Independence Day: आजादी की लड़ाई से लेकर कारगिल युद्ध तक, ये 5 फिल्में दिखाती हैं भारत के वीर सपूतों की कहानी

खबर सार :-

80th Independence Day: आज पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। हर कोई देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत है। 15 अगस्त के इस खास मौके पर, स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन पर आधारित फिल्में देखने से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।
Independence Day:  ये 5 फिल्में दिखाती हैं भारत के वीर सपूतों की कहानी

खबर विस्तार : -

80th Independence Day Special: देशभर में आज बड़े उत्साह और देशभक्ति के माहौल में 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। हर कोई देशभक्ति के रंग में रंगा हुआ है। यह दिन उन अनगिनत नायकों के बलिदान की याद दिलाता है जिन्होंने देश को आज़ाद कराने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी। भारतीय सिनेमा ने भी समय-समय पर पर्दे पर देशभक्ति को जीवंत किया है।

 बॉलीवुड ने पर्दे पर देशभक्ति को कई तरह से दिखाया है। कुछ जिल्में बॉर्डर पर दुश्मनों से लड़ते सैनिकों की बहादुरी दिखाती हैं, तो कुछ आजादी के लिए अंग्रेजों के ख़िलाज खड़े होने वाले क्रांतिकारियों की कहानियाँ बताती हैं। इन जिल्मों की कहानियां, किरदार और डायलॉग आज भी दर्शकों में देशभक्ति की भावना जगाते हैं। अगर आप इस 15 अगस्त को देशभक्ति वाली जिल्में देखने का प्लान बना रहे हैं, तो ये पांच जिल्में आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह

जब क्रांति की मशाल युवाओं के हाथों में आई, तो भगत सिंह जैसे विचारकों ने देश को एक नई दिशा दी। 'द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह' सिर्फ़ एक बायोपिक नहीं है; यह फ़िल्म भगत सिंह की विचारधारा, उनकी निडरता और उनके अटूट जज़्बे को दिखाती है, जिसके साथ उन्होंने देश के लिए मुस्कुराते हुए फाँसी को गले लगाया।

लगान

आमिर खान की 'लगान' दिखाती है कि कैसे आम ग्रामीण एकजुट होकर अंग्रेज़ों की थोपी गई शर्तों को चुनौती देते हैं। क्रिकेट के खेल को बैकग्राउंड के तौर पर इस्तेमाल करते हुए, यह फ़िल्म एकता, संघर्ष और जीत में अटूट विश्वास का एक ज़बरदस्त संदेश देती है। देशभक्ति से ओत-प्रोत यह फ़िल्म हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फ़िल्मों में से एक है और आज भी दर्शकों की पसंदीदा बनी हुई है।

मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी

रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की यह गाथा देश की सेवा में महिलाओं के निडर और शानदार योगदान को उजागर करती है। फ़िल्म का हर सीन देशभक्ति के जोश से भरा हुआ है। कंगना रनौत की ज़बरदस्त एक्टिंग से सजी यह फ़िल्म देशभक्ति की गहरी भावना जगाती है। यह रोंगटे खड़े कर देने वाला सिनेमाई अनुभव हर भारतीय को अपने देश पर गर्व करने के लिए प्रेरित करता है।

बॉर्डर 

जे.पी. दत्ता की 'बॉर्डर' भारतीय सिनेमा की सबसे मशहूर वॉर जिल्मों में से एक है। 1997 में रिलीज हुई इस जिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ और अक्षय खन्ना जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान राजस्थान में हुई लोंगेवाला की लड़ाई से प्रेरित है, जिसमें भारतीय सेना के सैनिकों की एक छोटी सी टुकड़ी ने पाकिस्तानी सेना की बहुत बड़ी जौज का सामना किया था। जिल्म में दिखाया गया है कि कैसे मुश्किल हालात के बावजूद सैनिकों ने अपनी पोस्ट नहीं छोड़ी। सनी देओल का मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी का किरदार जिल्म के सबसे यादगार किरदारों में से एक है।

 राजी  

मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी 'राजी' एक जासूस की नजर से देशभक्ति को दिखाती है। आलिया भट्ट ने सहमत का किरदार निभाया है, जबकि विक्की कौशल पाकिस्तानी सेना के अजसर इक़बाल के रोल में हैं। यह कहानी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय की है। सहमत एक भारतीय महिला है जिसकी शादी पाकिस्तान के एक मिलिट्री परिवार में होती है। शादी के बाद वहाँ रहते हुए, वह भारत के लिए जरूरी खुफिया जानकारी इकट्ठा करती है। इस मिशन के दौरान, उन्हें कई ऐसे जैसले लेने पड़ते हैं जिनसे उनकी अपनी जान जोखिम में पड़ जाती है। जिल्म दिखाती है कि देश के लिए काम करने वाले जासूसों को अपने निजी रिश्तों और भावनाओं को कैसे किनारे रखना पड़ता है।

शेरशाह 

सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​की जिल्म 'शेरशाह' कारगिल युद्ध के बहादुर सैनिक कैप्टन विक्रम बत्रा की जिंदगी पर आधारित है। विष्णुवर्धन के निर्देशन में बनी इस जिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​ने विक्रम बत्रा का किरदार निभाया है, जबकि कियारा आडवाणी उनकी गर्लफ्रेंड डिंपल चीमा के रोल में हैं। यह जिल्म विक्रम बत्रा के बचपन से लेकर सेना में शामिल होने और कारगिल युद्ध में उनकी अहम भूमिका तक के सजर को दिखाती है। इसमें उस अटूट जज्बे और हिम्मत को दिखाया गया है जिसके साथ उन्होंने लड़ाई के दौरान दुश्मन का सामना किया था।

सैम बहादुर 

विक्की कौशल की 'सैम बहादुर' भारत के पहले जील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की जिंदगी पर बनी बायोपिक है। इस जिल्म को मेघना गुलजार ने डायरेक्ट किया है। विक्की कौशल ने सैम मानेकशॉ का रोल निभाया है, जबकि जातिमा सना शेख़ ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सान्या मल्होत्रा ​​ने उनकी पत्नी सिल्लू का किरदार निभाया है। यह जिल्म सैम मानेकशॉ के मिलिट्री करियर और व्यक्तित्व की गहरी झलक दिखाती है, जिसमें सेना में उनके शुरुआती दिनों से लेकर 1971 के भारत-पाक युद्ध तक का सजर दिखाया गया है।

मंगल पांडे 

भारत में गुलामी की बेड़ियां तोड़ने की शुरुआत 1857 के विद्रोह से हुई थी। 2005 की फ़िल्म 'मंगल पांडे: द राइजिंग' अंग्रेज़ों के ख़िलाफ हुए इसी पहले बड़े विद्रोह की कहानी बताती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे मंगल पांडे के किरदार में आमिर खान अपने निडर अंदाज और जोश भरे नारों से पूरे ब्रिटिश राज की नींव हिला देते हैं। देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत यह फिल्म हर भारतीय के दिल में देश के लिए गर्व और क्रांतिकारी जोश जगाती है।

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