Ganesh Visarjan 2026: अनंत चतुर्दशी पर गणपति बप्पा को दें विदाई, जानें- सही विधि और शुभ मुहूर्त

खबर सार :-

Ganesh Visarjan 2026 : अनंत चतुर्दशी पर दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। गणेश विसर्जन और भगवान अनंत की मुख्य पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 06:12 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। जानें सही पूजा विधि।
Ganesh Visarjan 2026: अनंत चतुर्दशी पर ऐसे दे गणपति बप्पा को विदाई

खबर विस्तार : -

Ganesh Visarjan 2026: दस दिनों तक हमारे घरों और दिलों में खुशियां बिखेरने के बाद अब हमारे गणपति बप्पा को विदाई देने का समय आ गया है। ढोल-ताशों की गूंज, हवा में उड़ता गुलाल और "अगले बरस तू जल्दी आना" का भावुक जयकारा... गणेश उत्सव की यह पवित्र यात्रा अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा के विसर्जन के साथ पूरी होती है। यह दिन न केवल 'विघ्नहर्ता' को विदाई देने का है, बल्कि भगवान श्री हरि विष्णु के 'अनंत' रूपों की भक्ति में लीन होने का भी एक शानदार अवसर है।

जब बप्पा आपके घर में विराजमान होते हैं, तो विसर्जन का दिन न केवल तैयारियों का समय होता है, बल्कि मन में यह सवाल भी आता है कि उन्हें किस समय विदा किया जाए? अगर आपने घर पर दस दिनों के लिए गणपति की मूर्ति स्थापित की है, तो अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को होगा। इस साल अनंत चतुर्दशी पर एक दुर्लभ और बेहद शुभ संयोग भी बन रहा है, जिससे देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भरपूर कृपा मिलने की उम्मीद है। आइए, गणपति विसर्जन के शुभ समय, पूजा की सही विधि और इस दिन से जुड़े खास नियमों के बारे में जानें।

गणेश विसर्जन 2026 का शुभ मुहूर्त (Ganesh Visarjan Muhurat)

गणेश चतुर्थी से शुरू होकर उत्सव का यह पर्व अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11:18 बजे शुरू होगी और 25 सितंबर को रात 11:06 बजे समाप्त होगी। इसलिए, जिन भक्तों ने दस दिनों तक बप्पा को अपने घरों या पंडालों में विराजमान किया है, वे 25 सितंबर को विसर्जन करेंगे।

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हालांकि, हर घर में बप्पा को दस दिनों तक रखने की परंपरा नहीं है। कई परिवार डेढ़, तीन, पांच या सात दिनों के बाद विसर्जन करते हैं। फिर भी, अनंत चतुर्दशी का दिन गणेश विसर्जन के लिए मुख्य दिन माना जाता है। अगर आप शास्त्रों के अनुसार शुभ समय पर बप्पा का विसर्जन और भगवान अनंत की पूजा करना चाहते हैं, तो पंचांग के आधार पर नीचे दिए गए समय सबसे उपयुक्त माने जाते हैं:

  • सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 12 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक
  • शाम का मुहूर्त (चर): शाम 04 जबकर 43 मिनट से शाम 06 बजकर 14 मिनट तक

गणपति विसर्जन की सही विधि

  • जब आप बप्पा को विदा करें, तो ध्यान रखें कि उन्हें उसी श्रद्धा, उत्साह और सम्मान के साथ विदा करें। जिसके साथ आपने उनका स्वागत किया था।
  • सबसे सुबह नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें। पूजा की जगह को साफ करें और पानी से बप्पा का अभिषेक करें।
  • भगवान गणेश को चंदन का तिलक लगाएं और लाल या पीले फूल और दूर्वा घास चढ़ाएं। आरती के लिए अगरबत्ती और दीपक जलाएं और भोग के रूप में मोदक, लड्डू और फल चढ़ाएं।
  • विसर्जन से पहले हाथ जोड़कर बप्पा से अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए माफी मांगें और उनसे अगले साल वापस आने का आग्रह करें।
  • मंत्रों और जयकारों के बीच बप्पा की मूर्ति को सम्मानपूर्वक किसी पवित्र नदी, तालाब या घर पर साफ पानी से भरे बर्तन में विसर्जित करें।

विसर्जन से पहले बप्पा की कैसे करें पूजा 

जिस श्रद्धा और भक्ति के साथ आपने मूर्ति की स्थापना की थी, उसी भाव से विदाई के दिन भी पूजा करें। पूजा वाली जगह को साफ करें। दीपक जलाएं और भगवान गणेश को फूल, दूर्वा घास और प्रसाद चढ़ाएं। आप भोग के तौर पर मोदक या घर पर बनी कोई भी मिठाई चढ़ा सकते हैं। इसके बाद, परिवार के साथ मिलकर भगवान गणेश की आरती करें।

विदाई की प्रार्थना के लिए आपको मुश्किल शब्दों की जरूरत नहीं है। बप्पा का आपके घर आने के लिए धन्यवाद करें। पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती चाहे वह जान-बूझकर हुई हो या अनजाने में के लिए माफी मांगें और उन्हें अगले साल फिर आने का निमंत्रण दें। अगर घर में बच्चे हैं, तो उन्हें भी इस पल में शामिल करें; वे बप्पा को प्रणाम कर सकते हैं और अपने मन की बात अपने शब्दों में कह सकते हैं।

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