अखिलेश यादव ने साधा केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा- 'बीमारी ROOT में, इलाज FRUIT का हो रहा है'

खबर सार :-

NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 26 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार के लिखित आश्वासन के बाद भूख हड़ताल समाप्त कर दी। इस पर अखिलेश यादव समेत समाजवादी पार्टी के नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई।
अखिलेश यादव ने साधा केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा- 'बीमारी ROOT में, इलाज FRUIT का हो रहा है'

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की मूल समस्या का समाधान किए बिना केवल ऊपर-ऊपर के उपायों से हालात नहीं बदलेंगे।

अखिलेश यादव का बीजेपी पर तीखा हमला

अखिलेश यादव ने अपने एक्स पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) में लिखा, "जब बीमारी ROOT में है तो FRUIT के इलाज से कोई नहीं माननेवाला। देश में हर समस्या की एक ही जड़ है, जो गई अड़ है: नाम तो सुना होगा ‘BJP’। NO FAST TRACK; BJP GO BACK!"

अखिलेश यादव इससे पहले भी सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर चुके थे। उन्होंने कहा था कि जीवन बेहद मूल्यवान है और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखने के लिए स्वस्थ रहना जरूरी है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों को लेकर एक बड़े फैसले का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए देश भर में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, ताकि जिम्मेदार लोगों को जल्द और कड़ी सजा मिल सके। प्रधानमंत्री ने संबंधित विभागों को इस दिशा में जरूरी कदम उठाने का भी निर्देश दिया। एक सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य और भलाई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। 

उन्होंने लिखा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के सपनों पर सीधा हमला हैं और सरकार यह पक्का करेगी कि ऐसे मामलों में न्याय में देरी न हो। इसके लिए, तेजी से ट्रायल और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल कोर्ट बनाए जाएंगे। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि पेपर लीक को रोकने के लिए जल्द ही एक नया और ज्यादा सख्त कानूनी ढांचा पेश किया जा सकता है। प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद, विपक्ष ने सरकार की मंशा और अब तक की गई कार्रवाई पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव के ताजा बयान को इसी राजनीतिक टकराव को आगे बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार ने किन मांगों पर दिया आश्वासन?

सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार के साथ दो दिनों तक लगातार बातचीत हुई, जिसके बाद उन्हें लिखित रूप में कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए। इन्हीं आश्वासनों के आधार पर उन्होंने अपना आंदोलन स्थगित किया।

सरकार की ओर से जिन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी, उनमें शामिल हैं—

प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराई जाएगी।
पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।
हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और व्यापक शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना जताई गई है।

राम गोपाल यादव ने कहा अनशन का किया विरोध

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी कभी भी आमरण अनशन की राजनीति के पक्ष में नहीं रही है। उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया हमेशा आमरण अनशन का विरोध करते थे। उनका मानना था कि आंदोलन जारी रहना चाहिए, लेकिन जीवन की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। यदि क्रमवार अनशन किया जाए तो आंदोलन लंबा चल सकता है। समाजवादी पार्टी हमेशा इसी विचारधारा का समर्थन करती रही है।" राम गोपाल यादव ने यह भी कहा कि विपक्ष अपनी मांगों पर कायम है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पहले से कहीं अधिक है।

अवधेश प्रसाद ने क्या कहा?

समाजवादी पार्टी के MP अवधेश प्रसाद ने भी सोनम वांगचुक के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने पहले ही उनसे अनशन खत्म करने की रिक्वेस्ट की थी। उन्होंने कहा कि हमारे नेता ने कहा था कि ज़िंदगी बहुत कीमती है। महात्मा गांधी ने अनशन को डेमोक्रेटिक लड़ाई का हथियार बनाया था, लेकिन मौजूदा सरकार पर इसका मनचाहा असर नहीं हो रहा है। इसलिए, हमने उनसे अपनी सेहत को प्राथमिकता देने की अपील की। 

28 जून से शुरू हुआ था आंदोलन

सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका कहना था कि NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सामने आई कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने सरकार से पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की थी। इस दौरान विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों के कई नेताओं ने उनके आंदोलन का समर्थन किया।

क्या थीं सोनम वांगचुक की प्रमुख मांगें?

सोनम वांगचुक ने आंदोलन के दौरान सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना और पेपर लीक से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देना शामिल था। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना छात्रों का भरोसा बहाल नहीं किया जा सकता।

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