भगवान शिव की ससुराल में लग रहे हैं जयकारे, लाइन पर है आस्था का सैलाब
खबर सार :-
हरिद्वार: कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु लाइन में लग जाते हैं। इस मंदिर के प्रति यह विश्वास है कि भगवान शिव की ससुराल यही है। इसके साथ ही राजा दक्ष की राजधानी भी इसी क्षेत्र में थी। लोगों की मान्यता है कि भले ही लाइन में दिन बीत जाए, लेकिन भोलेनाथ के दर्शन करके ही जाएंगे।
खबर विस्तार : -
हरिद्वार: सावन महीने की शिवरात्रि के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह शिवमय हो चुकी है। यहां दुनियाभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जिधर देखो लोग जयकारे करते चले आ रहे हैं। इसे भगवान शिव की ससुराल माना जाता है। कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु लाइन में लग जाते हैं। भाव तो यह हैं कि भले ही लाइन में बीत जाए दिन, करके ही जाएंगे भोलेनाथ के दर्षन। हर दिन शिवभक्त गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान का जलाभिषेक कर रहे हैं।
कांवड़ यात्रा के कारण सावन की शिवरात्रि का है महत्व
दक्षेश्वर महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिल रहा है। महिला श्रद्धालुओं का कहना है कि यह भगवान शिव की ससुराल है। यहां जल चढ़ाने का विशेष महत्व है। शिवरात्रि पर ही ज्यादा लोग पहुंचते हैं, इस संबंध में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी कहते हैं कि हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात और चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि का पर्व आता है। यहां फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में कांवड़ की परंपरा के कारण सावन की शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है।
यहां थी कभी राजा दक्ष की राजधानी
श्रद्धालु पूरे सावन भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाते हैं। पर वे महाशिवरात्रि पर गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करने की कोशिश करते हैं। इससे उनको विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। दक्षेश्वर महादेव भगवान शिव की ससुराल और राजा दक्ष की राजधानी रही है। एक दिव्य और अलौकिक स्थान के रूप में यह आज भी प्रचलित है।
आस्था और परंपरा के साथ है विश्वास
दक्षेश्वर महादेव मंदर के भोलेनाथ के प्रति इतना विश्वास है कि लोग कहते हैं कि वह इतने सरल और दयालु हैं कि मात्र जल अर्पित करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं। सुबह से श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयकारों के बीच जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मनचाही कामना पूरी होने की प्रार्थना करने लगते हैं। उधर, ऋषिकेश के पौराणिक वीरभद्र महादेव मंदिर में भी तड़के से ही भक्तों की लंबी लाइन लगनी शुरू हो जाती है। शिव भक्त लंबी लाइनों में लगकर भगवान शिव का जल, दूध, पंचामृत, गन्ने के रस से जलाभिषेक करते हैं। वह फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हैं। पूज्य महंत रविंद्र पुरी कहते थे कि एक लोटा जल और सभी समस्याओं का हल। महादेव भी एक ऐसे ही भगवान हैं। इनको बस एक लोटा जल ही काफी है। वह श्रंगार नहीं चाहते। सावन के महीने में जो भी एक लोटा जल चढ़ाता है, उसकी हर समस्या का हल होता है।
FAQ...
1. जगह का नाम वीरभद्र क्यों पड़ा
माना जाता है कि यहां पर भगवान वीरभद्र प्रकट हुए थे। तब से इस जगह को वीरभद्र नाम से ही जानते है। मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी वीरभद्र के नाम से ही जाना जाता है।
2. सौभाग्य से मिलता है दर्शन
इस मंदिर को लोग बहुत सम्मन देते हैं। सावन के पवित्र महीने में भोलेनाथ का दर्शन करना और आराधना करने का सौभाग्य जिसे मिलता है, वह पुण्य पाता है। यह एक पौराणिक सिद्ध पीठ मंदिर है। यहां ज्यादातर लोग गंगाजल लाकर भगवान को चढ़ाते हैं।
3. मंदिर के अंदर क्या है खास
वीरभद्र मंदिर के प्रबंधक महंत राजगिरी महाराज ने कहा यहां पर भगवान शंकर का रूद्र रूप वीरभद्र विराजमान है। बड़ी संख्या में देश दुनिया से लोग आते हैं। हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव को चढ़ते हैं और अपनी मनोकामना उनके सामने रखते हैं।
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