भीलवाड़ा: बकरियां चराने गई महिला से दरिंदगी करने वाले को 7 साल की जेल, कोर्ट ने सुनाया कड़ा फैसला
खबर सार :-
भीलवाड़ा कोर्ट ने 2019 के दुष्कर्म मामले में आरोपी हेमराज को 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। जानिए क्या था पूरा मामला और कैसे मिली पीड़िता को इंसाफ।
खबर विस्तार : -
भीलवाड़ा: न्याय की चक्की भले ही धीरे चलती हो, लेकिन जब उसका फैसला आता है तो वह समाज में एक कड़ा संदेश देता है। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक ऐसी ही खबर आई है, जहाँ 5 साल पहले एक महिला के साथ हुई हैवानियत के मामले में अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने आरोपी को न केवल सलाखों के पीछे भेजा है, बल्कि उस पर भारी जुर्माना भी लगाया है।
क्या था पूरा मामला?
घटना साल 2019 की है। भीलवाड़ा के फुलिया कला थाना क्षेत्र के कनेछन कला गांव में रहने वाली एक महिला 19 दिसंबर को अपनी बकरियां चराने के लिए निकली थी। दोपहर के वक्त जब वह कब्रिस्तान के रास्ते अमर सिंह जी की नाड़ी की पाल के पास पहुँची, तो गांव के ही हेमराज बेरवा ने उसे अकेला पाकर अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की। आरोपी ने महिला के साथ जबरदस्ती करते हुए दुष्कर्म किया। गनीमत रही कि पीड़िता का पति सिकंदर मौके पर पहुँच गया। उसने बीच-बचाव किया तो आरोपी उसे धक्का देकर मौके से भाग निकला। इसके बाद पीड़ित परिवार तुरंत थाने पहुँचा और रिपोर्ट दर्ज कराई।
कानूनी कार्रवाई और पुख्ता सबूत
पुलिस ने धारा 323 और 376 के तहत केस दर्ज कर मामले की कमान संभाली। जांच के दौरान पीड़िता के बयान दर्ज किए गए, मेडिकल मुआयना हुआ और मौका-ए-वारदात से सबूत जुटाए गए। पुलिस ने आरोपी के कपड़े जब्त कर उन्हें जांच के लिए जयपुर स्थित एफएसएल (FSL) लैब भी भेजा, जो कोर्ट में अहम कड़ी साबित हुए। विशिष्ट लोक अभियोजक अदिति सेठिया ने अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूती से पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने 13 गवाहों को पेश किया और 23 दस्तावेजी सबूत रखे। इन पुख्ता सबूतों ने आरोपी के बचने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा।
अदालत का फैसला: कठोर कारावास और जुर्माना
भीलवाड़ा के विशिष्ट न्यायाधीश (महिला उत्पीड़न प्रकरण) ने दोनों पक्षों की दलीलों और पेश किए गए सबूतों को बारीकी से परखने के बाद आरोपी हेमराज बेरवा को गुनहगार माना। कोर्ट ने न्याय की गरिमा को बरकरार रखते हुए दोषी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत 7 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही, पीड़िता का रास्ता रोकने के अपराध में धारा 341 के तहत एक माह की जेल व 500 रुपये जुर्माना और मारपीट के लिए धारा 323 के तहत 6 माह की कैद व 1,000 रुपये जुर्माने का आदेश दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये सभी सजाएं एक साथ प्रभावी होंगी। यह फैसला समाज के उन तत्वों के लिए एक कड़ा सबक है जो कानून और महिलाओं के सम्मान को ताक पर रखने का दुस्साहस करते हैं।
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