मध्य प्रदेशः अमरकंटक में उमड़े श्रद्धालु, नर्मदा नदी के तट पर भक्तों ने किया महादेव का जलाभिषेक
खबर सार :-
सावन के तीसरे सोमवार को मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मां नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक में भक्तों की भीड़ रही। शिवालयों में भक्तों ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।
खबर विस्तार : -
अनूपपुर: सोमवार को पवित्र तीर्थ स्थल अमरकंटक में आस्था, भक्ति और भगवान शिव की पूजा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस दिन सावन महीने का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी (सावन शुक्ल पंचमी) का शुभ संयोग एक साथ पड़ा। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा सहित कई इलाकों से बड़ी संख्या में शिव भक्त और तीर्थयात्री नर्मदा नदी के पवित्र तट पर जमा हुए।
अनुमान है कि शाम तक लगभग एक लाख तीर्थयात्री अमरकंटक पहुंचकर नर्मदा में स्नान करेंगे, ध्यान करेंगे, प्रार्थना करेंगे और भगवान ज्वालेश्वर महादेव का जलाभिषेक करेंगे। शिव भक्तों के लिए यह तीसरा सोमवार खास महत्व रखता है क्योंकि एक दुर्लभ संयोग बना है: लगभग डेढ़ दशक बाद, सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़े हैं। जहां यह दिन भगवान शिव को समर्पित है, वहीं पंचमी नाग देवता को समर्पित है। इसलिए, भक्त पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान शिव और नाग देवता दोनों की पूजा कर रहे हैं। एक ही दिन इन दोनों पर्वों का होना बहुत शुभ माना जाता है।
नर्मदा नदी का उद्गम स्थल है अमरकंटक
सावन के इस पवित्र तीसरे सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए भक्त अमरकंटक में स्थित शिवालयों (शिव मंदिरों) में उमड़ रहे हैं। अमरकंटक नर्मदा नदी का उद्गम स्थल और भगवान अमरेश्वर महादेव की तपस्या का स्थान है। देश और राज्य भर से तीर्थयात्री बड़ी संख्या में प्रार्थना करने आ रहे हैं। भगवान अमरेश्वर महादेव का प्राकृतिक शिवलिंग अमरकंटक के पवित्र शहर के जंगलों के बीच स्थित है।
दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु
यह शहर मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा पर, अनूपपुर जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर है। लोग यहां दर्शन के लिए न केवल छत्तीसगढ़ से बल्कि अन्य राज्यों से भी आते हैं। सावन के महीने में मंदिर में भारी भीड़ होती है; इस साल भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां लोग सुबह-सुबह भगवान शंकर को जल चढ़ाने के लिए पहुंचे। भगवान शिव की पूजा के लिए सावन के सोमवार का व्रत रखना बहुत फलदायी माना जाता है।
सोमवार का व्रत रखने से पूरी होती हैं इच्छाएं
धार्मिक मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत रखने से व्यक्ति की मनचाही इच्छाएं पूरी होती हैं। सावन का महीना महादेव, यानी देवताओं के देवता को बहुत प्रिय है। इस पूरे महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। इसके अलावा, विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद पाने के लिए 'सावन सोमवार' का व्रत रखती हैं।
सुबह-सुबह भक्तों ने किया जलाभिषेक
पंचांग के अनुसार, सावन का महीना 30 जुलाई को शुरू हुआ। 17 अगस्त को, सावन के तीसरे सोमवार को, अनूपपुर जिलेभर में भक्तों ने सुबह-सुबह मंदिरों में भगवान शिव का अभिषेक किया। लोगों ने मंदिरों और अपने घरों में जल-अभिषेक, रुद्राभिषेक और अन्य विशेष प्रार्थनाएं करके देवता को प्रसन्न करने की कोशिश की। माना जाता है कि भगवान शिव का अभिषेक करने से सौभाग्य बढ़ता है और शुभ फल मिलते हैं।
सुबह 3 बजे से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान
अमरकंटक में, नर्मदा में स्नान, दर्शन, पूजा और अभिषेक जैसे अनुष्ठान सुबह 3 बजे ही शुरू हो गए। जैसे-जैसे सुबह हुई, भक्तों की भारी भीड़ नर्मदा के उद्गम स्थल, रामघाट, कोटि तीर्थ घाट और ज्वालेश्वर धाम की ओर उमड़ पड़ी। केसरिया वस्त्र पहने भक्त—कांवरिये हर जगह नर्मदा का जल लिए और शिव का नाम जपते हुए दिखाई दिए। इस बीच, नर्मदा मंदिर के आंगन के बाहर तक दर्शनार्थियों की कतारें लग गईं।
ज्वालेश्वर धाम में भी लगीं भक्तों की लंबी कतारें
ज्वालेश्वर धाम में भी दर्शन और जल-अभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगीं। अमरकंटक और ज्वालेश्वर धाम के बीच 8 किलोमीटर के रास्ते पर, कांवरियों के समूह जोर-जोर से "हर-हर महादेव" का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ते हुए दिखाई दिए। नर्मदा के पवित्र शहर में इन मंत्रों की गूंज से ऐसा माहौल बन गया, मानो भगवान शिव स्वयं अमरकंटक में प्रकट हो गए हों। बारिश के बीच भक्त नर्मदा के दर्शन के बाद जलाभिषेक के लिए ज्वालेश्वर की ओर बढ़ रहे थे।
महाभारत काल में भी अमरकंटक का उल्लेख
इसके अलावा, पर्यटक 'माई की बगिया' और 'सोनमुडा' जैसी जगहों पर भी बड़ी संख्या में पहुंचे। माना जाता है कि अमरकंटक में ज्वालेश्वर और अमरेश्वर में की गई प्रार्थनाओं से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अमरकंटक न केवल कई ऋषियों और साधुओं की तपस्या का स्थान है, बल्कि यह आध्यात्मिक और प्राकृतिक रूप से भी बेहद खूबसूरत और मनमोहक है। महाभारत काल से ही अमरकंटक का जिक्र मिलता है, जिससे यह ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस बार श्रावण शुक्ल पंचमी और नाग पंचमी के शुभ अवसर के कारण भक्तों की संख्या काफी ज्यादा थी। भक्तों ने नर्मदा में स्नान और पूजा-अर्चना के साथ-साथ नाग पंचमी के धार्मिक महत्व को लेकर भी काफी उत्साह दिखाया।
पुलिस ने सुरक्षा और ट्रैफिक का इंतजाम संभाला
बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के आने को देखते हुए अमरकंटक के मुख्य धार्मिक स्थलों पर पुलिस बल तैनात किए गए थे। जहाँ छत्तीसगढ़ पुलिस ने ज्वालेश्वर धाम में सुरक्षा व्यवस्था संभाली, वहीं पुलिसकर्मियों ने पवित्र शहर की प्रमुख जगहों—जैसे रामघाट, कोटि तीर्थ घाट, मां नर्मदा मंदिर और ज्वालेश्वर चौराहे पर कड़ी सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखी। भीड़ को व्यवस्थित ढंग से संभालने, तीर्थयात्रियों को कतार में रखने और ट्रैफ़िक को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस और सुरक्षाकर्मी लगातार सक्रिय रहे।
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