बैजूनगर पंचायत में फर्जीवाड़े के आरोप, स्ट्रीट लाइट और सफाई के नाम पर धन निकासी का मामला गरमाया
खबर सार :-
पूरनपुर विकास खंड में, सचिव धर्मपाल की देखरेख वाली पंचायतों के भीतर विकास कार्यों के नाम पर लूट का एक खुला रैकेट बेरोकटोक जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभिन्न परियोजनाओं—जैसे कि MGNREGA, स्वच्छता अभियान और स्ट्रीट लाइट लगाने के कार्य—के लिए मनगढ़ंत अनुमान पेश करके पैसों की हेराफेरी की जा रही है।
खबर विस्तार : -
पीलीभीतः पीलीभीत जिले के विकास खंड पूरनपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत बैजूनगर में विकास कार्यों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव धर्मपाल पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई, नल मरम्मत और मनरेगा कार्यों के नाम पर बजट तो निकाला गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं कराया गया।
बीमारी फैलने का खतरा
ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत में स्ट्रीट लाइट लगाने और उनकी मरम्मत के नाम पर धनराशि खर्च दिखाई गई है, जबकि गांव की गलियों में आज भी अंधेरा छाया रहता है। साफ-सफाई के नाम पर भी भुगतान किया गया, लेकिन नालियों में गंदगी भरी पड़ी है और नियमित सफाई नहीं हो रही। इससे गांव में बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फर्जी स्टीमेट बनाकर और कागजों में कार्य दर्शाकर धनराशि को चहेते लोगों के खातों में ट्रांसफर किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में गांव में विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित रहे हैं, जबकि हकीकत में स्थिति जस की तस बनी हुई है।
शिकायत के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सचिव धर्मपाल से संपर्क करना मुश्किल होता है। कई बार फोन करने के बावजूद वह कॉल रिसीव नहीं करते और न ही शिकायतों पर ध्यान दिया जाता है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गांव के लोगों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए।
यह मामला एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाएगा, जिससे गांव में वास्तविक विकास कार्य हो सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ सही रूप में जनता तक पहुंच सके।
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