उज्जैनः अर्धचंद्र, त्रिशूल और त्रिपुंड से हुआ महाकाल का श्रृंगार, रिमझिम बारिश में निकली कांवड़ यात्रा
खबर सार :-
उज्जैन में मंगलवार को भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। हल्की बारिश के बीच कांवड़ यात्रा निकाली गई। ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
खबर विस्तार : -
उज्जैन: मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में सावन के पवित्र महीने के दौरान आस्था और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। मंगलवार को भगवान महाकालेश्वर के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मंदिर में भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। इसके बाद, हल्की बारिश के बीच 'समर्पण कांवड़ यात्रा' निकाली गई, जिसमें हजारों भक्त शामिल हुए। अवंतिका शहर "बम भोले" के जयकारों से गूंज उठा।
मंगलवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 'भस्म आरती' (पवित्र भस्म चढ़ाने की रस्म) हुई, जिसमें भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि श्रावण कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि (छठे दिन) को वीरभद्र जी से पारंपरिक अनुमति लेने के बाद सुबह 3:00 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा की। फिर भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से जलाभिषेक किया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की पवित्र भस्म
पूजा के दौरान पहली घंटी बजाई गई और 'हरि ॐ' का जाप करते हुए जल अर्पित किया गया। पुजारियों ने बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया। कपूर आरती के बाद भगवान को नया मुकुट पहनाया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े ने भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की। झांझ, नगाड़े और शंख की ध्वनि के बीच भस्म आरती संपन्न हुई।
हजारों भक्तों ने किए दिव्य स्वरूप के दर्शन
पूजा के बाद भगवान महाकाल का राजा के रूप में विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें चांदी का अर्धचंद्र, त्रिशूल और त्रिपुंड से सजाया गया। साथ ही, उन्हें शेषनाग वाला चांदी का मुकुट, चांदी की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूलों की मालाएं भी पहनाई गईं। इसके बाद भगवान को फल और मिठाइयों का भोग लगाया गया। हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के इस दिव्य रूप के दर्शन का लाभ उठाया। मान्यता है कि पवित्र भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार रूप से साकार रूप में आकर भक्तों को दर्शन देते हैं।
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श्री नवग्रह शनि मंदिर से शुरू हुई कांवड़ यात्रा
समाज सेवक और समर्पण कांवड़ यात्रा के आयोजक नारायण यादव ने बताया कि हर साल की परंपरा के अनुसार यह यात्रा सुबह 11 बजे इंदौर रोड पर त्रिवेणी घाट स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर से शुरू हुई। बैंड-बाजे के साथ, भक्तों ने महाकाल मंदिर के लिए निकलने से पहले कांवड़ों की पूजा-अर्चना की। इस यात्रा में भगवान शिव के बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। हल्की बारिश ने भी भक्तों के उत्साह को कम नहीं किया; पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी "बम भोले" का जयकारा लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए।
भगवान शिव की भक्ति से सराबोर हुआ माहौल
यात्रा शुरू होने से पहले, शनि मंदिर परिसर में संतों और बुजुर्गों की खास मौजूदगी में कांवड़ों की विधिवत पूजा की गई। इस मौके पर महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज, संत नंदन महाराज और महंत विनीत गिरी महाराज विशेष रूप से मौजूद थे। मोक्षदायिनी मां शिप्रा नदी का पवित्र जल लेकर, हजारों पुरुष और महिला कांवड़ यात्री भगवान महाकालेश्वर का जलाभिषेक करने के लिए निकल पड़े। पूरा माहौल भगवान शिव की भक्ति से सराबोर हो गया।
अलग-अलग पड़ावों पर कांवड़ियों का हुआ स्वागत
त्रिवेणी घाट पर शुरुआती पूजा के बाद, यह यात्रा श्री नवग्रह शनि मंदिर (त्रिवेणी घाट, इंदौर रोड), नानाखेड़ा चौराहा, मुनीम नगर दो तालाब, संतराम सिंधी कॉलोनी चौराहा, शास्त्री नगर, नीलगंगा चौराहा और हरि फाटक ओवरब्रिज से होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। पूरे रास्ते में, शहरभर में बनाए गए अलग-अलग पड़ावों पर भक्तों और कांवड़ियों का जोरदार स्वागत किया गया।
नगर भ्रमण पर निकले महाकाल, दर्शन को उमड़े भक्त

सावन के पवित्र महीने के पहले सोमवार को मध्य प्रदेश भगवान शिव की भक्ति में डूबा हुआ नजर आया। उज्जैन में, दुनियाभर में मशहूर ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर की श्रावण महीने की पहली शाही सवारी बहुत धूमधाम से निकाली गई। इस कार्यक्रम के दौरान, भगवान महाकाल ने 'मनमहेश' रूप में प्रकट होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने और उनका हालचाल पूछने के लिए शहर का भ्रमण किया। मंदिर परिसर और सवारी के रास्ते में "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयकारे गूंजते रहे। सुबह से ही महाकाल मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों भक्तों ने भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लिया; नंदी हॉल और कार्तिक मंडपम तक लंबी कतारें लगी हुई थीं।
सवारी के गुजरने पर भक्तों ने लिया आशीर्वाद
रास्ते में हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल को फूल चढ़ाए और उनका आशीर्वाद मांगा; भगवान की एक झलक पाने के लिए चारों ओर भारी भीड़ जमा हो गई। भगवान मनमहेश का स्वागत करने के लिए, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से श्री के.बी. पांड्या और उनकी टीम ने सवारी के पूरे रास्ते पर सुंदर रंगोली बनाई। भजन मंडलियों की सैकड़ों महिलाओं ने भगवान शिव की स्तुति में भजन गाए। ये मंडलियां पूरे जोश के साथ सवारी में आगे बढ़ रही थीं और डमरू व मंजीरा जैसे वाद्ययंत्र बजा रही थीं। बाबा श्री महाकाल की पालकी को एक विशाल ध्वज के साथ आगे ले जाया गया। सवारी के पूरे रास्ते में 8 लाख से ज़्यादा भक्तों ने भगवान महाकालेश्वर के 'मनमहेश' रूप के दर्शन किए।
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