कैसे एक वायरल मीम बना देश का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन? पढ़िए 'कॉकरोच क्रांति' की Inside Story
खबर सार :-
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों में जीत का जश्न मनाया जा रहा है। ऐसे में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चीफ जस्टिस को धन्यवाद कहा है। उनका मानना है कि उनके तंज के कारण ही इस पार्टी की शुरुआत हुई थी।
खबर विस्तार : -
Dharmendra Pradhan Resignation: देश भर में पेपर लीक को लेकर 36 दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इसके लिए सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे थे। 18 जुलाई को पुलिस द्वारा प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों में काफी आक्रोश बढ़ गया था। 20 जुलाई को सीजेपी ने संसद मार्च किया, जिस दौरान बैरिकेड लगाकर उन्हें रोका गया, जिसका विरोध करने पर युवाओं पर लाठियां चली। इस घटना के सामने आने के बाद कई विपक्षी दलों ने इसकी कड़ी निंदा की और छात्रों के समर्थन में उतर आई। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। विपक्षी दलों ने इसे छात्रों की बड़ी जीत बताया। इस दौरान सीजेपी के संस्थापक अभीजित दीपके ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को धन्यवाद किया। बता दें कि उनके एक तंज के बाद इस पार्टी की नींव रखी गई थी।
चीफ जस्टिस की टिप्पणी ने रखी आंदोलन की नींव
भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की एक टिप्पणी ने कॉकरोच जनता पार्टी को युवाओं की एकजुटता का मंच बना दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चीफ जस्टिस का आभार व्यक्त किया है। दरअसल, 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान कथित तौर पर कहा था कि फर्जी या बिना मान्यता वाली डिग्रियों के सहारे वकालत, मीडिया और अन्य पेशों में घुसपैठ करने वाले लोग 'कॉकरोच' के जैसे होते हैं, जो व्यवस्था पर हमला करते हैं। इस एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर इससे जुड़े तरह-तरह के मीम बनने लगे और मीम्स, कार्टून, व्यंग्यात्मक से शुरु हुआ पोस्टर सोशल मीडिया पर कॉकरोच आंदोलन का एक चेहरा बन गया। इसके बाद अभीजित दीपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' की नींव रखी। सोशल मीडिया पर इसकी शुरुआत मीम के तौर पर हुई थी, लेकिन बाद में यह छात्रों के आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया। हालांकि इसका प्रचलन बढ़ते देख इसका अकाउंट हटा दिया गया, लेकिन बाद में एक नया अकाउंट 'Cockroach is Back' नाम से आया, और एक स्लोगन दिया गया कि 'कॉकरोच कभी मरते नहीं।'
6 जून को जंतर-मंतर पर पहुंचे छात्र
सीजेपी का पहला अकाउंट बैन होने के बाद दूसरा आईडी बनते ही कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। काफी कम समय में इंस्टाग्राम पर इससे करीब 2.63 करोड़ फॉलोअर्स जुड़ गए। इसके बाद रील, मीम और लाइव स्ट्रीम के साथ प्रदर्शन स्थल से हर तरह की जानकारी अकाउंट से जुड़े लोगों तक पहुंचने लगी। युवाओं में इसका प्रचलन बढ़ता देख इससे जुड़े कई सोशल मीडिया अकाउंट बैन किए गए और कार्रवाई भी हुई। इसके बाद सोशल मीडिया की फ्रीडम और कानूनी लड़ाई को लेकर बहस शुरु हो गई। इसके लिए 6 जून को बड़ी संख्या में छात्र इस बहस के समर्थन में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंच गए। देश के कई शहरों में प्रदर्शन होने शुरु हो गए। कई कॉलेज और स्वयंसेवकों ने मिलकर चर्चा और सभाएं करना शुरु कर दिया। इसमें सबसे बड़ा बदलाव 20 जून को हुआ, जब छात्र बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पर पहुंच गए। हालांकि पुलिस ने प्रदर्शन खत्म होने के बाद वहां से हटने को कहा, लेकिन छात्र वहां डटे रहे।
आम जनता तक पहुंची आवाज
जंतर-मंतर से छात्रों ने जाने से साफ इंकार कर दिया। देखते ही देखते एक दिन में खत्म होने वाला प्रदर्शन 36 दिनों के धरना प्रदर्शन में बदल गया। इसमें कई वामपंथी छात्रों के संगठन ने हिस्सा लेना शुरु कर दिया। इनमें AISA, AISF, SFI, KYS के नाम शामिल हैं। उन्होंने छात्रों के लिए भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं का इंतजाम किया। इसमें सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 28 जून को सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक इस आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए जंतर-मंतर पर पहुंचे। इससे प्रदर्शनकारियों को काफी हिम्मत मिली। उन्होंने 6 छात्र कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर भूख हड़ताल का ऐलान किया। इसके बाद यह आंदोलन छात्रों से निकलकर आम जनता तक पहुंचने लगा। बड़ी संख्या में पेरेंट्स, टीचर, शिक्षाविद, रिटायर्ड अधिकारी, वकील जंतर-मंतर पर पहुंचने लगे। इस दौरान भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक और बाकी लोगों के बारे में हर रोज की जानकारी लोगों के लिए अहम हो गई।
जेन-जी ने किया अनोखा विरोध प्रदर्शन
सोनम को 18 जुलाई को पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ गया। छात्रों के साथ कई राजनीतिक पार्टियों ने भी इस पर सवाल उठाना शुरु कर दिया। इसके बाद 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च के दौरान छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं, उनपर आंसू गैस के गोले दागे गए और पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद बड़े स्तर पर देश के अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया। देश के साथ-साथ विदेशों में भी इसे समर्थन मिलने लगा। इस जेन-जी ने विरोध प्रदर्शन का काफी अनोखा तरीका अपनाया। एक ओर पुलिस उन पर लाठियां बरसा रही थी तो दूसरी ओर वो उनसे सेल्फी लेने और फूल देते हुए नजर आते थे। कई लोगों के हाथों में भगत सिंह, डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरों के साथ नजर आए। वहीं कुछ लोग पुलिस की लाठी के सामने राष्ट्रगान गाते हुए दिख रहे थे। आंदोलन के आखिरी हफ्ते में यह काफी बड़ा मुद्दा बन गया था। प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोग अभिजीत दीपके से सोशल मीडिया के माध्यम से जुडे़ और उनका साथ दिया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों ने इसे बड़ी जीत माना और इस तरह एक टिप्पणी से शुरु हुआ कॉकरोच शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पहुंच गया।
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