संभल में 67 तीर्थस्थलों पर कब्जा था, गरीबों की जमीन छीन ली: योगी आदित्यनाथ

खबर सार :-

अयोध्या, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अयोध्या में थे। उन्होंने यहां कहा कि 1947 में कांग्रेस एक बार अड़ गई होती तो देश का विभाजन नहीं होता। विभाजन के दिनों को याद करते हुए कहा कि उस समय कोई नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री नहीं था, यदि होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता।
मोदी जैसा पीएम होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता: योगी आदित्यनाथ

खबर विस्तार : -

अयोध्या : सीएम योगी ने कहा कि 2024 में संभल में उपद्रव किया गया। इन दंगाइयों को चिन्हित कर कार्रवाई की गई। जांच में खुलासा हुआ कि संभल में केवल हरिहर मंदिर ही नहीं है, वहां 67 तीर्थ, 19 कूप और 10 हजार एकड़ भूमि पर भी कब्जा हो गया था।  उन्होंने यहां कहा कि 1947 में कांग्रेस एक बार अड़ गई होती तो देश का विभाजन नहीं होता। विभाजन के दिनों को याद करते हुए कहा कि उस समय कोई नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री नहीं था, यदि होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता।

सीएम ने कहा, रामद्रोहियों से अंतिम दम तक निपटेंगे

इस दौरान योगी ने सपा सरकार, श्रीराम जन्मभूमि आदि का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि रामद्रोहियों से अंतिम दम तक निपटेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अयोध्या में परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज की 23वीं पुण्यतिथि पर दिगंबर अखाड़े में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे थे। उन्होंने महंत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन में परमहंस रामचंद्र दास महाराज के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। 1949 से लेकर जीवन रहने तक वह श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्पित रहे। 

धारा 370 और देश विभाजन का उल्लेख किया

सीएम ने कहा कि 1947 में देश का विभाजन हुआ। इस दौरान मोदी या पटेल जैसा नेतृत्व नहीं था। विभाजन के दिनों की यादें ताजा करते हुए कहा कि कांग्रेस ने विभाजन रोकने की कोशिश नहीे की। एक बार वह अड़ गई होती, तो देश का बंटवारा नहीं होता। उस दौर में कोई लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल या नरेंद्र मोदी जैसा देश का प्रधानमंत्री होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता। मुख्यमंत्री अनुच्छेद 370, कश्मीर में शांति, माओवाद और नक्सलवाद की समाप्ति पर भी बोले। इतिहास का जिक्र उन्होंने कई बार किया। कहा केवल पढ़ने और परीक्षा में प्रश्नपत्र का उत्तर देने का माध्यम नहीं, बल्कि इतिहास एक प्रेरणा और सबक भी होता है।

राम मंदिर आंदोलनकारियों पर गोलियां चलवाई

उनका इशारा कांग्रेस और सपा की ओर था। क्योंकि पूर्व की सरकारों में कई बार आरोपियों के बचाव में तथा राम मंदिर आंदोलनकारियों पर गोलियां चलवाने का काम किया था। सपा पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा था कि उनकी सरकार आएगी तो सपा कंस की मूर्ति लगाएगी। इसका परिणाम भी उन्होंने बताया और कहा कि इसके बाद उनकी सरकार नहीं बनी। सनातन का सम्मान करने वालों का अपमान भी कुछ लोगों ने किया है। यह बात यूपीए के शासन के दौरान से साबित हो रही।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत का नागरिक पूरी दुनिया में सम्मान पाता है। यह सम्मान यूपीए सरकार के समय में नहीं था। उन्होंने 1526 तक का इतिहास खंगाल डाला। वह 500 वर्ष पहले संभल में श्री हरिहर मंदिर के इर्दगिर्द भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि मंदर को तोड़कर एक गुलामी का ढांचा खड़ा कर दिया गया। 1526 तक उसका प्रतिकार संभल में नहीं हुआ। यही कारण रहा कि वर्ष 1528 में अयोध्या में उसे दोहराने का दुस्साहस किया गया। मात्र दो वर्ष में अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर को क्षतिग्रस्त दिया गया। यहां भी गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया।

पाकिस्तान और बांग्लादेश पर चुप्पी साध लेते 

सीएम ने देश बंटवारे पर अपनी बात रखी। यह बटवारा 14 अगस्त 1947 को आजादी के एक दिन पहले हुआ था। इसमें केवल हिंदू और सिख ही नहीं कटे थे, भारत भी कटा था। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को इसका जिम्मेदार बताया। सीएम ने कहा कि आज भी पाकिस्तान और बांग्लादेश के अंदर हिंदू मारे-काटे जाते हैं। देश के अंदर कुछ राजनेता यहां की हर घटना में हाय-तौबा करते घूमते, लेकिन वहां पर चुप्पी साध लेते। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, उनको सत्ता चाहिए थी। देश की प्रजा से कोई लेना-देना नहीं था। आज भी उनकी वही हालत है। केवल नाम और चेहरे बदले गए, बाकी सब वही है। उनके काम का तरीका भी वही है। 

अयोध्या में सरयू जी का जल सड़ता रहता था

सीएम ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर संभल में एक टीम सर्वे करने गई थी। इस टीम में पुलिसकर्मी हिंदू थे। अब वहां दंग नहीं होते। भाजपा शासन मंे संभल में उपद्रव को लेकर सरकार सख्त दिखी। इससे पहले 1947 से संभल में कई दंगों में हिंदू मार दिए गए। इनकी सरकारों में अयोध्या में राम मंदिर, काशी में काशी विश्वनाथ धाम नहीं बन पाया था। वहीं, मथुरा-वृंदावन सजते नहीं थे। सीएम ने कहा कि 2024 में संभल दंगाइयों को चिन्हित कर कार्रवाई की। जांच में खुलासा हुआ कि संभल में केवल हरिहर मंदिर ही नहीं है, वहां 67 तीर्थ, 19 कूप और 10 हजार एकड़ भूमि पर भी कब्जा हो गया था। अयोध्या के सरयू घाट, रामजी की पैड़ी, सरयू जी का जल सड़ता रहता था। सनातन को सम्मान नहींे मिल पाता था। वह दिन गए, तो रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले फिर साजिश कर रहे हैं। 

सनातन धर्म को अपमानित करने की कोशिश

महंत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज का 1949 से पहले से गोरक्षपीठ के साथ जुड़ाव रहा। मुख्यमंत्री ने अपने बारे में बताया कि सांसद रहने के दौरान दिल्ली से लखनऊ आने के बाद गोरखपुर की यात्रा के बीच दिगंबर अखाड़ा में परमहंस जी महाराज से मिलना होता था। वे अक्सर राम मंदिर निर्माण के बारे में पूछते थे। सीएम ने कहा कि चढ़ावा चोरी के मामले पर हमें भी कष्ट हुआ। इस पर कार्रवाई भी हुई। उधर, राम द्रोही अयोध्या धाम, श्रीराम जन्मभूमि, सनातन धर्म को अपमानित करने की कोशिश में हैं, इनसे सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि जो राम द्रोही होगा, उससे अंतिम दम तक निपटेंगे।

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