अंबेडकरनगर के शिक्षकों का अयोध्या में प्रदर्शन, चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल
खबर सार :-
अयोध्या में अंबेडकर नगर के टीचरों का विरोध प्रदर्शन ज़ोर पकड़ रहा है। शनिवार को, अलापार इलाके के रामनगर में श्रीमती लीलावती आदर्श विद्या मंदिर में मैनेजमेंट विवाद को लेकर टीचरों ने डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफ़ सोसाइटीज़ के ऑफ़िस के बाहर धरना दिया।
खबर विस्तार : -
अयोध्याः रामनगरी अंबेडकरनगर के शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन इन दिनों चर्चा में है। यह विरोध प्रदर्शन आलापुर क्षेत्र के रामनगर स्थित श्रीमती लीलावती आदर्श विद्या मंदिर के प्रबंधन विवाद को लेकर किया गया था। शिक्षक शनिवार को डिप्टी रजिस्ट्रार सोसाइटी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
धरने में शामिल शिक्षकों ने तीन प्रमुख मांगें उठाईं। उनका कहना था कि साधारण सभा की सदस्यता सूची को अद्यतन कर उसका सार्वजनिक रूप से प्रकाशन किया जाए, और उसके बाद ही चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। उनका यह भी कहना था कि यदि पारदर्शी सदस्यता सूची के बिना चुनाव कराए जाते हैं, तो यह नियमों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत होगा।
अपात्र नामों को हटाने की मांग
विरोध कर रहे शिक्षकों ने 18 फरवरी को प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम को स्थगित करने की भी मांग की। इसके अलावा, उन्होंने मतदाता सूची में शामिल कथित अपात्र नामों को हटाने की मांग की, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित हो सके। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी इन मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
धरने का नेतृत्व आर.एस. गौतम ने किया, जबकि संयुक्त मंत्री सुनील कुमार मिश्र ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे पारदर्शिता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। उनका मानना था कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितताएं या धोखाधड़ी की संभावना खत्म हो सके।
कई शिक्षक हुए शामिल
फिलहाल विद्यालय प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस विवाद का समाधान कैसे निकालता है। धरने के दौरान ओंकार मिश्र, अब्दुल रहीम, सुधीर कुमार, चक्रधर चतुर्वेदी, चंद्र प्रकाश मिश्रा, दुर्गेश दुबे, शिवम पांडे, प्रमोद कुमार पांडे, अशोक कुमार तिवारी, प्रभाकर पांडे, शिव शंकर शुक्ला, अनिरुद्ध मिश्रा, नीरज, अभिमन्यु, सच्चिदानंद जनार्दन कुमार और दीपचंद जैसे शिक्षक भी मौजूद रहे। यह विवाद न केवल स्थानीय शिक्षकों के लिए, बल्कि चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी सवाल उठाता है, और प्रशासन से यह उम्मीद की जा रही है कि वह इसे शीघ्र हल करेगा।
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