बांग्लादेश में हिंदू आस्था पर हमला: देवीदुर्गा की मूर्तियों पर ताबड़तोड़ प्रहार

खबर सार :-

बांग्लादेश में एक बार फिर संख्या बल और कट्टरवादी सोच उजागर हुई है। यहां दुर्गा पूजा के लिए पंडाल में रखी गई सात मूर्तियां तोड़ डालीं।
बांग्लादेश के तंगेल में दुर्गा पंडाल की सात मूर्तियां तोड़ीं

खबर विस्तार : -


ढाका, बांग्लादेश की सरकार बन चुकी है। यह नए सिद्धांतों पर काम कर रही है, लेकिन हिंदुओं और उनकी आस्था पर प्रहार करना नहीं बंद हुआ है। पिछले दिन भी तंगेल जिले के मिर्जापुर उप जिला स्थित जमुर्की पश्चिमपाड़ा में एक हिंदू मंदिर में दुर्गा पंडाल के लिए बनाई जा रही सात मूर्तियों को तोड़ दिया गया। इस कृत्य पर कानून मौन है।

देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर हमले किए गए

बांग्लादेश में यह पहला अवसर नहीं है, इससे पहले कई बार देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर हमले किए गए हैं। यह तो छोटी घटना मानकर कार्रवाई नहीं की जा रही है। मंदिरों में साधुओं की हत्या कर दी गई। साधुओं पर गलत मुकदमे चलाकर उनको जेल में ठूस दिया गया। असामाजिक तत्वों ने मंर्ति तोड़कर खंडित कर दिया। मंदिर अधिकारियों और पुलिस के अनुसार, यह घटना बुधवार रात और गुरुवार तड़के के मध्य की बताई जा रही है। इस घटना को दबा दिया गया था। 

द डेली स्टार की रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि स्थानीय लोगों ने बताया कि जमुर्की आर्य समिति के तत्वावधान में लगभग 85 वर्ष से मंदिर में दुर्गा पूजा मनाई जाती रही है। हमेशा तरह ही यहां उत्सव की तैयारी चल रही थी। कलाकार और आयोजक सात मूर्तियां तैयार कर चुके थे। इनमें केवल पेंटिंग बाकी रह गई थी। यहां इस तरह का भव्य आयोजन और नहीं किया जाता है। जमुर्की आर्य समिति के अध्यक्ष प्रकाश बकाली ने कहा का कहना है कि बुधवार की रात 9 बजे तक मंदिर में ही थे।

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दो सालों से यहां यही माहौल चल रहा

उनके घर जाने के बाद मूर्तियों पर हमला किया गया है। आयोजक जब सुबह मंदिर लौटे, तो उनको मूर्तियां खंडित मिलीं। घटना की जानकारी उन्होंने पुलिस को भी दी है, लेकिन अभी तक इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई है। यहां का पिछले दो सालों से यही अराजक माहौल बन गया है। हिंदुओं पर हमला और मंदिरों पर हमला नीयति बन चुकी है। सरकार में बैठे हुए लोगों में उनकी भावनानुसार काम किया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों पहले यूनुस के समय यह तेज हुआ था।

उनके कार्यकाल में माहौल खराब हुआ था, वह आज भी चल रहा है। इस घटना के बाद तंगेल के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद शम्सुल आलम सरकार के साथ कई पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे थे। हिंदू समुदाय के सदस्यों को आश्वासन दिया था कि अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की हिंसा फैलाने की कोशिश वालों पर कार्रवाई नहीं किए जाने से स्थानीय हिंदू समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।

संत चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग 

इससे पहले चिन्मय दास की रिहाई नहीं किए जाने से यहां की सरकार और कानून पर सवाल अंतराराष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे हैं। न्यूज एज बांग्लादेश की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को भारत के कोलकाता में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के पास लगभग 99 लोगों के एक समूह ने विरोध प्रदर्शन किया। वे हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग कर रहे थे। वह 2024 से बांग्लादेश की जेल में बंद हैं। उन पर कई गंभीर आरोप भी हैं।

बांग्लादेश का कानून खुद सवालों में घिरा है, यहां की न्याय व्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वकीलों ने सवाल खड़े किए थे। कहा जाता है कि जिस अपराध में चिन्मय को जेल में रखा गया है, वह उससे पहले से जेल में हैं। यही नहीं, अदालत को यह जानकारी है, इसके बाद भी चिन्मय को जमानत नहीं दी। चिन्मय की मां बीमार थीं। उनकी मौत हो गई। अदालत ने जमानत न देने के और भी कारण बताए। 

भारत में मूर्तियां तोड़े जाने की निंदा हुई

प्रदर्शनकारियों ने विवेकानंद मिशन सेवा प्रतिष्ठान और नेशनल सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया के बैनर तले एक जुलूस भी निकाला। इसमें सियालदह रेलवे स्टेशन से बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन तक की दूरी तय की गई। यहां पांच प्रतिनिधियों को चांसरी तक ले भी गई। जहां चांसरी के प्रमुख और दूसरे सचिव ने ज्ञापन स्वीकार किया।

प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश सरकार से दुर्गा पूजा और उसके बाद भी हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया, साथ ही न्याय और चिन्मय कृष्ण दास की जल्द रिहाई की मांग की। बांग्लादेश में नई सरकार से हिंदुओं को बड़ी उम्मीद है कि वह न्याय व्यवस्था पर काम करे। अंतरारष्ट्रीय स्तर पर उसकी काफी किरकिरी हो चुुकी है। भारत में भी इसका विरोध किया गया। खुद यहां की पूर्व की सरकार में मंत्री और विधायकों ने उस दौर को हिंसा का दौर कहा है, जिसमें यूनुस ने काम संभाला था। 

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