कैल्शियम और विटामिन डी का कॉम्बो रीढ़ की हड्डी के लिए संजीवनी, जानें दोनों को साथ लेना क्यों जरूरी?
खबर सार :-
कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से जोड़ों के दर्द की शिकायत आम है। रीढ़ की हड्डी और जोड़ों से जुड़े विकारों के लिए सिर्फ कैल्शियम ही जिम्मेदार नहीं है। कैल्शियम और विटामिन डी मिलकर हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। कैल्शियम और विटामिन डी को प्राकृतिक स्रोतों से लेना ज्यादा अच्छा होता है। कैल्शियम के लिए दूध, दही, अंडा, पनीर, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियां, चना, सत्तू और रागी का सेवन, विटामिन डी के लिए सुबह की धूप फायदेमंद होती है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली : अक्सर आप या आपके पास मौजूद लोग रीढ़ की कमजोरी और जोड़ों के दर्द की शिकायत करते हैं। स्थिति गंभीर होने पर गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस, बर्साइटिस, अर्थराइटिस और पेजेट रोग होने लगते हैं। इन परिस्थितियों में डॉक्टर सर्जरी या लंबे इलाज की बात कहता है।
आमतौर पर यही समझा जाता है कि कैल्शियम की कमी की वजह से हड्डियों से रोग होते हैं, जो सही भी है, लेकिन जो लोग बचपन से दूध और दही का सेवन करते आ रहे हैं, ऐसे लोगों में भी रीढ़ की हड्डी और जोड़ों से जुड़े विकार देखे जाते हैं। अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों?
रीढ़ की हड्डी, जोड़ों से जुड़े विकार के लिए सिर्फ कैल्शियम अकेला जिम्मेदार नहीं
रीढ़ की हड्डी और जोड़ों से जुड़े हर विकार के लिए सिर्फ कैल्शियम अकेला जिम्मेदार नहीं है। कैल्शियम और विटामिन डी मिलकर ही रीढ़ की हड्डी और जोड़ों को मजबूत बनाने का काम करते हैं। हमारी रीढ़ की हड्डी में 32 बॉक्स बने होते हैं, जो एक तरल पदार्थ साइनोवियल द्रव के जरिए जुड़े होते हैं।
रीढ़ की हड्डी को अस्थि मज्जा मजबूती देने का काम करती है। हड्डियों के भीतर गहराई से कैल्शियम और फास्फोरस को पहुंचाती है। हड्डियों में कैल्शियम का अवशोषण तभी अच्छे से हो पाता है, जब विटामिन डी अच्छी मात्रा में मौजूद हो।
कैल्शियम, विटामिन डी को सप्लीमेंट की जगह प्राकृतिक स्रोतों से लेना होता है ज्यादा अच्छा
अगर विटामिन डी शरीर के भीतर नहीं है, तो अच्छा आहार और दवाएं भी शरीर में नहीं लगते हैं। विटामिन डी सूरज की रोशनी से बनने वाला एक विटामिन है, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को 40-50 फीसदी तक बढ़ा देता है। दोनों का संयुक्त मेल रीढ़ की हड्डी से लेकर जोड़ों के विकारों से निपटने के लिए रामबाण तरीका है।
कैल्शियम और विटामिन डी को सप्लीमेंट से ज्यादा प्राकृतिक स्रोतों से लेना ज्यादा अच्छा होता है। कैल्शियम के लिए दूध, दही, अंडा, पनीर, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियां, चना, सत्तू और रागी का सेवन करना चाहिए, जबकि विटामिन डी के लिए सुबह की धूप में कुछ वक्त रहें।
मांसपेशियों में होने वाली अकड़न को भी कम करता है विटामिन डी
विटामिन डी मांसपेशियों में होने वाली अकड़न को भी कम करता है और गले और कंधे में होने वाले दर्द से भी राहत दिलाता है। वहीं, विटामिन डी की कमी हड्डियों को मुलायम और कमजोर बनाती है, जिससे जोड़ों का साइनोवियल द्रव भी हड्डियों के ऊपर चिपकने लगता है और हड्डियां क्षीण होने लगती हैं। साइनोवियल द्रव की कमी से जोड़ों के दर्द की समस्या रहती है और परिस्थिति ज्यादा खराब होने पर घुटनों का ऑपरेशन भी करना पड़ जाता है।
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