ड्रग्स सैंपल के बहाने बुलाया, लाखों की वसूली का था खेल! परवेज हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा

खबर सार :-

झांसी में परवेज अली की हत्या के मामले में ड्रग्स सैंपल के बहाने वसूली की साजिश का खुलासा। पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है।
परवेज हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा, लाखों की वसूली का था खेल

खबर विस्तार : -

झांसी: झांसी के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में 21 वर्षीय परवेज अली की मौत का मामला अब महज एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि कथित वसूली की साजिश के तहत हत्या के रूप में सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, परवेज को ड्रग्स का सैंपल देने के बहाने बुलाया गया था। इसके बाद उसे ड्रग्स के मामले में फंसाने, जेल भेजने का डर दिखाकर मोटी रकम वसूलने की योजना थी। इस मामले में प्रेमनगर थाने के आरक्षी आशीष सिंह की भूमिका भी सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है।

परवेज की संदिग्ध मौत

पुलिस के अनुसार, 13 सितंबर की रात करीब नौ से दस बजे के बीच परवेज ने रैपिडो बुक कर घर से निकला था। उसने अपने परिजनों से कहा था कि वह एक-दो घंटे में लौट आएगा। लेकिन देर रात करीब एक बजे परिजनों को प्रेमनगर पुलिस द्वारा सूचना दी गई कि परवेज नगरा हाट में नशे की हालत में गिरा मिला है और उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। जब परिजन मेडिकल कॉलेज पहुंचे, तो परवेज की मौत हो चुकी थी। शव पर चोटों के निशान मिलने के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि के बाद पुलिस ने मामले की जांच हत्या के एंगल से आगे बढ़ाई।

ड्रग्स का सैंपल दिखाकर फंसाने की तैयारी

जांच में पुलिस के सामने जो कहानी आई, उसके मुताबिक परवेज को पहले ड्रग्स के मामले में फंसाने की तैयारी थी। आरोप है कि उसे ड्रग्स का पैकेट दिखाकर कार्रवाई और जेल भेजने का डर पैदा किया जाना था। इसके बाद इसी डर का फायदा उठाकर उससे बड़ी रकम वसूलने की योजना बनाई गई थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर पांच हजार रुपये उसके खाते में डाले गए थे, ताकि ड्रग्स का सैंपल मंगाया जा सके। पुलिस अब इस लेनदेन और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

घटना की रात का घटनाक्रम

पुलिस के मुताबिक, घटना वाली रात आरोपी तीन कारों से पहुंचे थे। परवेज को वाहन में बैठाकर प्रेमनगर क्षेत्र की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसे आरोपियों की कथित मंशा का पता चल गया। वाहन के भीतर बातचीत के बाद विवाद और हाथापाई शुरू हो गई। जांच में एक आरोपी द्वारा घटना का वीडियो बनाए जाने की बात भी सामने आई है। विवाद बढ़ने के बाद परवेज के साथ मारपीट की गई। पुलिस का दावा है कि साजिश सामने आने के डर से आरोपियों ने उसे पीट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

शव छोड़कर भागे आरोपी

परवेज की मौत के बाद आरोपियों ने शव को छोड़ दिया और मौके से फरार हो गए। शुरुआत में मामला संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के रूप में सामने आया, लेकिन पोस्टमार्टम में चोटों के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी। 

प्रेमनगर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 0424/2026 के तहत धारा 103(1) बीएनएस में मामला दर्ज किया गया। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन, बातचीत और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंची। मामले में प्रेमनगर थाने के आरक्षी 649 आशीष सिंह की भूमिका सामने आने से पुलिस महकमे में भी सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस जांच के मुताबिक आशीष जून में कोतवाली थाने से स्थानांतरित होकर प्रेमनगर थाने पहुंचा था। आरोप है कि वहां उसकी कुछ युवकों से नजदीकी बढ़ी।  जांच में यह भी सामने आया कि आशीष सिंह आरोपी जय श्रीवास्तव उर्फ अमन के मकान में रहता था। पुलिस उसके मोबाइल संपर्क, आरोपियों से बातचीत, मुलाकातों और कथित ड्रग नेटवर्क से संबंधों की जांच कर रही है।

