श्रद्धालुओं की संख्या देख घबराया प्रशासन, रात से ही लगने लगी लाइन

खबर सार :-

सावन के सोमवार और नागपंचमी का अवसर एक ही दिन आया। इसलिए मंदिरों में भक्तों की संख्या हर बार से ज्यादा रही। वाराणसी में गंगा का जलस्तर ज्यादा होने के कारण नावों का संचालन प्रशासन ने रोक रखा था।
नाग पंचमी और सावन के सोमवार का अद्भुत संयोग, श्रद्धाुओं की संख्या ने तोड़े रिकॉर्ड

खबर विस्तार : -

प्रयागराज/अयोध्या/वाराणसी: सावन के पवित्र महीने में तीसरे सोमवार के मौके पर नाग पंचमी का पर्व एक दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। एक ही दिन दोनों के पड़ने के कारण उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने भोलेनाथ की पूजा में कोई कसर नहीं छोड़ी। विधि-विधान से विभिन्न मंदिरों में पूजा की गई। दूसरी ओर बनारस में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण नावों का संचालन रोक दिया गया। प्रशासन के इंतजाम बेहतर रहे, इसलिए भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। 

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प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर सोमवार सुबह हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे शुरू हो गए। श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों में पहुंचने लगी। भोर से ही भोले दशाश्वमेध घाट पर श्रद्धालु गंगा जल भरने के लिए पहुंचने लगे। उसके बाद गंगाजल लेकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक के लिए पहुंचे। अपनी यात्रा पर कांवड़िये काफी खुश दिखे। घाटों पर विशेष व्यवस्था की गई थी। नाग पंचमी के अवसर पर प्रयागराज के दारागंज स्थित प्रसिद्ध नागवासुकी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या हजारांे में रही। भारी बारिश के बावजूद ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु कतारों में लगने लगे थे। उन्होंने नाग देवता को दूध-जल और पुष्प अर्पित किया। कालसर्प दोष व ग्रह बाधाओं से मुक्ति के लिए पूजा-अर्चना की गई। प्राचीन मंदिर नागों के राजा भगवान वासुकी का मुख्य निवास स्थान इसी मंदिर को माना जाता है। कहते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग का स्थान प्रयागराज था। इसी आधार पर नाग पंचमी के दिन यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। सुबह साढ़े 4 बजे से ही यहां करीब 10,000 श्रद्धालु पहुंच चुके थे।  प्रयागराज में नागवासुकी का सिर्फ एक ही मंदिर है।

पूजा से पहले स्वच्छ सरयू में किया स्नान

अयोध्या में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी पर आस्था का सैलाब दिखा। सिद्ध पीठ नागेश्वरनाथ में जलाभिषेक के समय राम की नगरी भोले के जयकारों से गूंजती रही। यहां भक्त दूर-दूर से आए थे। यहां भी यही भाव रहा कि आज नाग पंचमी और सावन का सोमवार है। इस शुभ अवसर पर बाबा को जल चढ़ाना कल्याणकारी होता है। जलाभिषेक के लिए लाइन में लगने से पहले सरयू के पवित्र जल में स्नान भी किया। भोले के भक्तों ने कहा कि दर्शन अच्छी तरह से हुए हैं और जलाभिषेक भी सही तरीके से कर पाए हैं। किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। सरयू का जल भी काफी साफ रहा।

जलस्तर बढ़ने से रोका गया नावों का संचालन

वाराणसी में सावन के तीसरे सोमवार पर देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में दर्शन करने के लिए लोग पहुंचे हैं। खासकर वाराणसी में बारिश के बावजूद श्री काशी विश्वनाथ धाम में जगह कम पड़ने लगी। भक्तों ने दर्शन के लिए लंबी लाइनों में इंतजार किया। मौका आने पर बाबा विश्वनाथ को जल चढ़ाया। इस दौरान भीड़ को संभालने के लिए पुलिस की तैनाती रही। ड्रोन से निगरानी भी चलती रही। बनारस में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण नावों का संचालन रोक दिया गया।

काशी विश्वनाथ धाम में हुई फूलों की बारिश

काशी विश्वनाथ धाम में आकर्षण फूलों की बारिश रहा। यहां पूजा के लिए घरों से आए और कांवड़ियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस मौके पर मंदिर को सजाया गया था। यहां काफी लोगों को मंगला आरती में हिस्सा लेने का अवसर मिला। हर-हर महादेव के जयकारे लगते रहे। दशाश्वमेध क्षेत्र के एसीपी अतुल अंजन ने बताया कि इस बार सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। डीआईजी शिवहरी मीणा ने बताया कि अधिकारी आधी रात से व्यवस्था संभालने लगे थे। मंदिरों के आसपास प्रशासन की ओर से व्यवस्था काफी अच्छी थी। कहीं पर भी जाम नहीं रहा।

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