बांग्लादेश की जेलों में 407 विदेशी नागरिक बंद, 172 सजा पूरी, 168 भारतीयों को वतन वापसी का इंतजार

खबर सार :-

बांग्लादेश की विभिन्न जेलों में 15 देशों के 407 नागरिक बंद हैं। इनमें 172 ऐसे कैदी हैं, जो सजा पूरी कर चुके हैं या रिहाई के योग्य हैं, लेकिन स्वदेश वापसी की औपचारिकताएं पूरी नहीं होने से उनकी रिहाई अटकी हुई है। भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है।
बांग्लादेश की जेलों में 407 विदेशी कैदी, 172 की सजा पूरी

खबर विस्तार : -

ढाका: बांग्लादेश की जेलों में बंद विदेशी नागरिकों की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया में देरी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। जेल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, देश की विभिन्न जेलों में 15 देशों के करीब 407 नागरिक बंद हैं। इनमें 172 लोग सजा पूरी कर चुके हैं या रिहाई के योग्य हैं, लेकिन संबंधित देशों से मंजूरी और वापसी संबंधी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण अब तक जेलों से बाहर नहीं आ सके हैं। इस सूची में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा है।

भारतीय नागरिक सबसे अधिक, 168 की सजा पूरी

अंग्रेजी दैनिक द डेली स्टार की जेल विभाग के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की जेलों में 238 भारतीय नागरिक बंद हैं। इनमें से 168 अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन भारत वापसी की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण हिरासत में हैं। विदेशी कैदियों की सूची में म्यांमार के नागरिक दूसरे स्थान पर हैं। जेल विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कुल विदेशी कैदियों में 44 को दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि 191 के मामले अभी विचाराधीन हैं। इनमें किसी भी दोषी को मृत्युदंड नहीं दिया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में इन श्रेणियों के अलावा अन्य कैदियों की स्थिति का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

म्यांमार के 133 नागरिक भी जेलों में बंद

बांग्लादेश की जेलों में म्यांमार के 133 नागरिक बंद हैं। इनमें 33 को दोषी करार दिया जा चुका है, जबकि एक नागरिक स्वदेश लौटने की प्रतीक्षा कर रहा है। अन्य विदेशी कैदियों में नाइजीरिया के छह, पाकिस्तान और मलेशिया के तीन-तीन तथा तंजानिया और पेरू के दो-दो नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा जॉर्जिया, बहामास, बेलारूस, गुयाना, कांगो, इथियोपिया और थाईलैंड का एक-एक नागरिक जेल में बंद है। जेल अधिकारियों के अनुसार, इन लोगों को मादक पदार्थों और सोने की तस्करी, धोखाधड़ी, अमेरिकी डॉलर के अवैध कारोबार, पासपोर्ट संबंधी अपराध, अवैध वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) कारोबार और मानव तस्करी जैसे मामलों में गिरफ्तार किया गया था।

मंजूरी और नागरिकता सत्यापन से अटकी वापसी

जेल विभाग के जेलर (मीडिया एवं लॉजिस्टिक्स) मसूद हसन ज्वेल ने बताया कि संबंधित देशों से जरूरी मंजूरी नहीं मिलने के कारण विदेशी कैदियों की स्वदेश वापसी नहीं हो पा रही है। जेल प्रशासन इस समस्या से गृह मंत्रालय को अवगत करा रहा है। कैदियों के नाम, पते और उपलब्ध अन्य जानकारियां ढाका स्थित संबंधित देशों के दूतावासों को भेजी गई हैं। विदेश मंत्रालय के माध्यम से भी संपर्क किया गया है, लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है। भारतीय नागरिकों की पहचान और उनकी वापसी के मामले में भी कई स्तरों पर प्रक्रिया जारी है। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के कांसुलर विंग के एक अधिकारी के अनुसार, 25 भारतीय नागरिकों की पहचान की गई है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और अब भारत लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भारतीय मिशन ने विदेश मंत्रालय से उनकी वापसी की प्रक्रिया तेज करने और संभावित वापसी की तारीखों की जानकारी पहले से देने का अनुरोध किया है, ताकि संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर आवश्यक व्यवस्थाएं की जा सकें।

121 कैदियों की नागरिकता की पुष्टि बाकी

भारतीय उच्चायोग के अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने 121 ऐसे कैदियों की सूची भी साझा की है, जिनके भारतीय नागरिक होने और सजा पूरी करने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इनमें से अधिकांश लोगों के संबंध में उपलब्ध विवरण उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उच्चायोग ने ऐसे कैदियों तक राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, जिनकी नागरिकता सत्यापित करने के लिए अतिरिक्त जानकारी चाहिए। अधिकारी के मुताबिक, कुछ मामलों में जरूरी विवरण उपलब्ध हैं, लेकिन सत्यापन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इस संबंध में भारतीय मिशन विदेश मंत्रालय के जवाब का इंतजार कर रहा है।

जेल प्रशासन पर बढ़ रहा आर्थिक और सुरक्षा संबंधी दबाव

जेल अधिकारियों का कहना है कि सजा पूरी होने के बाद भी विदेशी नागरिकों के लंबे समय तक हिरासत में रहने से प्रशासनिक कठिनाइयां बढ़ती हैं और जेलों पर अतिरिक्त खर्च पड़ता है। सुरक्षा संबंधी कारणों से इन कैदियों को अलग-अलग कोठरियों में रखा जाता है। उनके वार्ड की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाती है। म्यांमार के नागरिकों की वापसी के मामले में भी प्रगति का इंतजार है। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में म्यांमार के दूतावास से प्रतिक्रिया लेने के लिए ईमेल के जरिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में संबंधित देशों के साथ समन्वय और कैदियों की नागरिकता की पुष्टि स्वदेश वापसी की प्रक्रिया के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। 

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