West Bengal Post-Poll Violence : सरकार के लिए चुनौती है राजनीतिक हत्याओं पर विराम लगाना
Hari Mangal
West Bengal Post-Poll Violence : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से शुरू हुआ हिंसा का दौर गंभीर रूप लेता जा रहा है। हिंसा मुक्त चुनाव संपन्न होने का दावा हिंसा की आंधी में उड़ गया है। अब तक हुई हिंसा में आधा दर्जन लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं, जिनमें कम से कम तीन भाजपा कार्यकर्ता हैं, जबकि हमलों में घायल हुए कार्यकर्ताओं का कोई आंकड़ा नहीं है। चुनाव आयोग के निर्देश के बाद प्रशासन ने अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई तो शुरू की है, लेकिन वह भयमुक्त अपराधियों पर अंकुश लगाने में असफल है। ऐसे में अब राज्य में गठित होने वाली नई भाजपा सरकार के समक्ष पहली चुनौती राजनीतिक हिंसा को रोकना और अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगी।
राज्य में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना लागू होने के बाद से ही तैनात किए गए 2.50 लाख अर्धसैनिक बलों के खौफ से दोनों चरणों के चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गए। पश्चिम बंगाल के संदर्भ में यह पिछले चार-पांच दशकों का नया रिकॉर्ड है जब कोई चुनाव बिना मार-काट के पूरा हुआ है। शायद यही कारण था कि राज्य में मतदाताओं ने भयमुक्त होकर मतदान किया, जिससे न केवल मत प्रतिशत बढ़ा अपितु ममता के 'जंगलराज' से पश्चिम बंगाल आजाद हो पाया। मतदाताओं को केंद्रीय गृहमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया था कि चुनाव परिणाम आने के बाद तीन माह तक 70 हजार अर्धसैनिक बल राज्य में बने रहेंगे। इस घोषणा से मतदाताओं को यह भरोसा हो चला था कि चुनाव बाद प्रतिशोध में होने वाली घटनाओं पर अंकुश लगेगा, क्योंकि राज्य में विधानसभा से इतर लोकसभा चुनाव हों या पंचायत चुनाव, कभी बिना हिंसा और हत्या के पूरे नहीं हुए हैं।
चुनाव परिणाम के साथ हिंसा और हत्या
विधानसभा चुनाव की मतगणना अभी औपचारिक रूप से पूरी भी नहीं हुई थी कि कोलकाता सहित राज्य के कई स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन और हमले प्रारंभ हो गए। इन हमलों में तीन भाजपा कार्यकर्ताओं सहित 6 लोग मारे गए हैं। तृणमूल कांग्रेस भी अपने दो समर्थकों की मौत का दावा कर रही है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की सुनियोजित तरीके से हुई हत्या ने तो पूरे पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को आक्रोश से भर दिया है। अपराधियों के निशाने पर केवल राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि राज्य पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान भी हैं। उत्तर परगना के संदेशखाली क्षेत्र में अपराधियों की फायरिंग में नजत थाने के प्रभारी अधिकारी और दो पुलिसकर्मियों सहित केंद्रीय बल के दो जवान घायल हो गए।
राज्य में बीरभूम, नदिया, हावड़ा, बांकुड़ा और दक्षिण 24 परगना के कई इलाकों में हिंसा और अराजकता का तांडव 4 मई से ही चल रहा है। तकनीकी रूप से 7 मई तक राज्य की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी इस हिंसा पर मूक दर्शक बनी रहीं, जिसके कारण चुनाव आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा। अब तक राज्य में 200 से अधिक प्राथमिकियाँ (FIR) दर्ज हुई हैं, 433 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं और 1100 से अधिक लोग हिरासत में हैं। अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी के बावजूद राज्य में हर घंटे कहीं न कहीं हिंसक झड़पें, आगजनी अथवा हिंसा हो रही है।
पुराना है हिंसा का इतिहास
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास बहुत पुराना है। पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में 'कॉल ऑफ जस्टिस' की एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1300 हिंसा की घटनाएं हुईं और 17 लोगों की मौत हुई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का दावा है कि 2019 से 2021 के बीच भाजपा के 130 से ज्यादा कार्यकर्ता मारे गए। महिलाओं से छेड़छाड़ और बलात्कार जैसे गंभीर आरोपों को देखते हुए कोलकाता उच्च न्यायालय ने जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी थी। 2024 का लोकसभा चुनाव और उससे पहले 2018 के पंचायत चुनाव (जिसमें 75 हत्याएं हुईं) इसके गवाह हैं।
सरकार के लिए चुनौती
पश्चिम बंगाल में सत्ता पोषित अपराधी सदैव से सक्रिय रहे हैं। अब सत्ता में आने के बाद ऐसे तत्वों से निपटना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। चुनाव से पहले भाजपा ने वादा किया था कि वह 'कानून का शासन' स्थापित करेगी। अब भाजपा को इसी प्रतिबद्धता को धरातल पर उतारना होगा।
अन्य प्रमुख खबरें
-
रूसी तेल पर 100% टैरिफ की धमकी, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर संकट
2026-09-23
-
अंक नहीं, बच्चों का आत्मविश्वास बचाइए
2026-09-21
-
मोदी सरकार के 12 साल: कितना बदला भारत?
2026-09-15
-
राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता में RSS की भूमिका
2026-09-08
-
बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमले, तारिक रहमान सरकार पर उठे सवाल
2026-08-31
-
वन्दे मातरम्: राष्ट्रीय चेतना से विकसित भारत 2047 के संकल्प तक
2026-08-30
-
युवाओं का शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक अधिकार
2026-08-22
-
भारत की 79 वर्षों की विकास यात्रा और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
2026-08-16
-
सावन का महीना सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित है या इसके पीछे कोई गहरा विज्ञान छिपा है?
2026-08-16
-
विकसित भारत 2047: युवा शक्ति की भूमिका
2026-08-09
-
370 के 7 साल: कितना बदला कश्मीर?
2026-08-05
-
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार
2026-08-03
-
हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत
2026-07-20
-
डिजिटल भारत: वैश्विक मंच पर नई पहचान
2026-07-14
-
पंच परिवर्तन’ : राष्ट्रोत्थान और सामाजिक नव-जागरण का महामंत्र
2026-07-09