NCD का बढ़ता खतरा: पेट की चर्बी, हाई BP और खराब लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह

खबर सार :-

NCD का बढ़ता खतरा केवल स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए चिंता का विषय है। भारत में बढ़ा ब्लड प्रेशर, ओवरवेट, पेट की चर्बी, शारीरिक निष्क्रियता और तंबाकू सेवन जैसे जोखिम व्यापक हैं। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, तंबाकू-शराब से दूरी और समय पर स्वास्थ्य जांच अपनाकर गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
NCD का बढ़ता खतरा, पेट की चर्बी और हाई BP से रहें सावधान

खबर विस्तार : -

Metabolic risk: गैर-संचारी रोग यानी NCD आज भारत के सामने स्वास्थ्य संबंधी बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी बीमारियों का संबंध कई ऐसे जोखिम कारकों से है, जो सीधे हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली से जुड़े हैं। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन, तंबाकू और शराब का सेवन इन बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली और समय पर जांच बेहद जरूरी हो जाती है।

बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर बड़ी चिंता

भारत में वयस्क आबादी के बीच NCD से जुड़े जोखिम कारकों का आकलन राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग निगरानी सर्वेक्षण (NNMS) 2017-18 के तहत किया गया था। इसमें 18 से 69 वर्ष की उम्र के वयस्कों को शामिल किया गया। सर्वे के आंकड़ों ने देश में मेटाबॉलिक जोखिम कारकों की गंभीर तस्वीर सामने रखी। सर्वे के अनुसार, 28.5 प्रतिशत वयस्कों का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ पाया गया। वहीं, 9.3 प्रतिशत लोगों में ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ा हुआ था। ये दोनों स्थितियां लंबे समय तक बनी रहने पर हृदय रोग समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती हैं।

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हर चौथा वयस्क ओवरवेट

बढ़ता वजन भी NCD के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। सर्वे में 26.1 प्रतिशत वयस्क ओवरवेट पाए गए, जबकि 6.2 प्रतिशत लोग मोटापे से प्रभावित थे। इससे भी अधिक चिंता की बात यह रही कि 32.2 प्रतिशत वयस्कों में सेंट्रल ओबेसिटी यानी पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी पाई गई। पेट के आसपास जमा वसा को मेटाबॉलिक बीमारियों के बढ़ते जोखिम से जोड़ा जाता है। इसलिए केवल शरीर का कुल वजन ही नहीं, बल्कि कमर के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी पर भी ध्यान देना जरूरी है।

तंबाकू और शराब भी बढ़ा रहे जोखिम

NCD का खतरा केवल वजन या ब्लड प्रेशर तक सीमित नहीं है। सर्वे में 32.8 प्रतिशत वयस्क तंबाकू का सेवन करते पाए गए, जबकि 15.9 प्रतिशत लोगों ने शराब के सेवन की जानकारी दी। तंबाकू और अत्यधिक शराब का सेवन स्वास्थ्य पर लंबे समय तक नकारात्मक असर डाल सकता है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि NCD की रोकथाम के लिए सिर्फ दवाओं और अस्पतालों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। जोखिम कम करने के लिए लोगों को अपनी रोजमर्रा की आदतों में भी बदलाव करना होगा।

41% से ज्यादा लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय

शारीरिक सक्रियता की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। सर्वे के अनुसार, 41.3 प्रतिशत वयस्क शारीरिक रूप से निष्क्रिय पाए गए। यानी बड़ी संख्या में लोग अपनी दिनचर्या में पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे थे। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन नियंत्रित रखने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसलिए लंबे समय तक बैठे रहने की आदत कम करना और रोजाना सक्रिय रहने की कोशिश करना जरूरी है।

फल-सब्जियों की खपत बेहद कम

खानपान से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। करीब 98.4 प्रतिशत वयस्क रोजाना पांच सर्विंग या लगभग 400-500 ग्राम से कम फल और सब्जियां खा रहे थे। इसके अलावा आबादी में औसत नमक सेवन करीब 8 ग्राम प्रतिदिन पाया गया। संतुलित आहार में फल, सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों की पर्याप्त मात्रा शामिल करना जरूरी है। वहीं, अधिक नमक, तला-भुना और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन सीमित करने से स्वास्थ्य जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

10 साल में हृदय रोग का भी खतरा

सर्वे में 40 से 69 वर्ष की उम्र के वयस्कों में हृदय रोग के जोखिम का भी आकलन किया गया। इसमें करीब 12.8 प्रतिशत लोगों में अगले 10 वर्षों में हृदय रोग का जोखिम 30 प्रतिशत या उससे अधिक पाया गया या वे पहले से हृदय रोग से प्रभावित थे। विशेषज्ञों के अनुसार, जोखिम कारकों की समय पर पहचान और उनमें सुधार से गंभीर बीमारियों की आशंका को कम किया जा सकता है। ब्लड प्रेशर और ब्लड ग्लूकोज की नियमित जांच, वजन पर नियंत्रण, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और संतुलित खानपान इस दिशा में अहम कदम हैं।

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