यूपी पुलिस और एएनटीएफ का मादक पदार्थों के तस्करों पर बड़ा प्रहार: वर्ष 2029 तक नशा मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश पुलिस और ANTF द्वारा मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान की जानकारी। जानें पीआईटी एनडीपीएस एक्ट और संपत्ति जब्तीकरण के आंकड़े।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: भारत सरकार ने साल 2029 तक भारत को पूरी तरह नशा मुक्त (नशे से आज़ाद) बनाने का संकल्प लिया है। इसी को ध्यान में रखते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) के नेतृत्व में पूरे राज्य में अवैध नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ एक बड़ा और सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और उत्तर प्रदेश पुलिस मिलकर नशे के अवैध कारोबार में बार-बार शामिल रहने वाले अपराधियों पर लगातार शिकंजा कस रही है, ताकि इस आपराधिक नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत निरुद्ध कार्रवाई में तेज वृद्धि
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए राज्य में पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अभ्यस्त अपराधियों को बिना जमानत के हिरासत में रखने की कार्रवाई तेजी से की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में पूरे प्रदेश में कुल 07 अभ्यस्त तस्करों के विरुद्ध यह कार्रवाई की गई थी, जिसमें से 05 मामलों में एएनटीएफ की मुख्य भूमिका रही। इसके बाद वर्ष 2025 में कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए कुल 19 तस्करों को निरुद्ध किया गया, जिनमें से 15 अकेले एएनटीएफ द्वारा पकड़े गए। वर्ष 2026 (23 सितंबर तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) यह संख्या बढ़कर 71 पहुंच चुकी है, जो वर्ष 2024 की तुलना में दस गुना से अधिक की वृद्धि को दर्शाती है। इनमें अकेले उत्तर प्रदेश पुलिस ने 38 और एएनटीएफ ने 33 तस्करों के विरुद्ध निरुद्धीकरण की कार्रवाई की है।
इस अभियान के तहत प्रदेश के कई कुख्यात और शातिर मादक पदार्थों के तस्करों को चिन्हित कर उनके अवैध नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन प्रमुख अपराधियों के खिलाफ निरुद्धीकरण की यह सख्त कार्रवाई की गई है, उनमें गुरुमेल सिंह, भोला प्रसाद, संजीव राणा, विभोर राणा, शेषमणि पटेल और परमानन्द उर्फ पप्पू जैसे नाम शामिल हैं। इन अपराधियों के जेल में बंद होने से मादक पदार्थों के अवैध नेटवर्क को भारी आघात पहुंचा है।
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अवैध संपत्ति जब्तीकरण अभियान और वित्तीय प्रहार
तस्करों की कमर तोड़ने के लिए सिर्फ गिरफ्तारी या नजरबंदी ही नहीं, बल्कि उनकी अवैध कमाई पर भी लगातार कानूनी चाबुक चलाया जा रहा है। एनडीपीएस एक्ट की धारा 68(E) और 68(F) के प्रावधानों के अंतर्गत मादक पदार्थों के अवैध व्यापार से कमाई गई संपत्ति को पहले अस्थायी रूप से फ्रीज किया जाता है और फिर कानूनी प्रक्रिया के बाद स्थायी रूप से जब्त कर लिया जाता है। वर्ष 2024 में एएनटीएफ द्वारा कुल 04 प्रकरणों में लगभग 01 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई थी।
वर्ष 2025 में यह दायरा और व्यापक हुआ, जिसमें कुल 29 प्रकरणों के माध्यम से लगभग 19 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इसमें एएनटीएफ ने 28 प्रकरणों में लगभग 17 करोड़ रुपये की कार्रवाई की। इसके बाद वर्ष 2026 (23 सितंबर तक) में यह अभियान अपने चरम पर पहुंच गया, जब कुल 69 मामलों में लगभग 80 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई। इस वर्ष यूपी पुलिस ने 38 प्रकरणों में और एएनटीएफ ने 50 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए कुल लगभग 78.5 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति को सरकार के पक्ष में जब्त करने की प्रक्रिया पूरी की है। यह आंकड़ा वर्ष 2024 की तुलना में लगभग 80 गुना की भारी वृद्धि को दर्शाता है।
नीति और अधिकारियों का दृष्टिकोण
एन्टी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और उत्तर प्रदेश पुलिस इस अवैध कारोबार के प्रति 'शून्य-सहनशीलता' (जीरो टॉलरेंस) की नीति पर काम कर रही है। पुलिस महानिदेशक स्वयं इस अभियान के कार्यों का निकट पर्यवेक्षण कर रहे हैं। इस संबंध में एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है, “नशा युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाता है और परिवारों के साथ समाज को भी खोखला करता है। इसलिए उत्तर प्रदेश पुलिस और ANTF नशे की तस्करी के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। हमारा उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को तोड़ना और नशे के कारोबार से कमाई गई अवैध संपत्ति को जब्त करना भी है। युवाओं और समाज को नशे की ओर धकेलने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। PIT NDPS Act के तहत तस्करों को हिरासत में लेने तथा NDPS Act की धारा 68(E) एवं 68(F) के तहत उनकी अवैध संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई और तेज की जा रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस वर्ष 2029 तक प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में पूरी ताकत से काम करती रहेगी।”
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PIT NDPS Act एवं संपत्ति जब्तीकरण (धारा 68E/F) की कानूनी पृष्ठभूमि
PIT NDPS Act (निरुद्धीकरण): पीआईटी एनडीपीएस एक्ट 1988 (Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1988) का मुख्य उपयोग मादक पदार्थों के अवैध व्यापार में लगातार संलिप्त रहने वाले अभ्यस्त अपराधियों को निवारक हिरासत में जेल के भीतर रखने के लिए किया जाता है। इस कानूनी प्रावधान के तहत ऐसे आदतन तस्करों को बिना सामान्य जमानत के लंबी अवधि के लिए हिरासत में रखा जा सकता है, जो बार-बार नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को संचालित करते हैं।
NDPS Act धारा 68(E) व 68(F) (संपत्ति जब्तीकरण): इस प्रावधान के अंतर्गत मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध गतिविधियों से अर्जित की गई बेनामी या अवैध संपत्तियों को सरकार द्वारा पहले अस्थायी रूप से फ्रीज किया जाता है। इसके पश्चात विधिवत जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन अवैध संपत्तियों को स्थायी रूप से जब्त कर लिया जाता है। इस कानूनी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों के तस्करों को आर्थिक रूप से पूरी तरह कमजोर करना और अपराध से कमाए गए धन को जब्त कर राज्य के नियंत्रण में लेना है।
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