महिला सशक्तिकरण के लिए परिसीमन आवश्यक
नई दिल्लीः महिलाओं की सक्रिय एवं ऊर्जावान सहभागिता एवं भागीदारी भारत के लोकतंत्र को मजबूती एवं संसद (देश का सर्वोच्च पंचायत ,लोकतंत्र की आत्मा एवं जन अपेक्षाओं का प्रबल केंद्र )को अधिक विमर्शी एवं अधिक प्रतिनिधिक होना सामयिक परिप्रेक्ष्य में अति आवश्यक एवं प्रासंगिक है। महिला आरक्षण अधिनियम अतीत की पूर्वकल्पित कल्पनाओं को साकार करेगा एवं भविष्योन्मुखी लोकाकांक्षाओं को पूरा करेगा । लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% स्थान आरक्षित करनेवाला विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में इस सदी के महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। महिलाओं का सशक्तिकरण विकसित भारत@2047के लिए अति आवश्यक है ,जिससे महिलाएं सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में अग्रगण्य एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें ,जो वैश्विक स्तर पर सशक्त, स्वालंबी एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए आवश्यक सराहनीय पहल होगा।
हर क्षेत्र में बढ़ रही महिलाओं की भागेदारी
इनका सशक्तिकरण राष्ट्र - राज्य के सनातन मूल्य ,धर्म एवं संस्कृति के आधार पर ही करना पड़ेगा । महिला सशक्तिकरण की दिशा में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर के राष्ट्र - राज्यों के तुलना में गुणात्मक है। भारत के पास शाश्वत धरोहर है, उसके आधार पर ही महिला सशक्तिकरण की यात्रा को सशक्त बनना है। शरद चंद चट्टोपाध्याय के उपन्यास में भारतीय महिला के सब प्रकार के संदर्भ में व्यक्त है। मनोवैज्ञानिक निष्कर्षों एवं सामाजिक विज्ञानों में शोध से पता चलता है कि पुरुषों के कई काम महिलाएं ज्यादा अच्छे से कर सकती हैं, लेकिन महिलाओं के कई काम पुरुष उतना अच्छे से नहीं कर सकते हैं।
महिलाओं का सशक्तिकरण विधि -निर्माण निकायों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व के द्वारा प्रदान करके मजबूत किया जाएं , जिससे वह अपना उचित प्रतिनिधित्व कर सकें। संसद एवं राज्य विधायिकाओं में अपने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पक्ष की मजबूती कर सकें। देश एवं संवैधानिक सरकार को महिलाओं की गरिमा एवं उनके सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना चाहिए। इनको सर्वोच्च विकासात्मक पहलुओं के विकास एवं सशक्तिकरण के लिए योजनाओं का व्यापक तंत्र तैयार किया जाए, जिससे इनका सर्वोच्च विकास हो सके, जिससे इनका आत्मविश्वास एवं अवसर की स्वतंत्रता का उन्नयन हो सकें। मुद्रा योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाया है। पीएम आवास योजना से घर की लक्ष्मी को घर का मालिकाना अधिकार मिला है। सुकन्या समृद्धि योजना से भारत की बेटियों का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित हुआ है। पीएम उज्जवल योजना से महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली एवं उनके जीवन में गुणात्मक सुधार हुआ है। मिशन इंद्रधनुष के तहत टीकाकरण से माताओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य में गुणात्मक सुधार हुआ एवं सुरक्षित जीवन की नींव मजबूत हुई है। पीएम मातृ वंदना योजना से गर्भवती माताओं को पोषण एवं आर्थिक सहारा मिला है। तीन तलाक रोधी कानून से मुस्लिम महिलाओं को अन्याय , मानसिक तनाव , शारीरिक प्रताड़ना एवं शारीरिक शोषण से निजात मिला है। नल से घर तक जल पहुंचने से महिलाओं का जीवन सुगम हुआ है। लखपति दीदी योजना से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ी हैं।इन सभी के अनुपालन एवं अनुप्रयोग से महिलाओं की स्थिति में सशक्तिकरण एवं विकासात्मक पहलुओं का विकास हुआ है।
क्या है सरकार का प्लान