11 लोगों के साथ साजिश का दावा

जांच से जुड़े पुलिस के दावों के अनुसार वसूली की कथित योजना में करीब 11 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। हालांकि वर्तमान कार्रवाई में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की भूमिका और अन्य संभावित आरोपियों के संबंध में जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों में प्रयांश सोनी, जय श्रीवास्तव उर्फ अमन, साहिल मिश्रा, भूपेन्द्र वंशकार, यश शिवहरे उर्फ बिट्टू, अशफिल खान, शनि नामदेव और आरक्षी 649 आशीष सिंह शामिल हैं।

तीन कारें और सात मोबाइल बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त बताई गई लाल रंग की मारुति सुजुकी इग्निस (UP16 BL 3572) बरामद की है। इसके अलावा ईको स्पोर्ट (UP93 AQ 3088) और मारुति सुजुकी एस-क्रॉस (UP93 BE 9579) भी कब्जे में ली गई हैं। सात मोबाइल फोन बरामद होने की बात भी पुलिस ने कही है।  इन मोबाइलों में मौजूद कॉल डिटेल, चैट, लोकेशन और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच को मामले में अहम माना जा रहा है।

ड्रग नेटवर्क और जम्मू-कश्मीर कनेक्शन की जांच

मामले की जांच अब परवेज की हत्या तक सीमित नहीं है। पुलिस और अन्य एजेंसियां उसके कथित ड्रग नेटवर्क और संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। जांच में जम्मू-कश्मीर से जुड़े संपर्कों और वहां हथियार से जुड़े एक पुराने प्रकरण की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।  यह भी जांच का विषय बनाया गया है कि परवेज के कथित ड्रग कारोबार के तार किन लोगों तक जुड़े थे और उसके संपर्क किन-किन राज्यों या क्षेत्रों में थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक परवेज द्वारा कथित तौर पर पाकिस्तान से मेफेड्रोन मंगाने की बात भी सामने आई है। मेफेड्रोन सिंथेटिक साइकोट्रोपिक पदार्थ है और इसके अवैध कारोबार पर एनडीपीएस कानून लागू होता है। हालांकि इस पूरे कथित नेटवर्क, खेप और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। एजेंसियां मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

20 से ज्यादा युवकों से संपर्क की जानकारी

जांच के दौरान परवेज के मोबाइल और संपर्कों की पड़ताल में 20 से अधिक युवकों से संपर्क होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। अब पुलिस यह पता कर रही है कि ये संपर्क सामान्य थे या कथित ड्रग नेटवर्क से जुड़े हुए थे। कॉल डिटेल, चैट, पैसों के लेनदेन और लोकेशन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। मामले में पुलिस विभाग ने भी कार्रवाई की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने प्रेमनगर थाना प्रभारी निरीक्षक तुलसीराम पांडेय समेत दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी दी है। आरक्षी आशीष सिंह की भूमिका की भी विभागीय और आपराधिक स्तर पर जांच की जा रही है।

जांच का अगला चरण

अब जांच का एक अहम सवाल यह है कि क्षेत्र में कथित ड्रग गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और स्थानीय पुलिस को इनके बारे में क्या जानकारी थी। बीट पुलिसकर्मियों से लेकर चौकी और थाना स्तर तक स्थानीय संपर्कों तथा पूर्व कार्रवाई की समीक्षा की जा रही है।

परवेज हत्याकांड की जांच अब कई दिशाओं में आगे बढ़ रही है। एक तरफ पुलिस हत्या में शामिल आरोपियों और घटना के घटनाक्रम को जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर कथित वसूली की साजिश, ड्रग नेटवर्क, पैसों के लेनदेन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ड्रग्स के कथित सैंपल से शुरू हुई यह साजिश आखिर किस स्तर तक फैली थी और इसमें शामिल बताए जा रहे अन्य लोगों की भूमिका क्या थी। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद मामले की आगे की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। 

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