Bankipur By-election: भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच कांटे की टक्कर, बूथ प्रबंधन पर सबकी नजर

खबर सार :-

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। पूर्व मंत्री नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट रिक्त हुई, जिसके कारण निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव कराने का निर्णय लिया।
Bankipur By-election: भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच कांटे की टक्कर, बूथ प्रबंधन पर सबकी नजर

खबर विस्तार : -

Bankipur By-election: बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार शाम समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों का ध्यान अब बूथ प्रबंधन, घर-घर संपर्क और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की रणनीति पर केंद्रित हो गया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले राजधानी पटना की सड़कों पर सोमवार और मंगलवार को चुनावी माहौल पूरी तरह चरम पर दिखाई दिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का अंतिम प्रयास किया।

30 जुलाई को होगा मतदान

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में भाजपा और राजद ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करते हुए भव्य रोड शो निकाले। दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की। वहीं जन सुराज के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग मोहल्लों और वार्डों में घर-घर संपर्क अभियान चलाकर लोगों से अपने पक्ष में मतदान की अपील की। चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद अब सभी दलों की रणनीति बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने की रहेगी।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होगा। जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित कराने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से निर्धारित समय पर मतदान केंद्र पहुंचकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाने की अपील की है।

इस उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीति का संकेत देने वाला महत्वपूर्ण मुकाबला भी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव का असर आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि सभी प्रमुख दलों ने इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।

हर कीमत पर सीट बचाना चाहती है बीजेपी

भाजपा ने इस हाई-प्रोफाइल सीट से नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी का लक्ष्य लंबे समय से अपने कब्जे वाली इस सीट को सुरक्षित रखना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं ने लगातार चुनाव प्रचार कर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। भाजपा ने अपने अभियान में विकास कार्यों, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा संगठन की मजबूती को प्रमुख मुद्दा बनाया।

प्रशांत किशोर बनाया त्रिकोणीय मुकाबला

दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को एक बार फिर मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव पिछले दो दिनों से लगातार चुनावी सभाएं और जनसंपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं। राजद इस चुनाव को राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। पार्टी का दावा है कि जनता बदलाव चाहती है और इसका असर मतदान में दिखाई देगा।

इस उपचुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण जन सुराज के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर हैं, जो पहली बार स्वयं चुनावी मैदान में उतरे हैं। उनकी उम्मीदवारी ने मुकाबले को पारंपरिक भाजपा-राजद की सीधी लड़ाई से निकालकर त्रिकोणीय बना दिया है। प्रशांत किशोर लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाते हुए खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका दावा है कि बिहार की राजनीति में नई सोच और नई व्यवस्था की जरूरत है तथा जन सुराज इसी दिशा में काम कर रहा है।

भाजपा इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, जबकि राजद इसे सत्ता पक्ष के खिलाफ जनसमर्थन का प्रतीक बनाने की कोशिश में है। वहीं जन सुराज इस चुनाव के जरिए राज्य की राजनीति में अपनी संगठनात्मक ताकत और जनस्वीकृति का परीक्षण कर रही है।

कार्यकर्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारियां

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस बार का मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है। भाजपा को अपने पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा है, जबकि राजद सामाजिक समीकरणों और विपक्षी मतों के ध्रुवीकरण की उम्मीद कर रही है। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की सक्रियता ने युवा मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के बीच नई चर्चा पैदा की है, जिससे चुनावी गणित पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है।

चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद अब सभी दलों का पूरा फोकस बूथ प्रबंधन, मतदान प्रतिशत बढ़ाने और समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर रहेगा। कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और अंतिम चरण की रणनीति लागू की जा रही है। अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बांकीपुर की जनता इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में किस उम्मीदवार पर भरोसा जताती है।

उपचुनाव का परिणाम 3 अगस्त को मतगणना के बाद घोषित किया जाएगा। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि भाजपा अपना मजबूत गढ़ बचाने में सफल रहती है, राजद सत्ता पक्ष को बड़ा राजनीतिक संदेश देने में कामयाब होती है या फिर प्रशांत किशोर की अगुवाई में जन सुराज बिहार की राजनीति में नया अध्याय लिखने की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करती है।

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