E20 Petrol Policy: अरविंद केजरीवाल पीएम आवास तक करेंगे मार्च, जनता की याचिका सौंपने की तैयारी

खबर सार :-

आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल E20 पेट्रोल नीति के विरोध में 100 कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करेंगे। उन्होंने जनता की याचिका सौंपने और प्रधानमंत्री से चर्चा की मांग की है।
E20 पेट्रोल नीति के विरोध में पीएम आवास तक मार्च करेंगे अरविंद केजरीवाल

खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई-20 पेट्रोल नीति के विरोध में मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के करीब 100 कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ प्रधानमंत्री आवास पहुंचने का प्रयास करेंगे और प्रधानमंत्री के नाम तैयार की गई ऑनलाइन याचिका तथा जनता के पत्र सौंपेंगे। केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री उनसे मुलाकात करेंगे और ई-20 पेट्रोल को लेकर लोगों की चिंताओं को सुनेंगे। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाना है।

ऑनलाइन याचिका को मिले 2.33 लाख से ज्यादा समर्थन

अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि ई-20 पेट्रोल नीति के खिलाफ शुरू किए गए ऑनलाइन अभियान को कुछ ही दिनों में 2,33,238 लोगों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा याचिका पर हस्ताक्षर किया जाना इस नीति को लेकर जनता की चिंता को दिखाता है। केजरीवाल के अनुसार, वह मंगलवार दोपहर 12 बजे आम आदमी पार्टी मुख्यालय से प्रधानमंत्री आवास के लिए रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।

प्रधानमंत्री से चर्चा की मांग

केजरीवाल ने कहा कि अब वह खुद प्रधानमंत्री आवास जाकर जनता की ओर से तैयार किए गए पत्र और याचिका सौंपने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा करना चाहते हैं और सरकार से ई-20 नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिना पर्याप्त वैज्ञानिक और तकनीकी स्पष्टीकरण दिए देश में ई-20 पेट्रोल लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

गाड़ियों की माइलेज और तकनीकी समस्याओं का उठाया मुद्दा

AAP संयोजक ने दावा किया कि ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कई वाहन मालिकों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि इस ईंधन के कारण कुछ गाड़ियों की माइलेज प्रभावित होने और तकनीकी समस्याओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास ई-20 नीति के समर्थन में मजबूत वैज्ञानिक आधार और तर्क हैं तो उन्हें सार्वजनिक मंच पर रखा जाना चाहिए, ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके।

विरोध करने वालों पर दबाव का आरोप

केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि ई-20 नीति के खिलाफ सवाल उठाने वाले लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और आम नागरिकों द्वारा इस मुद्दे पर आवाज उठाने पर उन्हें ट्रोल किया जाता है और कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज किए जाने की बातें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इससे लोगों में डर का माहौल पैदा हो रहा है और लोकतांत्रिक तरीके से सवाल पूछने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

ई-20 विरोधी टाउनहॉल का किया जिक्र

अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में आयोजित ई-20 विरोधी टाउनहॉल कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस कार्यक्रम को लोगों का व्यापक समर्थन मिला। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए, जबकि लाखों लोगों ने इसे ऑनलाइन देखा। उन्होंने इसे ई-20 नीति को लेकर जनता में बढ़ रही चिंता और विरोध का संकेत बताया।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ई-20 नीति को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति के पीछे कोई "छिपा हुआ एजेंडा" हो सकता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत में इथेनॉल नीति को किसी बाहरी दबाव के कारण तेजी से लागू किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर इथेनॉल आयात की संभावना है और केंद्र सरकार को इस विषय पर देश के सामने स्पष्ट जानकारी रखनी चाहिए।

कल E20 के विरोध में जनता के पत्रों के साथ PM आवास तक मार्च | महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता | LIVE https://t.co/CrJDl1gBpn

— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 3, 2026

शांतिपूर्ण मार्च का दावा

आम आदमी पार्टी ने कहा है कि मंगलवार को होने वाला मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। पार्टी के अनुसार, इसका उद्देश्य किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन कर व्यवस्था बाधित करना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री तक जनता की चिंताओं और मांगों को पहुंचाना है। ई-20 पेट्रोल नीति को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस लगातार जारी है। अब केजरीवाल के प्रधानमंत्री आवास मार्च के ऐलान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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