बांदा के कायाकल्प की तैयारी: 23 करोड़ की भारी-भरकम लागत से संवरेगा शहर का मुख्य मार्ग, जाम और जलभराव से मिलेगी मुक्ति
खबर सार :-
बांदा के किरन कॉलेज चौराहे से बाबूलाल चौराहे तक के मुख्य मार्ग को 2388 लाख रुपये की लागत से आधुनिक बनाया जाएगा। सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के प्रयासों से स्वीकृत इस प्रोजेक्ट में सड़क चौड़ीकरण, नाला निर्माण और अंडरग्राउंड केबलिंग शामिल है। शासन ने पहली किस्त के रूप में 11.94 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।
खबर विस्तार : -
बांदा: बुंदेलखंड के हृदय स्थल बांदा की सूरत अब बदलने वाली है। दशकों से संकरी गलियों, बेतरतीब बिजली के तारों और जलभराव की समस्या से जूझ रहे शहरवासियों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के विशेष प्रयासों के बाद प्रदेश सरकार ने शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण हिस्से "किरन कॉलेज चौराहे से बाबूलाल चौराहे तक" को 'स्मार्ट' बनाने के लिए 2388.59 लाख रुपये (लगभग 24 करोड़ रुपये) के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। यह केवल एक सड़क निर्माण का कार्य नहीं है, बल्कि बांदा को आधुनिक शहरी ढांचे की कतार में खड़ा करने की एक महत्वाकांक्षी योजना है।
विकास की नई इबारत: क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
बांदा शहर का वह हिस्सा जो व्यापारिक और आवागमन की दृष्टि से 'लाइफलाइन' माना जाता है, अब पूरी तरह से बदलने जा रहा है। शासन द्वारा स्वीकृत इस योजना के तहत किरण कॉलेज चौराहा, पदमाकर चौराहा, बाकरगंज चौराहा और छावनी से होते हुए बाबूलाल चौराहे तक के मार्ग का न केवल चौड़ीकरण होगा, बल्कि इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इस परियोजना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शासन ने 1194.30 लाख रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी है। यानी अब कागजी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और धरातल पर काम शुरू होने की उल्टी गिनती जारी है।
जाम और जलभराव के दोहरे दंश से राहत
बांदा की सबसे बड़ी समस्या सड़क पर होने वाला जलभराव और बेतरतीब ट्रैफिक रहा है। हल्की सी बारिश में बाकरगंज और छावनी जैसे इलाकों में नाले उफनाने लगते हैं, जिससे राहगीरों का निकलना दूभर हो जाता है।
वैज्ञानिक नाला निर्माण: इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सड़क के साथ-साथ एक सुव्यवस्थित नाला निर्माण किया जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र की ड्रेनेज व्यवस्था सुधरेगी और सड़कों पर पानी जमा होने की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।
सड़क चौड़ीकरण: व्यापारिक गतिविधियों के कारण इस मार्ग पर भारी ट्रैफिक रहता है। सड़क के चौड़े होने से वाहनों की आवाजाही सुगम होगी और घंटों लगने वाले जाम से निजात मिलेगी।
आधुनिकता का स्पर्श: जंजाल से मुक्ति और स्मार्ट लुक
बांदा की सड़कों पर अक्सर विकास और विनाश का एक अंतहीन खेल देखने को मिलता है। अमूमन यह देखा गया है कि जैसे ही कोई नई चमचमाती सड़क बनकर तैयार होती है, कुछ ही दिनों बाद बिजली या अन्य विभाग खंभे गाड़ने या तार बिछाने के नाम पर उसे खोदकर बदरंग कर देते हैं। विभागीय तालमेल की इस कमी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। लेकिन इस बार बांदा में 'प्लान्ड डेवलपमेंट' यानी सुनियोजित विकास की एक नई और सुखद झलक दिखाई देगी। इस पूरी परियोजना की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि भविष्य में तोड़-फोड़ की नौबत न आए।
