सेना कमांडरों को रक्षामंत्री ने दी सीख, चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा रहें तैयार

खबर सार :-

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सेना के बीच भारत की ग्लोबल पहचान को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा युद्ध में मारक क्षमता को हमेशा उपयोगी और प्रभावी बनाए रखने के प्रयास करने होंगे।
रक्षामंत्री ने लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन किया लॉन्च, सेना के लिए है खास

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, सेना कमांडरों के सम्मेलन को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संबोधित किया। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को दीर्घकालिक रणनीतिक सोच और उभरती चुनौतियों के संबंध में बोल रहे थे। उनका कहना था कि कभी भी चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर तैयार रहना चाहिए। ऐसी आवश्यकता आपको कभी भी पड़ सकती है। उन्होंने लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन लॉन्च किया और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में उत्कृष्ट सेवा के लिए भारतीय सेना के तीन जवानों को सम्मानित किया। रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध के संबंध में भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। यह जरूरी भी नहीं है।

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दीर्घकालिक रणनीति बनाकर चलना होगा

हालात से परिचित होकर निर्णय लिए जाते हैं। इस बात पर जोर दिया कि सफलता बहु-डोमेन क्षमताओं और संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल पर निर्भर करेगी। बताया कि अगले 20-30 वर्षों के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण बनाकर चलना होगा। समय की ऐसी ही  आवश्यकता है। भारतीय सेना के वरिष्ठ नेतृत्व को नई और उभरती चुनौतियों का तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। बदलती परिस्थितियों के अनुसार हमें भी अपने तरीके और संसाधनों पर समय रहते बदलाव किए करने होंगे।

रक्षामंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने नवीन सोच, बेहतर समन्वय और अत्याधुनिक हथियारों के प्रभावी उपयोग का प्रदर्शन किया। रक्षामंत्री ने सेना कमांडरों से भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रखने के लिए कहा। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों को कई अलग उदाहरण देकर समझाया और कहा कि इसके लिए तैयार रहने का आग्रह किया।  राजनाथ सिंह ने कहा अत्याधुनिक हथियारों की तैनाती ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का कारण बना। उन्होंने इस बार पर बारबार जोर दिया कि आधुनिक ही नहीं बल्कि अत्याधुनिक हथियारों की दिशा में हमें पहल करना होगा। 

अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ रही

राजनाथ सिंह ने कहा कि भले ही वायु, समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ रही हैं, फिर भी थल युद्ध और थल सेना की अहमियत बनी रहेगी। उन्होंने हर युद्ध को आधुनिक कहा और इसके लिए हथियारों की उपयोगिता अत्याधुनिक होना जरूरी बताया। उन्होंने जोर दिया कि सफलता बहु-डोमेन क्षमताओं और संयुक्त अभियानों में बेहतरीन तालमेल पर निर्भर करेगी। यह समझने की जरूरत है कि यदि तीनों सेनाओं में तालमेल बेहतर नहीं बनेगा, तो हम जिस भी क्षेत्र में स्थिर होकर लड़े, संभल पाना मुश्किल होगा।

पाकिस्तान से युद्ध के दौरान आपरेशन सिंदूर में भी सभी मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने एक स्पष्ट संदेश दिया है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा। यह बातें बेहद जरूरी कहीं, हम अपने हथियारों को उनकी मारक क्षमता पहचानें, दुनिया के मुकाबले उनकी ताकत बेहतर है या नहीं? यह सब करते रहना है। हर बदलती परिस्थितियों के अनुरूप जरूरी सुधार लागू करना हमारी समझदारी ही भविष्य की तैयारी है।

 उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत बताई। भारत की जानकारी चीन से पाकिस्तान को मिलती रहती है। उसके पास हमसे कुछ तो बेहतर है। हालांकि रक्षा मंत्री ने रक्षा बलों द्वारा आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमताएं सभी संबंधित पक्षों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं।  

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए

 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मी कमांडरों से जियोपॉलिटिकल और क्षेत्रीय डेवलपमेंट पर करीब से नजर रखने के लिए कहा है। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा है। 23 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में आर्मी कमांडरों के कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने अगले 20-30 सालों के लिए एक लंबे समय के स्ट्रेटेजिक विजन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन से यह संदेश गया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने में हिचकिचाएगा नहीं। 

इससे पहले भी एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने ड्रोन और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर खास ध्यान पर जोर दिया था। उन्होंने स्वदेशी और टिकाऊ हथियारों पर जोर दिया था। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में, डिफेंस प्रोडक्शन बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपए हो गया। डिफेंस एक्सपोर्ट लगभग 38,000 करोड़ रुपए के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया।

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