भीलवाड़ा में सेवा का महाकुंभ: किसी को मिली नई चाल, तो किसी के जीवन में लौटा सुरीला संगीत
खबर सार :-
भीलवाड़ा में आयोजित 56वें दिव्यांगजन शिविर में जयपुर फुट और श्रवण यंत्रों के जरिए सैकड़ों दिव्यांगों को नया जीवन मिला। सेवा और समर्पण की इस अद्भुत कहानी को विस्तार से पढ़ें।
खबर विस्तार : -
भीलवाड़ा: अक्सर कहा जाता है कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है, लेकिन जब यह जुमला हकीकत बनकर जमीन पर उतरता है, तो नजारा वाकई भावुक कर देने वाला होता है। भीलवाड़ा की धरा पर इन दिनों कुछ ऐसा ही 'सेवा-संगम' देखने को मिल रहा है। मौका है 56वें विशाल दिव्यांगजन शिविर का, जहाँ आधुनिक तकनीक और निस्वार्थ सेवा ने मिलकर सैकड़ों जिंदगियों का अंधेरा छांट दिया है।
जब बैसाखियां छूटीं और हौसलों ने भरी उड़ान
भारत विकास परिषद (विवेकानंद शाखा) और भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के साझा प्रयासों से आयोजित इस शिविर की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब दिखी, जब बरसों से दूसरों के सहारे या बैसाखियों पर टिके कदम 'जयपुर फुट' के सहारे खुद चलने लगे। हिंडोली से आए सूर्य प्रकाश की कहानी तो मिसाल बन गई। जैसे ही उन्हें कृत्रिम पैर लगाया गया, उन्होंने मैदान में मोटरसाइकिल दौड़ाकर सबको हैरान कर दिया। उनकी आँखों की चमक साफ कह रही थी कि अब वे लाचार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर हैं।
स्वर्गीय मनीष काबरा की पावन स्मृति में आयोजित यह शिविर महज एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि दिव्यांगों के लिए स्वाभिमान और सम्मान का केंद्र बन गया है। यहाँ एक ही छत के नीचे उन तमाम दुश्वारियों का समाधान किया जा रहा है, जिनके लिए दिव्यांगजनों को अक्सर सरकारी दफ्तरों की चौखट पर चक्कर काटने पड़ते थे। शिविर की कार्यकुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ कृत्रिम हाथ-पैर, श्रवण यंत्र (Hearing Aid) और व्हीलचेयर जैसे आवश्यक उपकरण न केवल प्रदान किए जा रहे हैं, बल्कि डॉ. के.एस. पारीक के नेतृत्व में विशेषज्ञों की 14 सदस्यीय टीम युद्धस्तर पर काम करते हुए इन्हें मौके पर ही फिट और उपलब्ध करा रही है। इतना ही नहीं, सामाजिक सरोकारों को प्रशासनिक गति देते हुए अब तक 52 दिव्यांग प्रमाण पत्र और रोडवेज पास भी हाथों-हाथ बनाकर सौंपे जा चुके हैं, ताकि कोई भी जरूरतमंद यहाँ से खाली हाथ या निराश होकर न लौटे।
"पशु परिवार पालते हैं, मनुष्य दूसरों के लिए जीता है"
शिविर के उद्घाटन सत्र में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने मार्मिक बात कही। उन्होंने कहा कि "चेहरे पर मुस्कान लाना ईश्वर की सबसे बड़ी इबादत है।" वहीं, आरएसएस के विभाग प्रचारक चांदमल सोमानी ने सनातन संस्कृति का हवाला देते हुए याद दिलाया कि सेवा ही मनुष्य होने का असली प्रमाण है। अजय इंडिया लिमिटेड के सहयोग से चल रहा यह शिविर आगामी 14 फरवरी तक चलेगा। शिविर संयोजक मनोज माहेश्वरी और भैरूलाल अजमेरा ने बताया कि उनका लक्ष्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक राहत पहुँचाना है। समापन समारोह में राज्य मंत्री अविनाश गहलोत की उपस्थिति इस सेवा यज्ञ को और गरिमा प्रदान करेगी।
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