एक हफ्ते तक मचाई तबाही, अब शांत हुई बेतवा; राजघाट और माताटीला बांध के सभी गेट बंद

खबर सार :-

अगस्त के आखिरी दिनों की भारी बारिश से उफनाई बेतवा नदी अब शांत हो गई है। राजघाट और माताटीला बांध के सभी गेट बंद, टरबाइन से पानी निकासी जारी है।
एक हफ्ते बाद शांत हुई बेतवा नदी, राजघाट-माताटीला बांध के गेट बंद

खबर विस्तार : -

झांसी: बुंदेलखंड में लंबे इंतजार के बाद अगस्त के आखिरी दिनों में हुई झमाझम बारिश ने सूखे की चिंता के बीच बेतवा नदी को उफान पर ला दिया था। मध्य प्रदेश के कैचमेंट एरिया में हुई अच्छी बारिश का असर यह रहा कि बेतवा में अचानक पानी बढ़ गया और करीब एक सप्ताह तक नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाया। राजघाट और माताटीला बांध लबालब भर गए और अतिरिक्त पानी निकालने के लिए उनके गेट खोलने पड़े। नदी में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए किनारे बसे गांवों में भी अलर्ट जारी किया गया था। हालांकि अब बारिश थमने के साथ ही बेतवा का बहाव भी पूरी तरह शांत हो गया है।

सिंचाई विभाग के अनुसार, बेतवा में पानी की आवक अब काफी कम हो गई है। इसके चलते राजघाट और माताटीला बांध के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं। फिलहाल दोनों बांधों से टरबाइन के जरिए पानी छोड़ा जा रहा है। राजघाट बांध से टरबाइन के माध्यम से करीब 6,000 क्यूसेक और माताटीला बांध से करीब 4,800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे बांधों में विद्युत उत्पादन भी जारी है।

जून-जुलाई में बारिश न होने से बढ़ी थी चिंता

बुंदेलखंड में इस बार मानसून की शुरुआत बेहद कमजोर रही। जून और जुलाई में अपेक्षित बारिश नहीं होने से क्षेत्र की प्रमुख नदी बेतवा का जलस्तर और प्रवाह काफी कम रहा। अगस्त के पहले पखवाड़े में भी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। मानसून के महत्वपूर्ण दिन बीतने के बावजूद बांधों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से अधिकारियों और किसानों की चिंता बढ़ती गई।

स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि क्षेत्र में सूखे की आशंका जताई जाने लगी थी। कृषि कार्यों के साथ-साथ पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं सामने आने लगी थीं। लेकिन अगस्त के अंतिम दिनों में मौसम ने अचानक करवट ली और लगातार चार दिनों तक हुई तेज बारिश ने पूरे जल परिदृश्य को बदल दिया।

मध्य प्रदेश की बारिश से बेतवा में आया उफान

बेतवा नदी का कैचमेंट क्षेत्र मध्य प्रदेश तक फैला हुआ है। अगस्त के अंतिम दिनों में मध्य प्रदेश में भी अच्छी बारिश हुई, जिसका सीधा असर बेतवा के जलस्तर पर पड़ा। नदी में अचानक पानी की आवक बढ़ने से राजघाट और माताटीला बांध तेजी से भरने लगे।

दोनों बांधों में जलस्तर बढ़ने पर अतिरिक्त पानी निकालने के लिए गेट खोलने पड़े। बेतवा में पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि नदी ने बाढ़ का रूप ले लिया। नदी किनारे बसे गांवों को सतर्क किया गया और प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई।

अब टरबाइन से हो रहा विद्युत उत्पादन

सिंचाई विभाग के मुताबिक, फिलहाल बेतवा में पानी की आवक सीमित हो गई है। राजघाट और माताटीला बांध के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं। दोनों बांधों से अब मुख्य रूप से टरबाइन चलाकर पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कैचमेंट एरिया से आने वाला पानी सुखवा-ढुकवा और पारीक्षा बांध की ओर से भी बेतवा में पहुंच रहा है। पारीक्षा बांध से करीब 10,000 क्यूसेक पानी निकल रहा है, जो आगे बेतवा नदी में समा रहा है। सुखवा-ढुकवा क्षेत्र से भी पानी नदी में पहुंच रहा है, लेकिन इसकी मात्रा पहले की तुलना में काफी सीमित हो गई है।

बांध भरे, लेकिन नदी का बहाव शांत

अगस्त के अंतिम सप्ताह में जिस बेतवा नदी ने करीब एक सप्ताह तक तेज बहाव के साथ अपना रौद्र रूप दिखाया था, अब उसी नदी का प्रवाह काफी शांत हो गया है। राजघाट और माताटीला बांधों के गेट बंद होने के बाद नदी में पानी की स्थिति सामान्य होती जा रही है।

हालांकि दोनों प्रमुख बांध अब पानी से भर चुके हैं, लेकिन आगे बारिश की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यदि कैचमेंट एरिया में दोबारा अच्छी बारिश होती है तो नदी और बांधों में पानी की आवक बढ़ सकती है। फिलहाल सिंचाई विभाग बांधों के जलस्तर और बेतवा के प्रवाह पर लगातार नजर रख रहा है।

एक सप्ताह के भीतर बुंदेलखंड में बेतवा ने सूखे की चिंता से लेकर बाढ़ और फिर सामान्य प्रवाह तक का पूरा मंजर दिखा दिया। अगस्त की बारिश ने जहां बांधों को भर दिया, वहीं अब बारिश थमने के बाद नदी का बहाव फिर शांत हो गया है। किसानों और अधिकारियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि क्षेत्र के प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध हो गया है।

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