संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की प्रतिष्ठा पर मंथन करेगा लेखक गांव महोत्सव, 40 देशों के विद्यार्थी होंगे शामिल

खबर सार :-

उत्तराखंड में भाषा आधारित भव्य आयोजन होने जा रहा है। इसकी तैयारी पूर्व सीएम कर रहे हैं। देश एवं विदेश के लोग यहां पहुंचेंगे।
25 अक्टूबर से देहरादून में पांच दिवसीय आयोजन, राज्यपाल करेंगे उद्घाटन-मुख्यमंत्री करेंगे समापन

खबर विस्तार : -

देहरादून, संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की संभावनाएं कभी कम नहीं होने वाली हैं। हिंदी के साथ भारतीय भाषाओं का वैश्विक प्रसार भी हमारे लिए हितकर है। इसलिए केंद्रित लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव 25 अक्टूबर से देहरादून में होगा।  पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने इस संबंध में शुक्रवार को एक पत्रकार वार्ता कर यह जानकारी दी। कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल की मौजूदगी में उद्घाटन किया जाना है। इसका समापन मुख्यमंत्री के द्वारा किया जाएगा।

केंद्रीय थीम ‘भारतीय भाषाएं एवं संयुक्त राष्ट्र में हिंदी’

थानो स्थित लेखक गांव में 29 अक्टूबर तक चलने वाले इस महोत्सव की केंद्रीय थीम ‘भारतीय भाषाएं एवं संयुक्त राष्ट्र में हिंदी’ है। डॉ. निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाएं देश की सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान परंपरा की संवाहक हैं। उनका वैश्विक प्रसार सामूहिक सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने महोत्सव से काफी उम्मीद जताई है। यहां पर साहित्य, शिक्षा, कला और संस्कृति के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय संवाद को मजबूती देने में मदद मिलेगी।

महोत्सव से देश को हैं भाषाई संभावनाएं

किसी भी भाषा का विस्तार और ज्यादा प्रसार होने से सबसे ज्यादा आर्थिक लाभ मिलता है। व्यापारिक  नजरिए से संबंधित भाषा वाले देश से वैश्विक करीबियां स्थापित की जाती हैं। महोत्सव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं की भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपना अनुभव साझा करने का सभी को मौका दिया जाएगा। यहां पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मानवीय संवेदनाओं, डिजिटल संस्कृति, समकालीन साहित्य, विदेशों में हिंदी शिक्षण, अनुवाद और हिंदी कविता पर विमर्श होगा।

भारत का इतिहास और विरासत सभी के सामने होगा

उत्तराखंड की भाषायी विरासत को बढ़ावा देने के लिए हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं का कवि सम्मेलन महत्वपूर्ण कार्यक्रम होगा। लोककला, लोकसाहित्य, प्रकृति एवं पर्यटन, प्रवासी साहित्य से सभी को परिचित कराया जाएगा। युवा संवाद के साथ पुस्तक मेला तथा बाल सृजन उत्सव कार्यक्रम के उत्साह का साक्षी होगा।
जलवायु परिवर्तन, हिमालय, विकसित भारत, महिलाओं की भूमिका और भारतीय दर्शन करने के दौरान लोग भारत के हर नजरिये से परिचित होना चाहेंगे। महोत्सव के अंतिम दिन 29 अक्टूबर को योग विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। डॉ. निशंक ने महोत्सव के उद्घाटन के बारे में बताया कि राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन इसका उद्घाटन करेंगे।

बड़ी संख्या में लोग कवि सम्मेलन के दौरान उपस्थित रहेंगे

कार्यक्रम का समापन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। इस विशाल और भव्य आयोजन में केंद्रीय एवं प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अध्यात्म और सिनेमा जगत की हस्तियों के अलावा साहित्य जगत से जुड़े लोगों की मौजूदगी रहेगी। बड़ी संख्या में लोग कवि सम्मेलन के दौरान उपस्थित रहेंगे। इसे कई बोलियों में सुना जाएगा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय विमोचन, सम्मान समारोह और समापन कार्यक्रम होंगे। आज पत्रकारों के बीज डॉ. आर.के. जैन, डॉ. सविता मोहन, लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने भी कार्यक्रम की खूबियों पर प्रकाश डाला। 

उत्तराखंड में भाषा आधारित भव्य आयोजन होने जा रहा है। इसकी तैयारी पूर्व सीएम कर रहे हैं। देश एवं विदेश के लोग यहां पहुंचेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से प्रेसवार्ता के दौरान राजनीति पर भी सवाल पूछा गया। क्या आपको राजनीति में साइडलाइन कर दिया गया है? उनका जवाब था, ऐसा कौन कह रहा है? ऐसा तो नहीं है। दरअसल, निशंक ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र कर दिया तो लोगों को मौका मिल गया। उन्होंने कहा कि वह कम उम्र में विधायक बने, मंत्री रहे, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई। राजनीति में उनका लंबा कार्यकाल, संगठन समय देने की बात कह रहे थे। इसी दौरान सवालों की बौछार शुरू कर दी गई।

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