इस कायाकल्प का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है-अंडरग्राउंड केबलिंग। वर्तमान में सड़कों के ऊपर मकड़ी के जाले की तरह झूलते बिजली के नंगे तार न केवल शहर की खूबसूरती पर दाग हैं, बल्कि मानसून और तेज हवाओं के दौरान बड़े हादसों को भी न्योता देते हैं। नई योजना के तहत इन तारों के जंजाल को जमीन के नीचे दफन कर दिया जाएगा, जिससे शॉर्ट सर्किट और फॉल्ट की समस्या न्यूनतम हो जाएगी और शहर का आसमान साफ और सुंदर दिखेगा।
इतना ही नहीं, रात के अंधेरे में डूबी रहने वाली गलियों और चौराहों को रोशन करने के लिए पूरे मार्ग पर आधुनिक स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। दूधिया रोशनी से नहाया यह मार्ग न केवल सुरक्षा के लिहाज से बेहतर होगा, बल्कि रात के समय व्यापारिक गतिविधियों को भी सुगम बनाएगा। राहगीरों की सुविधा का ख्याल रखते हुए प्रशासन यहाँ अर्बन शेल्टर (आधुनिक छतरी) का भी निर्माण कराएगा। चिलचिलाती धूप और अचानक होने वाली बारिश से बचाव के लिए बनाए जाने वाले ये शेल्टर अपनी विशिष्ट डिजाइन के कारण शहर के सौंदर्य में चार चांद लगा देंगे। साफ है कि इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद बांदा की यह मुख्य सड़क किसी महानगर के आधुनिक कॉरिडोर जैसी नजर आएगी।
आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी नई रफ्तार
एक पुरानी कहावत है कि विकास का रास्ता सड़क से होकर गुजरता है। किरण कॉलेज से बाबूलाल चौराहे तक का यह इलाका बांदा का व्यावसायिक केंद्र है। बेहतर बुनियादी ढांचा होने से यहाँ व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। दुकानदारों और ग्राहकों को धूल और कीचड़ से मुक्ति मिलेगी, जिससे फुटफॉल बढ़ेगा। स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस मार्ग के बनने से संपत्तियों की वैल्यू भी बढ़ेगी और बांदा की एक 'क्लीन और ग्रीन' शहर की छवि उभरेगी।
"भगीरथ प्रयास" और राजनीतिक इच्छाशक्ति
इस बड़ी उपलब्धि का श्रेय सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के सतत प्रयासों को दिया जा रहा है। स्थानीय लोग इसे विधायक का 'भगीरथ प्रयास' कह रहे हैं, क्योंकि इस भारी-भरकम बजट को आवास विभाग से स्वीकृत कराना कोई आसान काम नहीं था। विधायक प्रकाश द्विवेदी ने इस सौगात के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "हमारा लक्ष्य बांदा को एक व्यवस्थित और आधुनिक शहर बनाना है। यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में शहर के हर कोने को इसी तरह की सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्य की गुणवत्ता पर उनकी पैनी नजर रहेगी ताकि जनता के पैसे का सही सदुपयोग हो सके। योजना शानदार है और बजट भी मिल चुका है, लेकिन अब चुनौती है समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने की। बांदा की जनता को उम्मीद है कि निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक डाइवर्जन का उचित प्रबंध किया जाएगा ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। यदि यह प्रोजेक्ट तय समय सीमा में पूरा होता है, तो यह बुंदेलखंड के अन्य शहरों के लिए 'मॉडल रोड' साबित हो सकता है। कुल मिलाकर, बांदा अब पुराने ढर्रे को छोड़कर आधुनिकता की पटरी पर दौड़ने को तैयार है। 24 करोड़ की यह संजीवनी शहर के चेहरे पर छाई धूल को साफ कर उसे एक नई चमक देने वाली है।
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