श्री राम नाम और वैष्णव तिलक से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती के दिव्य दर्शन से गूंजा उज्जैन
खबर सार :-
आषाढ़ कृष्ण पक्ष तृतीया पर संपन्न बाबा महाकाल की भस्म आरती ने एक बार फिर श्रद्धा, परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। श्री राम नाम और वैष्णव तिलक से सजे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। भव्य आयोजन ने उज्जैन की धार्मिक गरिमा और सनातन परंपराओं की महिमा को पुनः स्थापित किया।
खबर विस्तार : -
Baba Mahakal Ujjain: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण पक्ष तृतीया के पावन अवसर पर शुक्रवार तड़के बाबा महाकाल की दिव्य और भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। तड़के चारों ओर गूंजते वैदिक मंत्रों, शंखध्वनि, घंटियों और ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष के बीच पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन करते ही श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति से भर उठीं।
भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेकर खोले गए कपाट
परंपरा के अनुसार शुक्रवार की सुबह सबसे पहले भगवान वीरभद्र से आज्ञा ली गई। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और धार्मिक वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट खोले गए। जैसे ही गर्भगृह के द्वार खुले, मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान कर दिया। यह दृश्य भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का अद्भुत संगम बन गया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक
मंदिर के पट खुलने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधि-विधान के साथ अभिषेक संपन्न हुआ। भगवान को पवित्र जल अर्पित करने के साथ विशेष पूजन किया गया। अभिषेक के उपरांत बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

महाकाल के मस्तक पर श्री राम' का नाम अंकित
इस बार बाबा महाकाल के मस्तक पर विशेष रूप से 'श्री राम' का नाम अंकित किया गया और वैष्णव परंपरा के अनुरूप तिलक लगाया गया। शिव और विष्णु की आराधना के इस सुंदर समन्वय ने श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक संदेश दिया। भगवान के दिव्य स्वरूप पर फूलों, चंदन और भव्य आभूषणों से किया गया श्रृंगार भक्तों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। श्रृंगार के बाद परंपरा के अनुसार भस्म आरती संपन्न हुई। महाकाल मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों और धार्मिक विधानों के साथ महाआरती कर भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की। आरती के दौरान गर्भगृह में मौजूद श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ भगवान का ध्यान करते रहे। आरती समाप्त होने के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा परिसर जयघोष से गूंज उठा।
महाकाल की भस्म आरतीः उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान
महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान भी मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल संसार की नश्वरता का संदेश देने वाले एकमात्र ऐसे ज्योतिर्लिंग हैं, जहां भस्म आरती की विशिष्ट परंपरा सदियों से चली आ रही है। यही कारण है कि इस आरती का महत्व अन्य सभी आरतियों से अलग माना जाता है। भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु गुरुवार देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारों में खड़े रहे। सुबह होने से पहले ही मंदिर परिसर भक्तों से भर गया था। प्रशासन और मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रवेश, सुरक्षा और दर्शन की विशेष व्यवस्थाएं की थीं, जिससे श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए जा सके।
विशेष धार्मिक विधि से तैयार भस्म का उपयोग
जानकारी के अनुसार, प्राचीन समय में भस्म आरती के लिए श्मशान की ताजा चिता की राख का उपयोग किया जाता था। समय के साथ इस व्यवस्था में परिवर्तन किया गया और वर्तमान में विशेष धार्मिक विधि से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह भस्म कपिला गाय के गोबर और विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती है, जिसे पूरी शुद्धता और परंपरा के साथ आरती में प्रयोग किया जाता है।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए विशेष ड्रेस कोड
भस्म आरती में शामिल होने के लिए विशेष ड्रेस कोड का पालन करना अनिवार्य होता है। पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला पहनना आवश्यक है, जबकि महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य किया गया है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस परंपरा का उद्देश्य धार्मिक मर्यादा और प्राचीन संस्कृति को संरक्षित रखना है।

महाकाल की भस्म आरती विश्व विख्यात
बाबा महाकाल की भस्म आरती की ख्याति देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु इस दिव्य आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी समय-समय पर इस अद्भुत आध्यात्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बन चुकी हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्था पर नजर बनाए रहे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
महाकाल लोक का जादू: रिकॉर्ड 7.32 करोड़ श्रद्धालुओं के साथ MP में नंबर-1 बना उज्जैन
धार्मिक पर्यटन के मामले में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन इस समय अपने ऐतिहासिक स्वर्णिम दौर से गुजर रही है। साल 2022 में 'श्री महाकाल लोक' कॉरिडोर के खुलने के बाद से यहाँ आने वाले भक्तों की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया है। हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में रिकॉर्ड 7.32 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे, जो पिछले साल की तुलना में 39% ज़्यादा है। आम दिनों में भी यहाँ रोज़ाना 1.5 से 2 लाख लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं। इस भारी भीड़ ने उज्जैन को एक ग्लोबल स्पिरिचुअल हब बना दिया है।
पर्यटकों के आवागमन से शहर के होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय व्यापार में भारी तेजी आई है। वहीं, बढ़ती भीड़ के कारण महाकाल मंदिर समिति की सालाना आय भी 100 करोड़ रुपये के पार पहुँच गई है। अब प्रशासन का पूरा फोकस 'सिंहस्थ महाकुंभ 2028' की तैयारियों पर है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत किया जा रहा है।
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