अपनी मेहनत के दम पर 'भरूच एक्सप्रेस' ने टीम में जगह बनाई
खबर सार :-
मुनाफ पटेल उस टीम के सदस्य थे और टीम की तरफ से तीसरे सर्वाधिक सफल गेंदबाज थे। अपनी मेहनत के दम पर 'भरूच एक्सप्रेस' ने टीम में जगह बनाई
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज मुनाफ पटेल का जन्म एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने न सिर्फ भारतीय टीम में जगह बनाई, बल्कि विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य भी रहे। मुनाफ पटेल का जन्म 12 जुलाई 1983 को इखर, गुजरात में हुआ था। यह वह साल था, जब भारतीय टीम ने अपना पहला वनडे विश्व कप (25 जून 1983) जीता था। भारतीय टीम ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 2011 में जब दूसरा वनडे विश्व कप जीता, मुनाफ पटेल उस टीम के सदस्य थे और टीम की तरफ से तीसरे सर्वाधिक सफल गेंदबाज थे। घरेलू क्रिकेट में 'भरूच एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर रहे मुनाफ अपनी तेज रफ्तार, सटीक लाइन-लेंथ और स्विंग गेंदबाजी के लिए जाने गए।
रफ्तार ने सबका ध्यान खींचा
उनकी प्रतिभा को सबसे पहले भारत के पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे ने पहचाना। नेट्स में उनकी गेंदबाजी देखने के बाद मोरे ने उन्हें चेन्नई स्थित एमआरएफ पेस फाउंडेशन भेजा, जहां उन्होंने डेनिस लिली और टी.ए. शेखर की देखरेख में प्रशिक्षण लिया। यहीं से उनकी रफ्तार ने सबका ध्यान खींचा और उन्हें भारतीय क्रिकेट का सबसे तेज गेंदबाज कहा जाने लगा। दिलचस्प बात यह रही कि गुजरात या बड़ौदा की बजाय मुनाफ ने मुंबई से घरेलू क्रिकेट खेलने का फैसला किया। इसमें सचिन तेंदुलकर की अहम भूमिका रही, जिन्होंने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारियों से बात कर उन्हें टीम में शामिल कराने में मदद की। हालांकि, उनका प्रथम श्रेणी करियर लगातार चोटों से प्रभावित रहा।
तेज गेंदबाज प्रवीण की जगह शामिल था
मैदान पर खेलने से ज्यादा समय उन्हें फिटनेस हासिल करने में बिताना पड़ा। शुरुआती दिनों में वह केवल गति पर निर्भर थे, लेकिन बाद में उन्होंने रिवर्स स्विंग और यॉर्कर जैसी कला भी अपनी गेंदबाजी में शामिल कर ली। मुनाफ ने 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। 2006 से 2011 के बीच मुनाफ ने 13 टेस्ट, 70 वनडे और 3 टी20 मैच खेले। टेस्ट में 35, वनडे में 86 और टी20 में उन्होंने 4 विकेट लिए। मुनाफ का करियर चोटों से प्रभावित रहा और इसी वजह से ज्यादा लंबा नहीं चल सका। मुनाफ 2011 में वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। उन्हें चोटिल तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार की जगह टीम में शामिल किया गया था। विश्व कप में 11 विकेट लेकर उन्होंने भारतीय टीम को दूसरी बार चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। 2018 में क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद पटेल कोचिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह दिल्ली कैपिटल्स के साथ गेंदबाजी कोच के तौर पर जुड़े रहे हैं।
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