदाधिकारियों ने सौंपा ज्ञापन
एक ओर अस्पताल में वरिष्ठ नागरिकों के लिए रामाश्रय वार्ड का निर्माण कर सुविधाओं का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वहां उपचार के लिए फिजिशियन ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना विशेषज्ञ चिकित्सक के वार्ड का औचित्य क्या है?
इसी समस्या को लेकर सोमवार को वरिष्ठ नागरिक संस्थान के पदाधिकारियों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और फिजिशियन की तत्काल नियुक्ति की मांग की। संस्थान के सचिव कैलाश वर्मा सहित अन्य पदाधिकारी—ललित चौहान, जगदीश प्रसाद जोशी, राधेश्याम मूंदड़ा, दिनेश तोलबिया, लादूलाल माली, भगवान, शिव जोशी, दिनेश सुखपाल, शिव शंकर शर्मा, गोपाल बोहरा और सेवानिवृत्त तहसीलदार ओमप्रकाश ओझा—ने प्रशासन के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखी।
शीघ्र समाधान की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने जिला चिकित्सालय पहुंचकर पीएमओ डॉ. अशोक जैन को भी स्थिति से अवगत कराया। उनका कहना है कि आरजीएचएस योजना के अंतर्गत मिलने वाली दवाइयां चिकित्सकों द्वारा नहीं लिखी जा रहीं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक और शारीरिक दोनों प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उपखंड अधिकारी कार्यालय में भी ज्ञापन देकर शीघ्र समाधान की मांग की गई है। वरिष्ठ नागरिक संस्थान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द फिजिशियन की नियुक्ति नहीं हुई और आरजीएचएस की दवाइयां लिखना शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। अब प्रशासन के सामने बड़ा सवाल है—क्या बुजुर्गों को समय पर उपचार मिलेगा या उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता रहेगा?
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