सांसद इमरान मसूद ने कहा, नहीं गाएंगे वंदे मातरम, पहले भी कर चुके हैं विवादित टिप्पणी

खबर सार :-

वंदेमातरम गायन को लेकर माहौल गरमा रहा है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे वंदे मातरम नहीं गाएंगे। इधर भाजपा ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया है।
सांसद इमरान मसूद के विवदित बोल- कहा, पहले भी नहीं गाया, आगे भी नहीं गाऊंगा वंदे मातरम

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी की ओर से पूरा वंदे मातरम गाने से रोकने पर विवाद भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया है। इसी बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे वंदे मातरम नहीं गाएंगे। यद्यपि यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी वंदे मातरम गाने से मना करने वाले लोग सुर्खियों में रहे हैं।  दरअसल, सोनिया गांधी के वंदे मातरम को पूरा गाने से रोकने की कोशिश पर विवाद शुरू हुआ था। इस पर भाजपा के हमलों को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सोनिया गांधी का पक्ष लिया।

मैं बिल्कुल भी नहीं गाऊंगा: मसूद

 मसूद का कहना था कि भाजपा को वंदे मातरम का प्रेम हो रहा है, तो करें। हमें क्या फर्क पड़ता है। हमें जितना गाना है, उतना ही गाना है। हम वही करेंगे। यद्यपि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। इमरान मसूद ने मीडिया से बात करते हुए यह बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि कहीं तक (वंदे मातरम) नहीं गाता था और आगे भी कहीं तक नहीं गाऊंगा। इमरान ने कहा कि जब वंदे मातरम गाया जाएगा, वह खड़े हो जाएंगे। चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बिल्कुल भी नहीं गाऊंगा। मेरा संवैधानिक अधिकार है। मैं अपने धर्म का पालन करूंगा।

केरल में भी अधूरा राष्ट्रीय गीत गाया

 स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम के गायन के बीच कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी पास खड़े मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं से बातचीत करते हुए नजर आईं थीं। इस पर भाजपा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने पूरा राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने के लिए कहा था। भाजपा नेताओं ने कई स्थानों पर सोनिया गांधी पर राष्ट्रीय गीत के अपमान का भी आरोप लगाया। इसी तरह केरल में भी अधूरा राष्ट्रीय गीत गाए जाने पर भाजपा सवाल कर रही है। उनके आरोपों पर कांग्रेस सांसद मसूद ने कहा कि पहले वंदे मातरम का पूरा इतिहास पढ़ लें। मसूद ने उसके बाद बात करने की चेतावनी दी।

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उन्होंने कहा कि सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा। ये कहां से आया था, किस तरह लिखा गया था और क्यों लिखा गया था, पूरा पढ़ लीजिए। कांग्रेस सांसद ने लोगों में गलत नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप मजबूर नहीं कर सकते हैं। इमरान मसूद ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एनटीए को लेकर उठाए गए सवालों पर अपनी राय दी और राहुल गांधी के सवाल को वाजिब बताया। कहा कि इसी से देश के नौजवान परेशान हैं। राहुल गांधी ने कहा था एनटीए गलती करती है, लेकिन इसकी सजा छात्रों को भुगतनी पड़ती है।

वंदे मातरम पर कब-कब हुए विवाद

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम पर कई बार विवाद हुए हैं। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित गीत पर 1937 में ही विवाद शुरू हो गया था। मद्रास और अन्य विधानसभाओं में वंदे मातरम के गायन को लेकर जब बहस छिड़ी, तब मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद कांग्रेस कार्य समिति ने गीत के शुरुआती दो छंद गाने का निर्णय लिया। 1950 में देश को जन गण मन (राष्ट्रगान) और वंदे मातरम (राष्ट्रगीत) के दर्जे पर निर्णय लेना था, तब डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत के रूप में जन गण मन के बराबर सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही है। 2006 में देहरादून में हुई बैठक में भारतीय जनता पार्टी ने वंदे मातरम के पूरे स्वरूप को अनिवार्य रूप से गाने की मांग पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। 2025-2026  में संसद में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर सभी छह छंदों को शामिल किए जाने के निर्देशों के बाद बहस छिड़ गई। 

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