सिद्धारमैया का बड़ा ऐलान, नहीं लड़ेंगे 2028 कर्नाटक विधानसभा चुनाव, कहा- अब दूर ही.....
खबर सार :-
सिद्धारमैया ने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाने की बात कही है, लेकिन उन्होंने यह साफ किया है कि वह पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं होंगे। वह समाजसेवा और जनहित के मुद्दों पर अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि वह 2028 में होने वाला कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी और कहा कि करीब पांच दशक तक सक्रिय राजनीतिक जीवन में रहने के बाद अब वह चुनावी राजनीति से दूरी बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
स्वास्थ्य का दिया हवाला
सिद्धारमैया ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष सक्रिय रूप से पूरे किए हैं और अब उम्र तथा स्वास्थ्य को देखते हुए भविष्य में विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि वह जनसेवा से जुड़े रहेंगे और समाज के लिए काम करते रहेंगे।
उन्होंने लिखा कि वह अब 79 वर्ष के हो चुके हैं और मौजूदा सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक उनकी उम्र 81-82 वर्ष हो जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पहले जैसा नहीं रहा है और पहले की तरह ऊर्जा तथा उत्साह के साथ काम करना अब संभव नहीं है। इसी कारण उन्होंने 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।
ರಾಜಕೀಯ ಕ್ಷೇತ್ರ ಇಂದು ಕಲುಷಿತಗೊಂಡಿರುವುದರಿಂದ 2028ರ ವಿಧಾನಸಭಾ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ನಾನು ಸ್ಪರ್ಧಿಸುವುದಿಲ್ಲ. ಆದರೆ, ಸಕ್ರಿಯ ರಾಜಕಾರಣದಲ್ಲಿದ್ದು, ಜನರ ಕಷ್ಟ, ಸುಖಗಳಿಗೆ ಧ್ವನಿಯಾಗಿ ನಿಲ್ಲುತ್ತೇನೆ.
— Siddaramaiah (@siddaramaiah) July 26, 2026
ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ಸ್ಪರ್ಧಿಸುವಂತೆ ವರುಣ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಜನರು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಆದರೆ ನಾನು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ಯಾವುದೇ… pic.twitter.com/v0S4tCQ30o
सिद्धारमैया ने यह घोषणा मांड्या जिले में आयोजित दिवंगत केआर पेटे कृष्णा की जयंती कार्यक्रम के दौरान भी दोहराई। कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने उनसे अपना फैसला बदलने और राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने की अपील की। कई समर्थकों ने उनसे कम से कम एक दशक और चुनावी राजनीति में बने रहने का आग्रह किया, लेकिन सिद्धारमैया अपने फैसले पर कायम रहे।
सामाजिक कार्यों पर केंद्रित करेंगे ध्यान
उन्होंने स्पष्ट किया कि 2028 का विधानसभा चुनाव उनके चुनावी सफर का हिस्सा नहीं होगा। उनके बयान से संकेत मिल रहे हैं कि वह धीरे-धीरे सक्रिय चुनावी राजनीति से हटकर सामाजिक कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। सिद्धारमैया ने अपने फैसले के पीछे मौजूदा राजनीतिक माहौल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में चुनाव लड़ने के लिए धनबल का प्रभाव बढ़ गया है और ईमानदार राजनीति के लिए जगह कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस परिस्थिति को देखते हुए उन्होंने भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों में कर्नाटक की जनता ने उन्हें अपने बीच का व्यक्ति मानकर प्यार और समर्थन दिया है। जनता के इस विश्वास को वह अपना कर्ज मानते हैं और आगे का जीवन भी जनसेवा को समर्पित करना चाहते हैं। सिद्धारमैया कर्नाटक कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे हैं। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया और लंबे समय तक कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इस फैसले को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व को लेकर तेज हुईं चर्चाएं
कर्नाटक विधानसभा का अगला चुनाव मई 2028 तक होने की संभावना है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 13 मई 2028 को समाप्त होगा। इसके बाद नई विधानसभा के गठन के लिए चुनाव कराए जाएंगे। कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 निर्वाचित सीटें हैं, जिनमें 36 सीटें अनुसूचित जाति और 15 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 113 सीटों का बहुमत हासिल करना जरूरी होता है।
सिद्धारमैया के चुनावी राजनीति से हटने के संकेतों के बाद अब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो सकती हैं। पार्टी को 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति तैयार करनी होगी और यह तय करना होगा कि चुनावी अभियान का नेतृत्व किस चेहरे के साथ आगे बढ़ाया जाए।
कांग्रेस के सामने आएगी चुनौती
सियासी जानकारों के अनुसार, सिद्धारमैया का कद कर्नाटक कांग्रेस में बेहद अहम रहा है। उनके हटने के बाद पार्टी के सामने न केवल नेतृत्व का सवाल होगा, बल्कि राज्य में संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती भी होगी। उनकी घोषणा के बाद समर्थकों में निराशा जरूर देखने को मिली, लेकिन सिद्धारमैया ने अपने फैसले को उम्र, स्वास्थ्य और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा बताया है। अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक कांग्रेस किस तरह अपना नेतृत्व और चुनावी रणनीति तैयार करती है।
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