परिसीमन का आशय जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के लिए प्रत्येक राज्य में सीटों की संख्या एवं क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र की सीमाएं तय करना है। इस प्रक्रिया के लिए परिसीमन आयोग का गठन किया गया है। परिसीमन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता के वोट का समान मूल्य हो यानी एक व्यक्ति एक वोट ।यही लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का सार है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 82 के अनुसार, संसद प्रत्येक जनगणना के पश्चात परिसीमन आयोग बनाती है। सन् 2002 के 84 वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने 2026 के पश्चात होने वाली पहली जनगणना तक कुल सीटों की संख्या ,एवं क्षेत्रीय सीमाओं को स्थिर कर दिया है । संसद का दूसरा लक्ष्य 2029 तक महिलाओं के 33% कोटे को क्रियान्वित करने के लिए विधियों में बदलाव करना है। महिलाओं के कोटे का उद्देश्य संसाधनों को बराबरी से साझा करने से है। सरकार महिला सशक्तिकरण को क्रियान्वित करना चाहती है तो 543 सीटों वाली लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में कोटा क्रियान्वित कर दिया जाना चाहिए।
संयुक्त राज्य अमेरिका के कांग्रेस के निम्न सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 1913 से सीटों की संख्या 435 रही है, जबकि तत्कालीन से लेकर वर्तमान तक जनसंख्या लगभग चार गुना बढ़ चुकी है। यूरोपियन यूनियन(EU ) की संसद में 720 सदस्य हैं। इन सभी सीटों को 27 देशों के बीच अनुक्रमणी अनुपातिक के सिद्धांत के आधार पर विभाजित किया गया है।
समाज में महिलाओं की भूमिका
देश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए संतुलन बनाना आवश्यक है। नीति - निर्धारण एवं नीति- निर्माण में महिलाओं की सक्रिय योगदान और भूमिका के लिए नागरिक सरकार ने महिला शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आई है । यह महिला सशक्तिकरण का दृष्टिकोण पत्र है। नागरिक समाज एवं नागरिक सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि 2029 से संसदीय एवं राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचन में महिलाओं को 33% सहभागिता रहे। परिवार, समाज, नागरिक समाज ,नागरिक सरकार, नीति निर्माण एवं नीति क्रियान्वयन में महिलाओं की 33% सहभागिता हो सके, वे सशक्त हों, नीति -निर्माण एवं नीति - क्रियान्वयन में उनकी सशक्त भूमिका हों एवं राष्ट्र- राज्य का मुखर आवाज बन सकें। भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, दार्शनिक परंपरा एवं आधुनिक सनातनी विचार प्रणाली में एक शोधात्मक दस्तावेज है,जिसकी बुनियाद में मैत्री, अरुंधति, गार्गी,आपला एवं घोषा इत्यादि विदुषी महिलाओं ने वेद संहिताएं रचने से लेकर व्यक्ति के जीवन के अनेक क्षेत्रों में अपनी शोधात्मक एवं पांडित्यपूर्ण दृष्टि , उदात्त चिंतन, व मनन एवं विलक्षण विवेकी प्रज्ञा की भूमिका निभा रही हैं। आधुनिक भारत के नव निर्माण में अहिल्याबाई होल्कर जैसी प्रजा हितैषी ,प्रजा के प्रति उत्तरदाई एवं प्रजा के कल्याण के प्रति तत्पर शासकीय संरचना ने प्रशासनिक कौशल एवं लोक कल्याण के मानक स्थापित किए , वहीं झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई जी ने मातृभूमि एवं राष्ट्र के प्रति लगाव से प्रेरित होकर राष्ट्रीयता के लिए अपने प्राणोत्सर्ग से आधुनिक भारत में भारतीय महिलाओं के त्याग, राष्ट्रभक्ति, राष्ट्र सेवा एवं राष्ट्र निर्माण में महत्ती योगदान के अप्रतिम साधक एवं योगिनी बनी थीं।
