'रेल रोको' आंदोलन शुरू, अंबाला-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर धरना
खबर सार :-
बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर अंबाला-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर किया जा रहा है। बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से शनिवार को फतेहगढ़ साहिब के माधोपुर में रेल रोको आंदोलन शुरू कर दिया गया।
खबर विस्तार : -
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ साहिब में 'रेल रोको' आंदोलन शुरू हो गया है। यह आंदोलन बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर अंबाला-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर किया जा रहा है। बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से शनिवार को फतेहगढ़ साहिब के माधोपुर में रेल रोको आंदोलन शुरू कर दिया गया। सुबह से ही विभिन्न पंथक, सामाजिक और किसान संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में समर्थक गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब में एकत्र हुए। इसके बाद सभी ने एक मार्च के रूप में माधोपुर चौक की ओर कूच किया और अंबाला-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर धरना शुरू कर दिया।
सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रदर्शन किया जा रहा
आंदोलन के तहत सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे रेल यातायात प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय पहले अपनी सजा पूरी कर चुके बंदी सिंहों को अब तक रिहा नहीं किया गया, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। प्रदर्शनकारियों ने बंदी सिंहों की शीघ्र रिहाई की मांग करते हुए केंद्र और पंजाब सरकार से इस मामले में ठोस निर्णय लेने की अपील की। आंदोलन के दौरान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में जगतार सिंह हवारा, बलवंत सिंह राजोआणा, जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भियोरा, सांसद अमृतपाल सिंह की रिहाई तथा काली सूची में शामिल करीब 20 हजार सिखों के नाम सूची से हटाना शामिल है।
केंद्र और पंजाब सरकार लगातार उदासीन रवैया अपना रही
उनका कहना है कि कई कैदी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जेलों में रखा जाना उचित नहीं है। पत्रकारों से बातचीत में मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर केंद्र और पंजाब सरकार लगातार उदासीन रवैया अपना रही हैं। उन्होंने कहा कि इस कारण सिख समुदाय में लंबे समय से रोष और निराशा का माहौल बना हुआ है। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि न्याय की मांग को लेकर आवाज उठाने वाले सभी लोगों का आंदोलन है।
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