महिला सशक्तिकरण लोकतांत्रिक शासकीय प्रणाली का एक ऐसा मानवीय पक्ष एवं केंद्रीकृत अध्याय है, जिसने लोकतंत्र को अधिक प्रसार एवं अधिक प्रतिनिधि बनने में सहयोग कर रहा है। यह अवसर ,समानता, स्वतंत्रता, समावेशन एवं लोक भागीदारी का उन्नयन कर रहा है। इससे महिलाओं को लोकसभा एवं राज्यों की विधानसभाओं में उचित स्थान सुनिश्चित करने में सहयोग प्राप्त होगा । इससे सामाजिक न्याय एवं मानवीय गरिमा के उन मूल्यों को उन्नयन करना है, जो आधुनिक भारत के निर्माण में शाश्वत व प्रासंगिक भूमिका निभाया है। परिसीमन के द्वारा करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं एवं राजनीतिक भागीदारी का श्री गणेश होगा, जो एक सशक्त ,उत्तरदाई एवं सुशासन की दिशा में उच्चतर आदर्श का पाथेय प्रदान करेगा। अतीत से वर्तमान तक के संघर्षों में एवं राष्ट्र - निर्माण की प्रक्रिया में अमूल्य योगदान दिया है। सामयिक में महिलाएं हर क्षेत्र में मिसाल बन रही है। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यम ,सशस्त्र बलों, खेलो, निजी क्षेत्र , राजनयिक क्षेत्र एवं राजनीतिक क्षेत्र में अच्छा निष्पादन कर रही हैं। प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली ,आधुनिक भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं पारंपरिक मूल्य एवं आदर्श बताते हैं कि वही समाज उच्चतर प्रगति करता है जिसमें महिलाओं को बेहतर भविष्य के ज्यादा अवसर होते हैं।
महिला सशक्तिकरण से ही पड़ेगी विकसित भारत की नींव
भारत सरकार ,नागरिक समाज एवं सांस्कृतिक संगठनों ने महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। शिक्षा तक महिलाओं की पहुंच ,महिलाओं के लिए उच्च स्तरीय सुविधाएं, बेहतर मूलभूत सुविधाएं, वित्तीय समावेशन में सहभागिता ,सामाजिक स्तर पर सुरक्षित वातावरण, न्यायिक व्यवस्था का अनुकूल एवं त्वरित क्रियान्वयन में सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में उनकी भागीदारी एवं सहभागिता को मजबूती दी है, फिर भी इन समस्त प्रयासों के बावजूद महिलाओं को संसदीय निकायों , विधायिकाओं,राज्य की विधि निकायों एवं अन्य निर्णय- निर्माण संस्थाओं एवं संगठनों में प्रतिनिधित्व निम्न हैं।जब महिलाएं प्रशासन क्रियान्वयन एवं प्रशासकीय निकायों में सहभागी होती है, तो उनके अनुभव, कार्य क्षमता एवं दृष्टिकोण का बहुत मूल्य होता है। इससे विमर्श समृद्ध होता है एवं शासकीय गुणवत्ता में भी उन्नयन होता है।
सामयिक परिप्रेक्ष्य में महिला सशक्तिकरण लोकतांत्रिक विकास लोकतांत्रिक विचार - विमर्श एवं समावेशी अर्थव्यवस्था की केंद्रीय मांग हो चुकी हैं ।सामयिक में शिक्षा आर्थिक स्वालंबन, सामाजिक- राजनीतिक भागीदारी एवं स्वस्थ परिवेश के लिए अपरिहार्य हो चुका है। महिला सशक्तिकरण विकसित भारत @2047 एवं परम वैभव संपन्न भारत के लिए अति आवश्यक हो चुका है। महिला सशक्तिकरण के लिए परिसीमन अति आवश्यक है, क्योंकि महिलाओं के आरक्षण के क्रियान्वयन के लिए सीमाओं का निर्धारण करना होता है। इसके द्वारा लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्वितरण होता है ,जिससे 33% आरक्षण को प्रदान किया जा सके। परिसीमन के पश्चात महिलाओं के लिए अधिक प्रभावी एवं संतुलित राजनीतिक भागीदारी का मार्ग तय होगा।
लेखक के सुझाव
1. शैक्षणिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का उन्नयन करके;
2. सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन के द्वारा महिलाओं की उपादेयता;
3. स्थानीय स्तर पर निर्णय क्षमता एवं परिसीमन योजना का क्रियान्वयन करके;
4. सामाजिक सुरक्षा, संरक्षा एवं विधि के शासन के क्रियान्वयन से;
5. महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यशाला ,संगोष्ठी एवं अधिवेशनों के द्वारा उनका मानसिक क्षितिजीकरण करके;
6. उनके अधिकारोंविषयक जागरूकता के द्वारा;एवं
7. परिसीमन के द्वारा नए क्षेत्रों का सीमांकन करके महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान किया जा सकता है।
डॉ.बालमुकुंद पाण्डेय
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना समिति झंडेवालान, नई दिल्ली ।
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